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UP : हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते कमाऊ पति
Thu, 23 Apr 2026 06:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 23 Apr 2026 06:04 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का गुजारा-भत्ता हर पति की जिम्मेदारी है। अगर वह कमाऊ है तब तो वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ ही नहीं सकता।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का गुजारा-भत्ता हर पति की जिम्मेदारी है। अगर वह कमाऊ है तब तो वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ ही नहीं सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने बरेली के दंत चिकित्सक की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। उन्होंने परिवार न्यायालय की ओर से पत्नी को आवेदन की तिथि से आदेश की तिथि तक 10,000 रुपये प्रति माह और उसके बाद से 12,000 रुपये प्रति माह गुजारा-भत्ता अदा करने वाले आदेश को चुनौती दी थी।
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हालांकि, कोर्ट ने पाया कि चिकित्सा से पति की मासिक आय करीब डेढ़ लाख रुपये है, जबकि पत्नी के पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है। पति अपनी कम आय की दलीलों को साबित करने में विफल रहा। परिवार न्यायालय ने गुजरा-भत्ता की रकम मामले की हर परिस्थितियों पर मंथन करने के बाद ही तय किया था।
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