UP Board : सॉल्वर मामलों में डिजिटल साक्ष्यों के जरिये विवेचना को बनाएं मजबूत
हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में पंजीकृत परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वर बैठाकर परीक्षा दिलाने के मामलों में बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने 18 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
विस्तार
हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में पंजीकृत परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वर बैठाकर परीक्षा दिलाने के मामलों में बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने 18 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जांच केवल भौतिक साक्ष्यों तक सीमित न रहे, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों को भी अनिवार्य रूप से संकलित कर विवेचना को मजबूत बनाया जाए।
सचिव ने आगरा, एटा, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, शाहजहांपुर, फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, इटावा, कन्नौज, झांसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, गोंडा, मैनपुरी और गोरखपुर के डीआईओएस से सॉल्वर बैठाने की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पत्र में यह भी कहा गया है कि सॉल्वर के कक्ष में तैनात कक्ष निरीक्षक की संभावित मिलीभगत, उनकी ड्यूटी चयन प्रक्रिया और परीक्षा प्रारंभ होने के पहले 15 मिनट में फोटो मिलान की कार्रवाई की जांच की जाए।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाए कि केंद्र व्यवस्थापक ने तत्काल पुलिस को सूचना दी या तथ्य छिपाने का प्रयास किया। सॉल्वर गैंग के एजेंट की पहचान कर यह भी जांच करने को कहा गया है कि वे किसी व्हाट्सएप ग्रुप या टेलीग्राम के माध्यम से पेपर लीक या सॉल्वर सिंडिकेट से तो नहीं जुड़े हैं।
फोटो मिलान और हस्ताक्षर सत्यापन पर सवाल
पत्र में पूछा गया है कि क्या मूल प्रवेश पत्र में फोटो सुपर इम्पोज या कंप्यूटर एडिटिंग से बदली गई। क्या केंद्र के प्रवेश द्वार पर प्रवेश पत्र और परीक्षार्थी के चेहरे का मिलान किया गया, उपस्थिति पत्रक व प्रवेश पत्र पर किए गए हस्ताक्षरों का सत्यापन हुआ या नहीं, यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित कक्ष निरीक्षक या कर्मी की भूमिका स्पष्ट की जाए। सचिव ने निर्देश दिया है कि बोर्ड पोर्टल पर अपलोड मूल फोटो और प्रवेश पत्र पर चस्पा फोटो के मेटाडाटा की जांच की जाए। यह भी देखा जाए कि फोटो किसी एआई टूल या सॉफ्टवेयर से बदली तो नहीं गई। सॉल्वर के केंद्र में प्रवेश से लेकर पकड़े जाने तक का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखा जाए, ताकि न्यायालय में पहचान का पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सके।
स्कूल और अभिभावकों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सचिव ने पूछा है कि जिस विद्यालय में छात्र अध्ययनरत है, वहां के प्रधानाचार्य या लिपिक द्वारा बोर्ड पोर्टल पर जानबूझकर गलत फोटो तो अपलोड नहीं की गई। साथ ही यह भी जांच की जाए कि वास्तविक पंजीकृत छात्र की वर्तमान स्थिति क्या है, क्या वह लगातार अनुपस्थित रहा। क्या अभिभावकों को इस हेरफेर की जानकारी थी। यदि किसी एजेंट को भुगतान किया गया है तो इसे विवेचना में शामिल किया गया है या नहीं।