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बोर्ड परीक्षा कल से, कक्ष निरीक्षकों का पता नहीं
Updated Wed, 15 Mar 2017 12:26 AM IST
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इलाहाबाद
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यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू होने जा रही हैं। इसके लिए बोर्ड की ओर से कई बैठकें करके व्यापक पैमाने पर तैयारियां की गईं, बावजूद इसके अव्यवस्था साफ नजर आ रही है। परीक्षा में 60 लाख परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं, जिनके लिए 11 हजार से अधिक केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड ने लगभग एक लाख कक्ष निरीक्षकों की तैनाती की है, लेकिन हालत यह है कि जिले में बड़ी संख्या में कक्ष निरीक्षकों को ड्यूटी की जानकारी तक नहीं है। ऐसे में पहले दिन परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं।
बोर्ड की ओर से परीक्षा के लिए हर संभव तैयारी की कोशिश के बाद परीक्षार्थियों, केन्द्र व्यवस्थापकों, अभिभावकों एवं कक्ष निरीक्षकों की शिकायत दूर नहीं की जा सकी है। बोर्ड की ओर से तो दावा यही है कि परीक्षा की पूरी तैयारी है, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बोर्ड के अधिकारी भी होली के दूसरे दिन आपस में बैठ कर कुल परीक्षा केन्द्र और परीक्षार्थियों की संख्या को लेकर मंथन करते रहे। जिले में केंद्र व्यवस्थापकों को पता नहीं है कि उनके विद्यालय कहां के शिक्षकों की ड्यूटी लगी है। प्रधानाचार्यों का कहना है कि देरी से पहले दिन परीक्षा प्रभावित हो सकती है।
मानदेय वालों की ड्यूटी लगाने से बढ़ेगी परेशानी
जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से वित्तविहीन विद्यालयों के मानदेय वाले शिक्षकों को ही परीक्षा ड्यूटी में लगाए जाने से परेशानी बढ़ सकती है। जिला विद्यालय निरीक्षकों ने वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से जिन शिक्षकों को मानदेय मिल रहा है, उन्हीं को परीक्षा में लगाने को कहा है। वित्तविहीन विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें मानदेय नहीं मिलता। वित्तविहीन शिक्षकों ने बताया कि निजी प्रबंधन बोर्ड से एक सेक्शन की पढ़ाई कराने की अनुमति लेकर तीन-चार सेक्शन चला रहे हैं, इन अतिरिक्त सेक्शन में पढ़ने-पढ़ाने वाले बच्चे एवं शिक्षक आखिर में कहां जाएंगे। बढ़े बच्चों की परीक्षा कराने के लिए अतिरिक्त कक्ष निरीक्षक कहां से आएंगे।
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बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी नहीं
यूपी बोर्ड परीक्षा में इससे पूर्व में बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षक कक्ष निरीक्षक के रूप में काम करते थे। अबकी बार बेसिक शिक्षा परिषद की परीक्षाएं 18 मार्च से शुरू होने के कारण इन शिक्षकों को यूपी बोर्ड परीक्षा में नहीं लगाया गया है। बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगने और वित्तविहीनों में मात्र मानदेय वालों को परीक्षा कार्य में लगाए जाने से परेशानी बढ़ सकती है।
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बोर्ड की ओर से परीक्षा के लिए हर संभव तैयारी की कोशिश के बाद परीक्षार्थियों, केन्द्र व्यवस्थापकों, अभिभावकों एवं कक्ष निरीक्षकों की शिकायत दूर नहीं की जा सकी है। बोर्ड की ओर से तो दावा यही है कि परीक्षा की पूरी तैयारी है, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बोर्ड के अधिकारी भी होली के दूसरे दिन आपस में बैठ कर कुल परीक्षा केन्द्र और परीक्षार्थियों की संख्या को लेकर मंथन करते रहे। जिले में केंद्र व्यवस्थापकों को पता नहीं है कि उनके विद्यालय कहां के शिक्षकों की ड्यूटी लगी है। प्रधानाचार्यों का कहना है कि देरी से पहले दिन परीक्षा प्रभावित हो सकती है।
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मानदेय वालों की ड्यूटी लगाने से बढ़ेगी परेशानी
जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से वित्तविहीन विद्यालयों के मानदेय वाले शिक्षकों को ही परीक्षा ड्यूटी में लगाए जाने से परेशानी बढ़ सकती है। जिला विद्यालय निरीक्षकों ने वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से जिन शिक्षकों को मानदेय मिल रहा है, उन्हीं को परीक्षा में लगाने को कहा है। वित्तविहीन विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें मानदेय नहीं मिलता। वित्तविहीन शिक्षकों ने बताया कि निजी प्रबंधन बोर्ड से एक सेक्शन की पढ़ाई कराने की अनुमति लेकर तीन-चार सेक्शन चला रहे हैं, इन अतिरिक्त सेक्शन में पढ़ने-पढ़ाने वाले बच्चे एवं शिक्षक आखिर में कहां जाएंगे। बढ़े बच्चों की परीक्षा कराने के लिए अतिरिक्त कक्ष निरीक्षक कहां से आएंगे।
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बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी नहीं
यूपी बोर्ड परीक्षा में इससे पूर्व में बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षक कक्ष निरीक्षक के रूप में काम करते थे। अबकी बार बेसिक शिक्षा परिषद की परीक्षाएं 18 मार्च से शुरू होने के कारण इन शिक्षकों को यूपी बोर्ड परीक्षा में नहीं लगाया गया है। बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगने और वित्तविहीनों में मात्र मानदेय वालों को परीक्षा कार्य में लगाए जाने से परेशानी बढ़ सकती है।