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up assembly election 2022 :  दरकती जमीन बचाने प्रतापगढ़ पहुंचीं थीं इंदिरा, जनसंघ के हाथ से छीनी थी जीत

Tue, 18 Jan 2022 12:33 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 18 Jan 2022 12:33 AM IST
सार

1962 के चुनाव में कांग्रेस की हार और जनसंघ को तीन सीटें मिलने के बाद 1967 में पूर्व प्रधानमंत्री ने पलट दी थी बाजी। कुंडा डाक बंगले में राजा अजीत सिंह से इंदिरा गांधी की मुलाकात के बाद बदल गए थे चुनावी समीकरण। जनसंघ से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे सांसद रहे राजा अजीत, छह सीटों पर कांग्रेस ने दर्ज की थी जीत।

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up assembly election 2022: Indira had reached Pratapgarh to save seat, the victory from Jana Sangh
इंदिरा गांधी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

1962 के विधानसभा चुनाव में जनसंघ को तीन सीटों पर मिली जीत से कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा था। तीन सीटों पर मिली करारी हार के बाद प्रतापगढ़ में कांग्रेस की सियासी जमीन खिसक रही थी। कांग्रेस इसे पचा नहीं पा रही थी। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने के लिए खुद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को प्रतापगढ़ आना पड़ा।

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इस बार भी माहौल जनसंघ के पक्ष में था, मगर चुनाव से पहले इंदिरा गांधी ने अपने सधे दांव से बाजी पलट दी। कुंडा के डाक बंगले में जनसंघ के सांसद राजा अजीत प्रताप सिंह से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुलाकात की। इसके बाद वह जनसंघ से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए। चुनाव से पहले डाक बंगले की इस मुलाकात से चुनावी समीकरण बदल गए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने छह सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और जनसंघ का सूपड़ा साफ हो गया। 

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1962 के विधानसभा व लोकसभा चुनाव एक साथ हुए थे। विधानसभा चुनाव में जिले में खाता खोलने के साथ ही जनसंघ ने पट्टी, सदर और कोहड़ौर की सीट पर जीत दर्ज की। तीनों सीटों पर कांग्रेस को करारी हार मिली। लोकसभा चुनाव में भी प्रतापगढ़ में जनसंघ का डंका बजा और राजा अजीत प्रताप सिंह सांसद चुने हुए थे।

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नेहरू भी आए थे प्रचार करने

इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी प्रचार करने आए थे। बावजूद इसके कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी। कांग्रेस इस हार को भुला नहीं पा रही थी। पार्टी के नेता प्रतापगढ़ में कांग्रेस के सियासी जमीन दरकने से चिंतित थे। 1962 की जीत के बाद 1967 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जनसंघ के नेता उत्साहित थे। जनसंघ का माहौल भी बना था।

 

चुनाव से पहले अचानक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी प्रतापगढ़ पहुंच गईं। जिले की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले आचार्य ओमप्रकाश पांडेय बताते हैं कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कुंडा डाक बंगले में रुकीं और जनसंघ के सांसद राजा अजीत प्रताप सिंह से मुलाकात की। घंटेभर की इस मुलाकात ने जिले के सियासी समीकरण बदल दिए।
 

इंदिरा जनसंघ में सेंध लगाने में कामयाब रहीं। उनसे मुलाकात के बाद राजा अजीत प्रताप सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। इससे जनसंघ को तगड़ा झटका लगा। चुनाव आते-आते माहौल कांग्रेस के पक्ष में हो गया।

 

इसका नतीजा यह रहा कि कांग्रेस ने जिले की कुंडा, बिहार (अब बाबागंज), लक्ष्मणपुर (अब विश्वनाथगंज), रामपुर खास, सदर, पट्टी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बीरापुर (अब रानीगंज) में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। यहां से एसएसपी से रामदेव दूबे ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को छह सीटों पर जीत मिली थी। चुनाव में जनसंघ के प्रत्याशी चौथे नंबर थे।  

1967 के विधानसभा चुनाव में जीते विधायक 
कुंडा में कांग्रेस से नियात साहब 
बिहार( अब बाबागंज) कांग्रेस से रामस्वरूप भारती 
लक्ष्मणपुर (अब विश्वनाथगंज) कांग्रेस से रामनरेश शुक्ला
सदर से कांग्रेस के राजा अजीत प्रताप सिंह 
रामपुर खास से कांग्रेस के रामअंजोर मिश्र 
पट्टी से कांग्रेस के रामकिंकर 
बीरापुर से एसएसपी से रामदेव दूबे

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