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up assembly election 2022 :  सीपीएम के गढ़ कोरांव में कभी हाथी झूमा तो कभी खिला कमल

Fri, 28 Jan 2022 03:21 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 28 Jan 2022 03:21 AM IST
सार

जिले की सुरक्षित विधानसभा सीट कोरांव पर आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में रहे हैं। इससे पहले कोरांव इलाका मेजा और करछना विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था। आदिवासी बाहुल्य इस विधानसभा क्षेत्र में 2007 व 2012 के चुनाव में हाथी ही झूमता रहा। तब बसपा नेता राजबली जैसल ने लगातार दोनों चुनावों में जीत दर्ज की थी।

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up assembly election 2022: In CPM stronghold Koraon, sometimes elephant swings and sometimes lotus blooms
यूपी चुनाव इतिहास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेजा और करछना विधानसभा क्षेत्रों को काटकर वर्ष 2007 में पहली बार अलग अस्तित्व में आई आदिवासी बहुल इलाके की कोरांव सीट पर वामपंथी विचारधारा के गढ़ के रूप में भी जानी जाती रही है। आदिवासी बहुल इस इलाके से सीपीएम का भी सिक्का चल चुका है। लेकिन, इस सीट के गठन के अब तक के 15 सालों में हुए तीन विस चुनावों में मतदाता दो बार हाथी की मतवाली चाल पर झूमे तो बीते विधान सभा चुनाव में पहली बार कमल खिल चुका है।

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जिले की सुरक्षित विधानसभा सीट कोरांव पर आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में रहे हैं। इससे पहले कोरांव इलाका मेजा और करछना विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था। आदिवासी बाहुल्य इस विधानसभा क्षेत्र में 2007 व 2012 के चुनाव में हाथी ही झूमता रहा। तब बसपा नेता राजबली जैसल ने लगातार दोनों चुनावों में जीत दर्ज की थी।

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2017 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने राजमणि

हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कमल खिला और राजमणि कोल विधायक बने। भाजपा उम्मीदवार राजमणि कोल को जहां एक लाख 427 वोट मिले थे। वहीं, दूसरे स्थान पर कांग्रेस के रामकृपाल रहे। जिन्हें 46 हजार 731 वोट मिले थे। तब भाजपा के राजमणि कोल ने 53 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल करने के साथ ही जिले में सबसे ज्यादा मत हासिल किया था।


इस सीट पर अदिवासी के साथ ही ब्राह्मण और दलित मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। इस इलाके को कभी वामपंथी विचारधारा का भी गढ़ माना जाता रहा है। वजह, सीपीएम के राम कृपाल इस विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। मेजा से पृथक होने से पहले 1996 में इस इलाके से सीपीएम के रामकृपाल ने पहली बार जीत दर्ज की थी।

2002 में दूसरी बार सीपीएम को मिला विधायक
इसके बाद 2002 में वे दूसरी बार कम्युनिस्ट पार्टी से ही इसी क्षेत्र से विधायक चुने गए। लेकिन, अलग कोरांव विधान सभा गठित होने के बाद 2007 में राजबली जैसल ने फिर यहां बसपा का झंडा बुलंद किया। पिछले 2017 के विस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने दो बार विधायक रहे राजबली जैसल को ही टिकट दिया था, लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले में बाजी बीजेपी के राजमणि कोल के हाथ लगी।


राजमणि कोल आदिवासी इंटर कॉलेज में प्रिंसपल भी रहे हैं। इस बार के चुनाव में इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। इसलिए कि भाजपा को अपना नया गढ़ बचाने के लिए जहां पूरा जोर लगाना पड़ रहा है, वहीं सपा अपना खाता खोलने के लिए बेचैन है तो बसपा को हैट्रिक लगाने की फिराक में है।

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इतिहास:
वर्ष 2007 में कोरांव विधानसभा का गठन किया गया। मेजा और करछना विधानसभा के क्षेत्र के हिस्से को काटकर इस विधानसभा का गठन किया गया था। गठन के बाद ही यह विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई। इस विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजबली जैसल विधायक चुने गए। वर्ष 2012 में वह फिर से इस सीट पर चुने गए। वर्ष 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी राजमणि कोल पहली बार चुनाव लड़े और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रामकृपाल कोल को 53696 वोटों से हराकर विधायक चुने गए।

मतदाता
कोरांव विधानसभा में कुल 336203 मतदाता हैं। इसमें 181966 पुरूष और 154216 महिला मतदाता हैं।

मौजूदा विधायक
राजमणि कोल कोरांव के धौखर गांव के निवासी हैं। विधायक के पिता छकौड़ी कोल पेशे से मजदूर थे। अपने गृह ग्राम धौखर में परमसुख आदिवासी इंटर कालेज की स्थापना कर प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत रहे। वर्ष 2011-12 में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित मोर्चा के जिला मंत्री बने और विधायक बनने तक पद पर बने रहे।


विकास की दौड़ में कोरांव पीछे
इस क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। हालांकि सडक़, बिजली, हैंडपंप,  सिंचाई के लिए नहर के साथ छोटे-बड़े पुल-पुलियों का निर्माण कराया गया है। चिकित्सा एवं शिक्षा के क्षेत्र में कोई कार्य नहीं हुआ। इस विधानसभा के पहाड़ी क्षेत्र में पेयजल की समस्या पिछले कई दशक से बनी हुई है जिसको लेकर अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई जा सकी है।


धर्मिक स्थल
बड़ोखर स्थित कालिकन धाम मंदिर, पथरताल स्थित हनुमान मंदिर

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