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UP : इविवि गुप्त काल के इतिहास पर रिसर्च के लिए स्थापित होगी शोधपीठ, कुलपति ने स्वीकार किया प्रस्ताव

Sun, 22 Sep 2024 05:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 22 Sep 2024 05:07 PM IST
सार

प्रो. संजीव कुमार ने गुप्त काल के सिक्कों और उससे जुड़े इतिहास पर शोध किया है। उन्होंने बताया कि सिक्कों पर लिखी हुई तारीखों और अन्य विवरण से न सिर्फ गुप्त काल को बेहतर समझने में मदद मिलेगी, साथ ही इतिहास के इस अत्यंत महत्वपूर्ण काल से संपूर्ण भारतीय इतिहास को एक नए तरीके से समझा जा सकेगा।

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University will set up a research chair for research on the history of the Gupta period
इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में गुप्त काल के इतिहास पर शोध करने के लिए एक शोधपीठ (चेयर) स्थापित होगी। इविवि के प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से 20 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध इतिहासकार व न्यूमिस्मेटिक विशेषज्ञ प्रो. संजीव कुमार ने कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के समक्ष प्रस्ताव रखा था। कुलपति ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

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प्रो. संजीव कुमार ने गुप्त काल के सिक्कों और उससे जुड़े इतिहास पर शोध किया है। उन्होंने बताया कि सिक्कों पर लिखी हुई तारीखों और अन्य विवरण से न सिर्फ गुप्त काल को बेहतर समझने में मदद मिलेगी, साथ ही इतिहास के इस अत्यंत महत्वपूर्ण काल से संपूर्ण भारतीय इतिहास को एक नए तरीके से समझा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सिक्कों से पता चलता है कि प्रयागराज, कौशाम्बी और उसके आसपास का क्षेत्र गुप्त काल की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने विश्वविद्यालय में इससे जुड़े शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस जरूरत के सापेक्ष शोध के लिए शिवली ट्रस्ट की ओर से विवि में एक शोधपीठ (चेयर) स्थापित करने के प्रस्ताव को कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने स्वीकार किया। ट्रस्ट ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए कुछ फेलोशिप भी देने का प्रस्ताव रखा, जिसको कुलपति ने स्वीकृति दी।
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मील का पत्थर साबित होगी शोधपीठ की स्थापना

कुलपति प्रो संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि इविवि गुप्त काल पर शोध करने में शिवली ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करेगा। इन प्रयासों से विश्वविद्यालय को भारतीय इतिहास पर शोध की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। शोधपीठ की स्थापना इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। गुप्त काल के दौरान कन्नौज के साथ ही प्रयागराज, कौशाम्बी का विशेष महत्व था।

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