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शादियाें के मौसम में अघोषित नोटबंदी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:59 AM IST
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शादियों के मौसम में एक बार फिर अघोषित नोटबंदी जैसे हालात बन गए हैं। बैंक शाखाओं में 10 हजार रुपये से अधिक राशि कैश के रूप नहीं दी जा रही है। कई शाखाओं में तो पांच हजार रुपये तक ही दिए जा रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक की नैनी समेत कई शाखाओं में बुधवार को भुगतान के लिए पहुंचे लोगोें को कैश नहीं मिला। कुछ लोगाें ने कैश लिमिट के बाबत लिखित निर्देश जारी करने की मांग की तो उन्हें प्रबंधक के पास जाने की सलाह दी गई। इससे उनमें जबरदस्त नाराजगी है। इसके अलावा कई एटीएम भी खाली हो गए हैं और उन्हें भरने के लिए नगदी नहीं है। हालांकि, बैंक अफसरों का कहना है कि दो-तीन दिनों में पैसा मिलने की उम्मीद है लेकिन परेशानी पेंशनरों के सामने है। खाते में पेंशन आ चुकी है और अगले तीन-चार दिनों तक ऐसे ही हालात रहने के आसार हैं। जल्द नगदी नहीं मिली तो संकट गहरा सकता है।
कैश के संकट से लोग पहली बार नहीं जूझ रहे हैं। पिछले साल आठ नवंबर को हुए नोटबंदी के बाद उपजी समस्या से लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि मई-जून में बैंक शाखाओं से फिर नोट गायब हो गए। लगातार डिमांड के बावजूद आरबीआई की ओर से नगदी उपलब्ध नहीं कराई गई। यह समस्या दो से तीन महीने तक बनी रही और लोग नगदी के लिए भटकते रहे। इसे लेकर दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद बैंकों में कैश पहुंचा लेकिन एक बार फिर वही संकट खड़ा हो गया है। शादी के सीजन में कैश की मांग बढ़ गई है लेकिन बैंक उपलब्ध नहीं करा पा रहे। ज्यादातर शाखाओं में 10 हजार से अधिक राशि नहीं दी जा रही। एसबीआई की नैनी मुख्य शाखा में ग्राहकों से कर्मचारियों की बड़ी देर तक हुज्जत हुई। लोग बैंक कर्मचारियों से कैश न होने की बाबत लगातार सवाल पूछते रहे लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्राहकों ने बताया कि दो दिन पहले बैंक की ओर से 20 हजार रुपये दिए जा रहे थे। अब चेक लेकर लाइन में लगे हैं तो पता चला है कि दस हजार से अधिक कैश नहीं मिलेगा। अधिकतर ने घर में शादी का हवाला दिया मगर उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
एक दूसरी परेशानी भी आ खड़ी हुई है। पेंशनरों के खाते में पेंशन पहुंचने लगी है। बृहस्पतिवार को तकरीबन सभी विभागों के कर्मचारियों का वेतन और पेंशन भी पहुंच जाएगी। जाहिर है, बैंकों में भीड़ बढ़ेगी, मगर कैश का संकट अभी दूर होने के आसार नहीं है। ऐसे में यह समस्या और गहरा सकती है। एसबीआई करेंसी चेस्ट के एक अफसर का कहना है कि कैश कम हो गया है। मांग की गई है। जल्द ही पैसा उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके बाद समस्या दूर हो जाएगी।
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बैंक शाखाओं में लोगों को सिक्के की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। 10 हजार से अधिक राशि की मांग करने पर बैंक की ओर से सिक्के पकड़ाए जा रहे हैं। ऐसे में पहले से ही सिक्कों की मार झेल रहे लोगों की मुसीबत और बढ़ गई है।
कीडगंज के धनीलाल 70 वर्ष की उम्र में नई समस्या से जूझ रहे हैं। उन्हाेंने पर्सनल लोन की पूरी राशि चुकता कर दी। इसके बावजूद उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया। हालांकि नौ साल की लड़ाई के बाद उन्हें जीत तो मिल गई लेकिन विगत दो वर्ष से वह इसकी क्षतिपूर्ति के लिए बैंक तथा अन्य दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। धनीलाल ने अब राष्ट्रीपति से इसकी शिकायत की है।
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कैश के संकट से लोग पहली बार नहीं जूझ रहे हैं। पिछले साल आठ नवंबर को हुए नोटबंदी के बाद उपजी समस्या से लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि मई-जून में बैंक शाखाओं से फिर नोट गायब हो गए। लगातार डिमांड के बावजूद आरबीआई की ओर से नगदी उपलब्ध नहीं कराई गई। यह समस्या दो से तीन महीने तक बनी रही और लोग नगदी के लिए भटकते रहे। इसे लेकर दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद बैंकों में कैश पहुंचा लेकिन एक बार फिर वही संकट खड़ा हो गया है। शादी के सीजन में कैश की मांग बढ़ गई है लेकिन बैंक उपलब्ध नहीं करा पा रहे। ज्यादातर शाखाओं में 10 हजार से अधिक राशि नहीं दी जा रही। एसबीआई की नैनी मुख्य शाखा में ग्राहकों से कर्मचारियों की बड़ी देर तक हुज्जत हुई। लोग बैंक कर्मचारियों से कैश न होने की बाबत लगातार सवाल पूछते रहे लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्राहकों ने बताया कि दो दिन पहले बैंक की ओर से 20 हजार रुपये दिए जा रहे थे। अब चेक लेकर लाइन में लगे हैं तो पता चला है कि दस हजार से अधिक कैश नहीं मिलेगा। अधिकतर ने घर में शादी का हवाला दिया मगर उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
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एक दूसरी परेशानी भी आ खड़ी हुई है। पेंशनरों के खाते में पेंशन पहुंचने लगी है। बृहस्पतिवार को तकरीबन सभी विभागों के कर्मचारियों का वेतन और पेंशन भी पहुंच जाएगी। जाहिर है, बैंकों में भीड़ बढ़ेगी, मगर कैश का संकट अभी दूर होने के आसार नहीं है। ऐसे में यह समस्या और गहरा सकती है। एसबीआई करेंसी चेस्ट के एक अफसर का कहना है कि कैश कम हो गया है। मांग की गई है। जल्द ही पैसा उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके बाद समस्या दूर हो जाएगी।
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बैंक शाखाओं में लोगों को सिक्के की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। 10 हजार से अधिक राशि की मांग करने पर बैंक की ओर से सिक्के पकड़ाए जा रहे हैं। ऐसे में पहले से ही सिक्कों की मार झेल रहे लोगों की मुसीबत और बढ़ गई है।
कीडगंज के धनीलाल 70 वर्ष की उम्र में नई समस्या से जूझ रहे हैं। उन्हाेंने पर्सनल लोन की पूरी राशि चुकता कर दी। इसके बावजूद उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया। हालांकि नौ साल की लड़ाई के बाद उन्हें जीत तो मिल गई लेकिन विगत दो वर्ष से वह इसकी क्षतिपूर्ति के लिए बैंक तथा अन्य दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। धनीलाल ने अब राष्ट्रीपति से इसकी शिकायत की है।