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नेह के बंधन से अटूट हुआ नाता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 30 Aug 2015 01:53 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन शनिवार को उल्लासपूर्वक मनाया गया। बहनों ने मंगल कामना के साथ भाइयों की कलाई पर राखी बांधी तो भाइयों ने भी उनके प्रति रक्षा संकल्प लेते हुए उपहार दिए। बहनों ने भाइयों को टीका लगाने के बाद मिठाई खिलाई, आरती उतारी और फिर उनकी कलाई पर नेह का बंधन बांधकर नेग लिया। इससे पहले परंपरागत रूप से देवों को भी रक्षासूत्र समर्पित किया गया। पुरोहितों ने भी अपने यजमानों को रक्षासूत्र बांधकर दक्षिणा ली।
भद्रा होने के कारण ज्यादातर घरों में निर्धारित मुहूर्त 1.49 बजे के बाद ही राखी बांधी गई, तब तक बहनें ही नहीं भाइयों ने भी व्रत रखा। राखी बंधवाने के बाद ही मीठी चीज खाकर व्रत पूरा हुआ। अपनी-अपनी मान्यता और परंपरानुसार सुबह और दोपहर में भी राखी बांधी गई। भाइयों को राखी बांधने के लिए विवाहित बहनें भाइयों के घर पहुंची। वहीं कई भाइयों ने बहनों के घर जाकर राखी बंधवाई। घरों में खीर सहित तरह-तरह के पकवान बनाए गए। रक्षा पर्व पर एक दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला देर रात तक बना रहा। वहीं फेसबुक, व्हाटसअप जैसे सोशल मीडिया पर भी दिनभर रक्षाबंधन की बधाइयों का क्रम जारी रहा।
पर्व पर बाजारों में खूब उत्साह दिखा। राखियों और मिठाइयों की अधिकतर दुकानें शुक्रवार रात से ही खुलीं रहीं। शनिवार सुबह से लोगों का तांता लगा तो यह सिलसिला देररात तक जारी रहा। दुकानों को बाहर तक आकर्षक रूप से सजाया गया था। बारिश के बावजूद लोगों ने जमकर खरीदारी की और पर्व की खुशियां मनाई। सूतफेनी, घेवर और सूखे मेवों की खरीद भी खूब रही।
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रक्षापर्व खास रहा तो भाइयों ने बहनों को खास तरह के उपहार भी दिए। इसके तहत भाइयों की ओर से मोबाइल सेट, छोटी-बड़ी गाड़िया,ं म्युजिक सिस्टम, कपड़े, ज्वेलरी जैसे उपहार दिए। कई कंपनियों की ओर से खास राखी के लिए कई तरह के ऑफर भी दिए गए थे, जिसका पर्व पर लोगों ने खूब लाभ उठाया और बहनों को उनकी पसंद के सौगात दिए।
रक्षाबंधन का पर्व जाति-धर्म की सीमाओं से परे रहा। तमाम मुस्लिम बहनों ने अपने हिंदू भाइयों जबकि तमाम हिन्दू बहनों ने अपने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। चायल के मोहम्मद नसर कर्नलगंज में बहन विनीता से राखी बंधवाने परिवार सहित उनके घर पहुंचे। राखी बंधवाई और शगुन के तौर पर उपहार भी दिया।
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भद्रा होने के कारण ज्यादातर घरों में निर्धारित मुहूर्त 1.49 बजे के बाद ही राखी बांधी गई, तब तक बहनें ही नहीं भाइयों ने भी व्रत रखा। राखी बंधवाने के बाद ही मीठी चीज खाकर व्रत पूरा हुआ। अपनी-अपनी मान्यता और परंपरानुसार सुबह और दोपहर में भी राखी बांधी गई। भाइयों को राखी बांधने के लिए विवाहित बहनें भाइयों के घर पहुंची। वहीं कई भाइयों ने बहनों के घर जाकर राखी बंधवाई। घरों में खीर सहित तरह-तरह के पकवान बनाए गए। रक्षा पर्व पर एक दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला देर रात तक बना रहा। वहीं फेसबुक, व्हाटसअप जैसे सोशल मीडिया पर भी दिनभर रक्षाबंधन की बधाइयों का क्रम जारी रहा।
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पर्व पर बाजारों में खूब उत्साह दिखा। राखियों और मिठाइयों की अधिकतर दुकानें शुक्रवार रात से ही खुलीं रहीं। शनिवार सुबह से लोगों का तांता लगा तो यह सिलसिला देररात तक जारी रहा। दुकानों को बाहर तक आकर्षक रूप से सजाया गया था। बारिश के बावजूद लोगों ने जमकर खरीदारी की और पर्व की खुशियां मनाई। सूतफेनी, घेवर और सूखे मेवों की खरीद भी खूब रही।
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रक्षापर्व खास रहा तो भाइयों ने बहनों को खास तरह के उपहार भी दिए। इसके तहत भाइयों की ओर से मोबाइल सेट, छोटी-बड़ी गाड़िया,ं म्युजिक सिस्टम, कपड़े, ज्वेलरी जैसे उपहार दिए। कई कंपनियों की ओर से खास राखी के लिए कई तरह के ऑफर भी दिए गए थे, जिसका पर्व पर लोगों ने खूब लाभ उठाया और बहनों को उनकी पसंद के सौगात दिए।
रक्षाबंधन का पर्व जाति-धर्म की सीमाओं से परे रहा। तमाम मुस्लिम बहनों ने अपने हिंदू भाइयों जबकि तमाम हिन्दू बहनों ने अपने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। चायल के मोहम्मद नसर कर्नलगंज में बहन विनीता से राखी बंधवाने परिवार सहित उनके घर पहुंचे। राखी बंधवाई और शगुन के तौर पर उपहार भी दिया।