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Prayagraj News: निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों में अफसरों का अनधिकृत हस्तक्षेप विनाशकारी

Fri, 19 Jan 2024 04:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Fri, 19 Jan 2024 04:29 AM IST
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Unauthorized interference by officers in the rights of elected representatives is disastrous
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के सांविधानिक अधिकारों में अफसरों का अनधिकृत हस्तक्षेप स्थानीय स्वशासन की परिकल्पना के लिए विनाशकारी है। गाजियाबाद की लोनी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष रंजीता धामा के आदेश को अधिशाषी अधिकारी (ईओ) द्वारा रद्द करने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने ईओ के आदेश पर रोक लगाते हुए स्थानीय निकाय के निदेशक से जवाब मांगा है।
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न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ के समक्ष नगर पंचायत परिषद लोनी में तैनात नायब मोहर्रिर तपसी सिंह के निलंबन का मामला पहुंचा है। याची चेयरमैन रंजीता धामा ने नायब मोहर्रिर तापसी सिंह को अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में दो अगस्त को निलंबित करने का आदेश दिया था। इस आदेश को अधिशाषी अधिकारी केके मिश्रा ने यह कहते हुए रद्द कर दिया कि अध्यक्ष को कर्मचारी के खिलाफ आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है।
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अध्यक्ष ने ईओ के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनके अधिवक्ता सैयद मोहमद नवाज ने दलील दी कि अध्यक्ष नगर पालिका के तृतीय श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति प्राधिकारी हैं। उन्हें नायब मोहर्रिर को निलंबित करने का विधिक अधिकार है। ईओ भी अध्यक्ष के अधीनस्थ अधिकारी हैं। उन्होंने राजनीतिक दबाव में आकर निलंबन आदेश यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अध्यक्ष का आदेश क्षेत्राधिकार के बाहर है। ईओ का कदम नगर पालिका अधिनियम के विरुद्ध है।
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कोर्ट ने कहा, अधीनस्थ अधिकारी होते हुए भी ईओ का निर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष के फैसले को रद्द किया जाना गंभीर विषय है। निर्वाचित प्रतिनिधि के संविधानिक अधिकारों में अफसरों का अनधिकृत हस्तक्षेप स्थानीय स्वशासन की नीति के लिए विनाशकारी हो साबित होगी। नाराज कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख नियत करते हुए स्थानीय निकाय के निदेशक से जवाब तलब किया है।


यह है पूरा मामला
नगर पालिका परिषद लोनी की अध्यक्ष रंजीता धामा ने दो अक्तूबर को नायब मोहर्रिर तापसी सिंह को निलंबित करते हुए जांच का आदेश दिया था। आरोप था कि तापसी सिंह ने कूड़ाघर के लिए निर्धारित 2140 हेक्टेयर खाली भूमि के संदर्भ में भ्रामक आख्या अपने हस्ताक्षर से एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास को यह कहते हुए प्रेषित कर दी कि तत्कालीन ईओ अवकाश पर हैं। असल में ईओ छुट्टी पर नहीं थे। तापसी सिंह को स्थानीय भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर का करीबी माना जाता है, जबकि अध्यक्ष रंजीता धामा राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीती हैं। निलंबन के बाद तापसी सिंह ने अध्यक्ष रंजीता धामा और उनके पति मनोज धामा के खिलाफ मारपीट और धमकी देने की एफआईआर भी दर्ज कराई थी। यही नहीं, इस दौरान तापसी सिंह के मामले में नियुक्त जांच अधिकारी का तबादला भी हो गया।
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