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उखड़े शिविर, माघ मेला के तीन सेक्टर खाली
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Ukhare camp, three sectors of Magh Mela vacant
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। माघ मेले का समापन भले ही महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान से होगा, लेकिन इससे पहले साधु-संतों-कल्पवासियों के विदा होने से शिविरों में सूनापन आ गया है। बुधवार को सैकड़ों शिविरों के डेरा-तंबुओं को समेट लिया गया। इससे मेला क्षेत्र का बड़ा हिस्सा खाली हो गया।
तीन दिन पहले माघी पूर्णिमा तक कल्पवासियों से गुलजार रहे मेला के सेक्टर तीन, चार, पांच और छह में सन्नाटा छाने लगा है।
बुधवार को संगम नोज पर डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ तो रही, लेकिन इन मेला सेक्टरों में दिन भर तंबुओं को समेटने में जुटे मजदूर ही पसीना बहाते नजर आए। सामानों की गिनती और मिलान कराया जाता रहा। ट्रक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों से छोलदारी व अन्य सामान स्टोर में भिजवाए जाते रहे।
लगातार सामानों की ढुलाई और शिविरों को खोले जाने से पांटून पुलों पर जाम की नौबत बनी रही। उखड़ते शिविरों की तस्वीरें लोग अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर माघ मेले की यादों को संजोते नजर आए। हालांकि अभी मेला प्रशासन, मेला एसपी के अलावा गंगा, यमुना, सरस्वती अस्पतालों, पीडब्ल्यूडी अधिकारी, जल निगम, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अलावा अन्य सरकारी शिविरों में कर्मचारी-अधिकारी अभी ड्यूटी बजा रहे हैं। महावीर पांटून पुल के पार सेक्टर तीन में स्थित खाक चौक में कुछ संतों के शिविर अभी शिवरात्रि स्नान तक लगे रहेंगे। इसके चलते मेले के सेक्टर एक, दो व तीन में थोड़ी चहल-पहल बनी रहेगी।
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बुधवार को परेड मैदान में लगे झूले और मीना बाजार के अलावा खादी प्रदर्शनी के शिविर लोगों को लुभाते रहे। माघी पूर्णिमा और त्रिजटा स्नान से भले ही संतों-कल्पवासियों की रवानगी हो गई हो, लेकिन आमतौर पर माघ मेले का समापन महाशिवरात्रि तो अंतिम स्नान पर्व से माना जाता है। इस बार शिवरात्रि 21 फरवरी को पड़ रही है। कुछ साधु-संत, त्यागी, बैरागी और संन्यासी महाशिवरात्रि पर भी संगम में डुबकी लगाएंगे।
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तीन दिन पहले माघी पूर्णिमा तक कल्पवासियों से गुलजार रहे मेला के सेक्टर तीन, चार, पांच और छह में सन्नाटा छाने लगा है।
बुधवार को संगम नोज पर डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ तो रही, लेकिन इन मेला सेक्टरों में दिन भर तंबुओं को समेटने में जुटे मजदूर ही पसीना बहाते नजर आए। सामानों की गिनती और मिलान कराया जाता रहा। ट्रक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों से छोलदारी व अन्य सामान स्टोर में भिजवाए जाते रहे।
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लगातार सामानों की ढुलाई और शिविरों को खोले जाने से पांटून पुलों पर जाम की नौबत बनी रही। उखड़ते शिविरों की तस्वीरें लोग अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर माघ मेले की यादों को संजोते नजर आए। हालांकि अभी मेला प्रशासन, मेला एसपी के अलावा गंगा, यमुना, सरस्वती अस्पतालों, पीडब्ल्यूडी अधिकारी, जल निगम, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अलावा अन्य सरकारी शिविरों में कर्मचारी-अधिकारी अभी ड्यूटी बजा रहे हैं। महावीर पांटून पुल के पार सेक्टर तीन में स्थित खाक चौक में कुछ संतों के शिविर अभी शिवरात्रि स्नान तक लगे रहेंगे। इसके चलते मेले के सेक्टर एक, दो व तीन में थोड़ी चहल-पहल बनी रहेगी।
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बुधवार को परेड मैदान में लगे झूले और मीना बाजार के अलावा खादी प्रदर्शनी के शिविर लोगों को लुभाते रहे। माघी पूर्णिमा और त्रिजटा स्नान से भले ही संतों-कल्पवासियों की रवानगी हो गई हो, लेकिन आमतौर पर माघ मेले का समापन महाशिवरात्रि तो अंतिम स्नान पर्व से माना जाता है। इस बार शिवरात्रि 21 फरवरी को पड़ रही है। कुछ साधु-संत, त्यागी, बैरागी और संन्यासी महाशिवरात्रि पर भी संगम में डुबकी लगाएंगे।

Ukhare camp, three sectors of Magh Mela vacant- फोटो : CITY DESK

Ukhare camp, three sectors of Magh Mela vacant- फोटो : CITY DESK

Ukhare camp, three sectors of Magh Mela vacant- फोटो : CITY DESK