92 बरस बाद थमा तूफान : इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस
देश आजाद होने के पहले तूफान एक्सप्रेस ब्रिटिश हुकूमत के समय पहली बार एक जून 1930 को चलाई गई थी। तब यह ट्रेन देश की सबसे लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनों में शामिल थी। हावड़ा से चलने के बाद ट्रेन 45.25 घंटे में श्रीगंगानगर की दूरी तय करती थी।
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यात्री गण कृपया ध्यान दें, गाड़ी संख्या 13007 तूफान एक्सप्रेस कुछ ही देर में प्लेटफॉर्म संख्या फलां पर आने वाली है। प्रयागराज समेत तमाम रेलवे स्टेशनों पर नौ दशकों से गूंज रही यह आवाज अब नहीं सुनने को मिलेगी। रेलवे ने प्रयागराज के रास्ते हावड़ा से राजस्थान के श्रीगंगानगर को जाने वाली उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। रेलवे की बीते माह लागू हुई नई समय सारिणी में इस ट्रेन को स्थान नहीं दिया गया है।
देश आजाद होने के पहले तूफान एक्सप्रेस ब्रिटिश हुकूमत के समय पहली बार एक जून 1930 को चलाई गई थी। तब यह ट्रेन देश की सबसे लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनों में शामिल थी। हावड़ा से चलने के बाद ट्रेन 45.25 घंटे में श्रीगंगानगर की दूरी तय करती थी। लंबी दूरी की ट्रेन होने के बाद भी इसमें सवार होने वाले अधिकतर यात्री स्थानीय ही होते थे। फिलहाल अब तूफान एक्सप्रेस की कहानी इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह गई है।
आठ राज्यों से होकर गुजरती थी तूफान
एक समय तूफान सुपरफास्ट श्रेणी की ट्रेन में शामिल थी। यह आठ राज्यों पश्चिमी बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब होकर राजस्थान के श्रीगंगानगर पहुंचती थी। कोरोना की पहली लहर के दौरान लगे लॉकडाउन से ही तूफान निरस्त चल रही है। तब से अब तक इसे चलाए जाने की घोषणा नहीं की गई। इस बार एक अक्तूबर 22 से लागू हुई रेलवे की समय सारिणी में भी तूफान एक्सप्रेस को जगह नहीं मिली। इसी से स्पष्ट हो गया था कि अब तूफान एक्सप्रेस नहीं चलेगी।
110 रेलवे स्टेशनों पर था ट्रेन का ठहराव
तूफान एक्सप्रेस का पहले तो कम स्टेशनों पर ही ठहराव था, लेकिन समय के साथ इसका ठहराव बढ़कर 110 स्टेशनों पर हो गया। प्रमुख स्टेशनों की बात करें तो ट्रेन हावड़ा जंक्शन, वर्धमान जंक्शन, आसनसोल जंक्शन, मोकामा जंक्शन, बरह, पटना जंक्शन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा कैंट, मथुरा जंक्शन, नई दिल्ली , रोहतक जंक्शन, भटिंडा जंक्शन आदि होते हुए श्री गंगानगर तक पहुंचती थी।
तूफान एक्सप्रेस से जुड़ीं खास बातें
0 प्रयागराज से श्रीगंगानगर के लिए ट्रेन सुबह 5.10 बजे मिलती थी । वापसी में रात 10.10 बजे होता था ट्रेन का आगमन।
0 ट्रेन बंद होने के दौरान उसकी अधिकतम रफ्तार 110 और औसत रफ्तार 44 किमी प्रतिघंटा थी ।
0 हावड़ा से आने में यह ट्रेन 1978 किमी की दूरी 45.25 घंटे में तय करती थी। इसके थे कुल 110 ठहराव।
0 श्रीगंगानगर से यह 107 स्टेशनों पर रुकते हुए इतनी दूरी 46.20 घंटे में पूरी करती थी।
0 कौशाम्बी के सिराथू और भरवारी में भी ट्रेन के स्टॉपेज थे।
0 सुबह के समय प्रयागराज से कानपुर जाने के लिए काफी संख्या में दैनिक यात्री इसका उपयोग करते थे।
बचपन से ही कई बार इस ट्रेन से सफर किया। अब श्रीगंगानगर के लिए एक भी ट्रेन नहीं है। यहां से श्रीगंगानगर के लिए सीधी ट्रेन चलाई जाए ताकि यात्रियों को परेशानी न हो। -पवन श्रीवास्तव, सदस्य, मंडलीय उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति
श्रीगंगानगर के लिए अब कोई विकल्प नहीं है। सुबह के समय आगरा जाने के लिए यह उपयोगी ट्रेन थी। अब इस रूट पर उसी समय एक दूसरी ट्रेन चलाए जाने की जरूरत है। - आरपी सिंह, महामंत्री, नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाइज संघ
तूफान एक्सप्रेस बीते माह लागू हुई समय सारिणी में शामिल नहीं है। ऐसे में कहा जा सकता है कि अब इसका संचालन नहीं होगा। - अमिताभ शर्मा, कार्यकारी निदेशक सूचना प्रसार, रेलवे बोर्ड