फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Scheduled Castes in Kumbh Mela 2019 prayagraj

कुंभ 2019: अनुसूचित जाति से बनीं दो साध्वियां व तीन साधु, परंपराओं के पालन का लिया संकल्प

Sat, 19 Jan 2019 10:32 AM IST
shubham अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज
अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: shubham Updated Sat, 19 Jan 2019 10:32 AM IST
विज्ञापन
Scheduled Castes in Kumbh Mela 2019 prayagraj
kumbh

 कुंभ पर्व के प्रथम शाही स्नान से पहले पंचदशनाम जूना अखाड़े के तहत अनुसूचित जाति के पहले महामंडलेश्वर बने कन्हैया प्रभुनंद गिरि ने अपने कुनबे का विस्तार किया है। अपनी ही तरह अनुसूचित जाति के लोगों को सनातन धर्म की दिशा और परंपरा से जोड़ते हुए उन्होंने अपने पांच शिष्यों को दीक्षा देकर साधु और साध्वी बनाया है।

विज्ञापन


महामंडलेश्वर कन्हैया प्रभुनंद गिरि से दीक्षा लेकर साध्वी बनने वालों में चंडीगढ़ की जाह्वनी उर्फ  भैरवीनंद गिरि और आजमगढ़ की मैना देवी कश्यप उर्फ  मैनानंद गिरि शामिल हैं। इसी तरह आजमगढ़ से लालचंद्र उर्फ  रुद्रानंद गिरि, प्रयागराज से प्रेमचंद्र उर्फ  प्रेमानंद गिरि और जौनपुर से रामसमुझ उर्फ  रामानंद गिरि साधु बने हैं।
विज्ञापन


सभी पांचों को गंगाजल लेकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सनातन धर्म से जुड़ने, इसका प्रचार-प्रसार करने और आजीवन इसकी रीति, नीति, परंपराओं का पालन करने का संकल्प दिलाया गया। साथ ही सभी ने धर्म सेवा, संत सेवा, समाज सेवा का व्रत भी लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें, महामंडलेश्वर कन्हैया प्रभुनंद गिरि को कामाख्या पीठाधीश्वर और जूना अखाड़े के जगद्गुरु पंचानंद गिरि ने आरंभिक दीक्षा दी थी। इसी क्रम में अनुसूचित जाति से ही कानपुर के प्रज्ञानंद गिरि और पंचकूला के अशोकानंद गिरि का भी जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक किया था। जूना पहले ही कह चुका है कि सृष्टि में केवल ढाई जातियां ही हैं, नर, नारी और किन्नर। इसके अतिरिक्त कोई अन्य जाति नहीं। ऐसे में जाति बंधन बेमानी है।

जीवन से निराश थी, गुरु से मिली नई राह: भैरवी नंद गिरि
साध्वी बनीं भैरवी नंद गिरि को अपने मूल माता-पिता का पता नहीं। आंखें खुली तो दूसरे माता-पिता पाया, लेकिन उन्होंने कभी मन से अपनाया नहीं। न शिक्षा-दीक्षा पर ध्यान दिया और न ही स्वास्थ्य पर। ब्रेन ट्यूमर ने अलग घेर रखा था। ऐसे में एक दिन आत्महत्या करने जा रही कि पास से गुजरते गुरु ने रोककर कारण पूछा और फिर आश्रम ले आए। आगे बारहवीं तक की पढ़ाई कराई। साथ ही ब्रेन ट्यूमर का इलाज भी। भैरवी बोलीं, अब आश्रम से जुड़कर अच्छा लग रहा है। समाज सेवा के अवसर मिले हैं। सनातन धर्म में सम्मान मिलना मेरे लिए और भी बहुत सुखद है।

असफलता से परेशान हो पकड़ी साधना की राह: मैना नंदगिरि
साध्वी मैना नंदगिरि बनीं आजमगढ़ की मैना देवी कश्यप का परिवार भी खेती-बारी से जुड़ा है। मैना ने एमए तक की शिक्षा हासिल करने के बाद बीएड भी किया। लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन करती और परीक्षाएं देती रहीं पर क हीं भी सफलता हाथ नहीं लगी। गहरी निराशा और आगे की राह न सूझने के  दौरान एक दिन आजमगढ़ के लालगंज आश्रम पर ही गुरु कन्हैया प्रभु नंद से भेंट हुई और वहीं सनानत धर्म से जुड़ने का संकल्प ले लिया। कहती हैं, सनातन धर्म से जुड़कर समाज एवं शिक्षा के लिए काम करना सुखद है, लगता है जीवन सार्थक हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed