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Prayagraj : दो सिर वाले नवजात शिशु का ऑपरेशन कर दिया नया जीवन दान, चिकित्सकों ने कहा- यह एन्सेफेलोसील बीमारी

Fri, 13 Dec 2024 06:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Dec 2024 06:34 PM IST
सार

फतेहपुर खागा निवासी पवन कुमार केवट की पत्नी का नौ नवंबर 2024 को एक सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ था। तीन बेटियों के बाद बेटा पैदा होने पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन जब परिजनों ने देखा, कि बच्चे के सिर के पीछे एक और सिर दिख रहा है, तो उनके होश उड़ गए।

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two-headed newborn baby was operated upon and given new life, doctors said - it is encephalocele disease
दो सिर वाले बच्चे का आपरेशन करते चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मुंडेरा स्थित एक निजी अस्पताल में दो सिर वाले नवजात शिशु का सफल ऑपरेशन करके चिकित्सकों ने उसे नया जीवनदान दिया है। करीब साढ़े चार घंटे चले ऑपरेशन में चिकित्सकों ने 21 दिन पहले पैदा हुए नवजात शिशु के एक सिर को अलग करके उसको मौत के मुंह से वापस ले आए। वहीं दो दिसंबर को हुए ऑपरेशन के बाद शिशु को 10 दिनों तक आईसीयू में रखा गया। जिसके बाद शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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फिलहाल शिशु अब पूरी तरह से ठीक है। चिकित्सकों का कहना है कि यह एन्सेफेलोसील बीमारी है, जो कि 10 लाख में से किसी एक बच्चे को होती है। इस बीमारी का इलाज समय रहते न किया जाए, तो बच्चे का बचना मुश्किल हो जाता है। दरअसल फतेहपुर खागा निवासी पवन कुमार केवट की पत्नी का नौ नवंबर 2024 को एक सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ था। तीन बेटियों के बाद बेटा पैदा होने पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन जब परिजनों ने देखा, कि बच्चे के सिर के पीछे एक और सिर दिख रहा है, तो उनके होश उड़ गए। वहीं प्रसव के एक घंटे बाद ही सरकार अस्पताल से बच्चे का इलाज करने से मना कर दिया।

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जिसके बाद परिजन बच्चे को लेकर फतेहपुर शहर के एक निजी अस्पताल गए, जहां चार दिन रखने के बाद बच्चे का इलाज करने से मना कर दिया गया। वहीं परिजन बच्चे को लेकर कानपुर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पूरी रात रखने के बाद चिकित्सकों ने जवाब दे दिया। ऐसे में लाचार व मजबूर परिजन 1 दिसंबर को प्रयागराज के मुंडेरा स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे को लेकर पहुंचे। जहां 2 दिसंबर को लैप्रोस्कोपिक सर्जन व अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके सिंह, न्यूरो सर्जन डॉ. नितेश सिंह ने बच्चे का सफल ऑपरेशन किया। जिसके बाद बच्चे को आईसीयू वार्ड में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्कर की निगरानी में रखा गया।

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क्या है एन्सेफेलोसील बीमारी

एन्सेफेलोसील एक जन्म दोष है, जो बच्चे की खोपड़ी के छिद्र के माध्यम से मस्तिष्क के ऊतकों को बढ़ने का कारण बनता है। यह स्थिति एक न्यूरल ट्यूब दोष है। न्यूरल ट्यूब मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का प्रारंभिक रूप है। जब भ्रूण गर्भाशय में विकसित हो रहा होता है। यदि गर्भावस्था के पहले कुछ हफ्तों के दौरान न्यूरल ट्यूब के शीर्ष को बंद करने में कोई समस्या है, तो एन्सेफेलोसील हो सकता है। यह स्थिति हल्की से लेकर जानलेवा तक हो सकती है।

मैंने अपने मेडिकल कैरियर में इस प्रकार का दूसरा ऑपरेशन किया है। मात्र 21 दिन के बच्चे का ऑपरेशन होने कारण काफी जटिल हो गया था। फिलहाल बच्चे को पांच वर्ष तक फॉलोअप में रखा जाएगा। जिसमें यह देखा जाएगा, कि उसके दिमाग पर तो काई असर नहीं पड़ा है। ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य है। - डॉ. राजीव सिंह, लैप्रोस्कोपिक सर्जन व निदेशक, नारायण स्वरूप अस्पताल

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