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मेजा में बनेगी कछुआ सेंचुरी, सर्वे के बाद फतेहपुर में डाल्फिन सेंचुरी बनाने का हुआ निर्णय

Sun, 26 Jul 2020 12:54 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 26 Jul 2020 12:54 AM IST
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Turtle century will be made in Meja, after survey, it was decided to make Dolphin Century in Fatehpur
dolphin
प्रयागराज के लोगों को डाल्फिन के साथ खेलने के लिए अब फतेहपुर जाना होगा। यहां संगम के पास डाल्फिन सेंचुरी बनाए जाने का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन सर्वे के बाद वह फतेहपुर शिफ्ट हो गया है। हालांकि, उसकी जगह प्रयागराज के लोगों को तरह-तरह के कछुए देखने का मौका मिलेगा। मेजा में कछुआ सेंचुरी का रास्ता साफ हो गया है। वाराणसी में रामनगर स्थित सेंचुरी को यहां शिफ्ट करने के लिए नोटिफिकेशन भी हो चुका है।
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संगम के आसपास में बड़ी संख्या में डाल्फिन के पाए जाने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक सर्वे में इसके काफी उत्साहजनक परिणाम सामने आए थे। यहां पर गंगा का जल भी डाल्फिन के अनुरूप बताया गया था। इसे देखते हुए संगम के आसपास बड़े क्षेत्र में डाल्फिन सेंचुरी बनाने का निर्णय लिया गया था। इसका खाका तैयार करने से पहले एक बार फिर सर्वे कराया गया। सर्वे में पाया गया कि फतेहपुर की सीमा में गंगा नदी में डाल्फिन की संख्या अधिक है। इसके अलावा वहां जलीय पर्यावरण भी उनके अनुकूल है।
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प्रभागीय वन संरक्षक वाईके शुक्ला ने बताया कि कई अन्य वजहों से फतेहपुर में डाल्फिन सेंचुरी बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार ने बताया कि  इसके लिए आदेश हो चुका है। आगे की प्रक्रिया भी शुरू है।
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इसके विपरीत यहां कछुआ सेंचुरी बनाए जाने की कवायद सफल रही है। वाराणसी के रामनगर स्थिति सेंचुरी को यहां शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए आदेश जारी हो चुका है। प्रभागीय वन अधिकारी ने बताया कि सेंचुरी निर्माण की अन्य प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी। हालांकि, कछुओं की अलग-अलग प्रजाति के बच्चे सारनाथ में ही तैयार किए जाएंगे।

30 किमी तक होगी सेंचुरी, तीन जिलों को जोड़ेगी

कछुआ सेंचुरी के लिए गंगा नदी में मेजा के नेवादा गांव से मिर्जापुर की तरफ 30 किमी तक का क्षेत्र संरक्षित किया जाएगा। इसकी सीमा नदी के दोनों छोर तक होगी। इस तरह से इसमें प्रयागराज के अलावा मिर्जापुर और भदोही का क्षेत्र भी शामिल होगा। सेंचुरी क्षेत्र में किसी का कोई अधिकार बनता है तो उसका निस्तारण डीएम के माध्यम से किया जाएगा। 

पर्यटन क्षेत्र के रूप में होगा विकसित

कछुआ सेंचुरी तथा आसपास का इलाका पर्यटन के रूप में विकसित होगा। इसके लिए नदी के दोनों किनारों पर तो विकास होगा ही मेजा में नेवादा के आसपास पर्यटक जोन भी बनाया जाएगा। इसमें पार्क होगा, जिसे जंगल का रूप दिया जाएगा। इसके अलावा पर्यटकों के लिए वहीं से वोटिंग की सुविधा होगी। वहां से पर्यटक सेंचुरी क्षेत्र में जा सकेंगे और अलग-अलग प्रजाति के कछुओं के अलावा मगरमच्छ, घडिय़ाल, मछलियां आदि देख सकेंगे। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से जगह-जगह वन रक्षक चौकियां भी बनाई जाएंगी।
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