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त्रिवेणी शाखा की अव्यवस्थाओं से ग्राहक परेशान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 08 Oct 2015 01:33 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। भारतीय स्टेट बैंक की त्रिवेणी शाखा (मुख्य शाखा) में बैंक प्रबंधन की लापरवाही और अव्यवस्था ग्राहकों पर भारी पड़ रही है। बैंक के अंदर ग्राहकों को लाइन में खड़े होने की जगह नहीं होने से दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहता है। बैंक में आने वाले रिटायर्ड कर्मचारी-अधिकारी एवं बुजुर्ग ग्राहकों को खड़े होने को बैठने की जगह कौन कहे खड़े होने में परेशानी होती है।
बुजुर्ग ग्राहकों के साथ विकलांग लोगों को बैंक के अंदर आने-जाने के लिए रैंप नहीं होने से सीढ़ी चढ़नी पड़ती है, ऐसे में वह गिरकर घायल होते रहते हैं। इस बारे में बैंक के अधिकारी सोचते तक नहीं। बैंक में ग्राहकों की अनियंत्रित भीड़ एवं बढ़ते दबाव के कारण ही गत दिनों एक बुजुर्ग ग्राहक की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।
स्टेट बैंक मुख्य शाखा की अव्यवस्था पर अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार को पढ़ने के बाद कई ग्राहकों ने अमर उजाला को फोन कर बैंक से जुड़ी अपनी समस्या साझा की। ग्राहकों के आग्रह पर अमर उजाला ने बैंक में ग्राहकों से बातचीत कर उनकी समस्या को सामने लाने की कोशिश की। इस दौरान अन्नपूर्णा मिश्रा नामक महिला वाकर के सहारे सीढ़ी उतर रही थी। उनसे जब बैंक की कार्य शैली के बारे में बातें साझा की गई तो उनका दर्द सामने आ गया।
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बैंक में उनके जैसे बुजुर्ग ग्राहकों को घुटने की परेशानी के कारण सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत होती है। इसके लिए बैंक को उनके लिए रैंप की व्यवस्था करनी चाहिए। बैंक के अंदर उन जैसे ग्राहकों को वाकर के सहारे जाना पड़ता है। वाकर के सहारे ही लाइन में खड़े रहना पड़ता है। बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होती, जो सीट हैं पहले से भरी होने से कई बार तो जमीन पर बैठने की नौबत आ जाती है।
बैंक में पासबुक एंट्री करवाने के लिए दो-दो घंटे लाइन में लगना पड़ता है। ग्राहकों को बैठने के लिए व्यवस्था ठीक नहीं है। पुराने खाता धारकों की संख्या अधिक होने के कारण बैंक के अंदर की जगह लोगों को खड़े होने के लिए कम पड़ती है। पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। बैंक ड्राफ्ट बनवाने के लिए खाता धारक होने के बाद भी परेशान किया जाता है। कोई अधिकारी ग्राहकों की सुनने नहीं आता।
- प्रदीप श्रीवास्तव, सिविल लाइंस
- बैंक की पुरानी ग्राहक होने के बाद भी आए दिन धक्के खाने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है। बैंक में पुराने और बुजुर्ग नागरिकों के लिए अलग से कोई सुविधा नहीं दी जाती है। अंदर की भीड़भाड़ से परेशान होकर मैं बाहर चली आई हूं, लगता है बिना पैसा मिले वापस जाना पड़ेगा। बैंक में पास बुक में पैसा पढ़ाने के लिए दो बार आ चुके हैं। काउंटर पर कोई मिलता ही नहीं।
- अनारा देवी, फाफामऊ
- छोटे से बच्चे के साथ बैंक में एटीएम से पैसा निकालने तथा पासबुक में एंट्री करवाने आए हैं। यहां एक एटीएम में पैसा नहीं है, जिसमें है उसमें लंबी लाइन लगी है। पास बुक में एंट्री करवाने के लिए दो-दो घंटे लाइन में लगने के बाद लौटा दिया जाता है। कोई अधिकारी ग्राहकों से फीड बैक लेेने नहीं आता है।
- अमित सिंह, सिविल लाइंस
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बुजुर्ग ग्राहकों के साथ विकलांग लोगों को बैंक के अंदर आने-जाने के लिए रैंप नहीं होने से सीढ़ी चढ़नी पड़ती है, ऐसे में वह गिरकर घायल होते रहते हैं। इस बारे में बैंक के अधिकारी सोचते तक नहीं। बैंक में ग्राहकों की अनियंत्रित भीड़ एवं बढ़ते दबाव के कारण ही गत दिनों एक बुजुर्ग ग्राहक की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।
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स्टेट बैंक मुख्य शाखा की अव्यवस्था पर अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार को पढ़ने के बाद कई ग्राहकों ने अमर उजाला को फोन कर बैंक से जुड़ी अपनी समस्या साझा की। ग्राहकों के आग्रह पर अमर उजाला ने बैंक में ग्राहकों से बातचीत कर उनकी समस्या को सामने लाने की कोशिश की। इस दौरान अन्नपूर्णा मिश्रा नामक महिला वाकर के सहारे सीढ़ी उतर रही थी। उनसे जब बैंक की कार्य शैली के बारे में बातें साझा की गई तो उनका दर्द सामने आ गया।
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बैंक में उनके जैसे बुजुर्ग ग्राहकों को घुटने की परेशानी के कारण सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत होती है। इसके लिए बैंक को उनके लिए रैंप की व्यवस्था करनी चाहिए। बैंक के अंदर उन जैसे ग्राहकों को वाकर के सहारे जाना पड़ता है। वाकर के सहारे ही लाइन में खड़े रहना पड़ता है। बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होती, जो सीट हैं पहले से भरी होने से कई बार तो जमीन पर बैठने की नौबत आ जाती है।
बैंक में पासबुक एंट्री करवाने के लिए दो-दो घंटे लाइन में लगना पड़ता है। ग्राहकों को बैठने के लिए व्यवस्था ठीक नहीं है। पुराने खाता धारकों की संख्या अधिक होने के कारण बैंक के अंदर की जगह लोगों को खड़े होने के लिए कम पड़ती है। पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। बैंक ड्राफ्ट बनवाने के लिए खाता धारक होने के बाद भी परेशान किया जाता है। कोई अधिकारी ग्राहकों की सुनने नहीं आता।
- प्रदीप श्रीवास्तव, सिविल लाइंस
- बैंक की पुरानी ग्राहक होने के बाद भी आए दिन धक्के खाने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है। बैंक में पुराने और बुजुर्ग नागरिकों के लिए अलग से कोई सुविधा नहीं दी जाती है। अंदर की भीड़भाड़ से परेशान होकर मैं बाहर चली आई हूं, लगता है बिना पैसा मिले वापस जाना पड़ेगा। बैंक में पास बुक में पैसा पढ़ाने के लिए दो बार आ चुके हैं। काउंटर पर कोई मिलता ही नहीं।
- अनारा देवी, फाफामऊ
- छोटे से बच्चे के साथ बैंक में एटीएम से पैसा निकालने तथा पासबुक में एंट्री करवाने आए हैं। यहां एक एटीएम में पैसा नहीं है, जिसमें है उसमें लंबी लाइन लगी है। पास बुक में एंट्री करवाने के लिए दो-दो घंटे लाइन में लगने के बाद लौटा दिया जाता है। कोई अधिकारी ग्राहकों से फीड बैक लेेने नहीं आता है।
- अमित सिंह, सिविल लाइंस