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High Court : पत्नी की सुविधा के लिए वैवाहिक विवादों का स्थानांतरण संभव नहीं. याचिका खारिज
Wed, 05 Aug 2026 12:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:50 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों के मुकदमे को पत्नी की सुविधा, नाबालिग बच्चे की देखभाल या दूसरे जिले में भरण-पोषण का मामला लंबित होने के आधार पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। यह आदेश तभी दिया जा सकता है, जब साबित हो कि बिना स्थानांतरण न्याय मिलना संभव नहीं है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों के मुकदमे को पत्नी की सुविधा, नाबालिग बच्चे की देखभाल या दूसरे जिले में भरण-पोषण का मामला लंबित होने के आधार पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। यह आदेश तभी दिया जा सकता है, जब साबित हो कि बिना स्थानांतरण न्याय मिलना संभव नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने पत्नी की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी। साथ ही अलीगढ़ के परिवार न्यायालय को पति की ओर से दाखिल दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना की याचिका पर शीघ्र फैसला लेने का आदेश दिया है।
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पत्नी ने पति की ओर से अलीगढ़ के परिवार न्यायालय में लंबित दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना की याचिका को गौतम बुद्ध नगर के परिवार न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। पत्नी ने दलील दी कि वह अपनी नाबालिग बेटी संग गौतमबुद्ध नगर में रहती है। अलीगढ़ आना-जाना आर्थिक रूप से कठिन है। इससे बेटी की पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही यह भी कहा कि उसका भरण-पोषण का मुकदमा पहले से गौतमबुद्ध नगर में लंबित है। इसलिए दोनों मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होनी चाहिए।
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पति ने कहा कि पत्नी का मायका और ननिहाल दोनों अलीगढ़ में है। स्थानांतरण की मांग केवल मुकदमे को लंबा खींचने के उद्देश्य से की गई है। हाईकोर्ट ने पत्नी की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि स्थानांतरण की शक्ति का प्रयोग न्याय हित में किया जाता है, किसी पक्ष की सुविधा के लिए नहीं। स्थानांतरण के लिए केवल सुविधा को आधार बना लिया जाए तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। भरण-पोषण और दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के मुकदमे अलग-अलग प्रकृति के हैं। इनका उद्देश्य भी अलग होता हैं। इसलिए उनका अलग-अलग अदालतों में लंबित होना स्थानांतरण का आधार नहीं बनता।
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