Health : शुरुआती तीन घंटे गोल्डन ऑवर, जान का खतरा कम, अनियमित दिनचर्या और नशा बढ़ा रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
ठंड के मौसम में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ जाते हैं। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के न्यूरोलॉजी विभाग में हर महीने 100 से अधिक मामले ब्रेन स्ट्रोक के आते हैं। कई मरीज ऐसे हैं, जिनका समय पर इलाज हुआ और उन्होंने जिंदगी की जंग जीत ली।
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ब्रेन स्ट्रोक के दौरान हर एक मिनट कीमती होता है। मरीज के इलाज के लिए शुरुआती तीन घंटे गोल्डन ऑवर होते हैं। इस दौरान सही इलाज मिलने से जान का खतरा काफी कम हो जाता है। ठंड के मौसम में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ जाते हैं। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के न्यूरोलॉजी विभाग में हर महीने 100 से अधिक मामले ब्रेन स्ट्रोक के आते हैं। कई मरीज ऐसे हैं, जिनका समय पर इलाज हुआ और उन्होंने जिंदगी की जंग जीत ली।
केस नंबर 1- सिविल लाइंस के रहने वाले 57 वर्षीय एक व्यक्ति को हाइपर टेंशन की शिकायत थी। उनकी बाइपास सर्जरी भी हुई थी। एक सप्ताह पहले उन्हें अपने आधे शरीर में झुनझुनाहट का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क किया। न्यूरो सर्जन डॉ. पंकज गुप्ता ने उनका एमआरआई कराया तो ब्रेन स्ट्रोक की बात सामने आई। इलाज के तीन दिन बाद मरीज को लाभ मिला और वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गए।
केस नंबर 2- एजी ऑफिस में काम करने वाले 47 वर्षीय एक क्लर्क को एक माह पहले एहसास हुआ कि उनके हाथ में जान नहीं रह गई है। काम करते समय पेन अपने आप छूट गया। उन्होंने चिकित्सक से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि वह हाइपर टेंशन की दवा लेते हैं। एमआरआई में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक निकला। पांच दिन चले इलाज के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गए।
केस नंबर 3- महज चार दिन पहले एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला एसआरएन के न्यूरोलॉजी विभाग में अपना इलाज कराने पहुंची। सिटी स्कैन के दौरान पता चला कि उसके दिमाग में ट्यूमर है, जिसके कारण उसे ब्रेन स्ट्रोक आया है। बुधवार को महिला की सर्जरी हुई। अब वह स्वस्थ हैं। फिलहाल अभी एसआरएन में भर्ती है।
अगर अचानक से कम दिखाई पड़ने लगे, हाथ-पैर में झुनझुनाहट, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आए तो बिना देर किए डॉ. से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि शुरूआती तीन घंटे गोल्डन ऑवर होते हैं, जिसमें मरीज का इलाज शुरू होना आवश्यक होता है। - डॉ. पंकज, न्यूरो सर्जन, स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय, प्रयागराज।