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UP: सद्दाम पर पहले से दर्ज थे तीन केस, फिर कैसे बना रहा पहेली?... उमेश पाल हत्याकांड से 23 दिन पहले लगाई एफआर
Tue, 03 Oct 2023 10:28 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Oct 2023 10:28 AM IST
सार
सद्दाम पर पहले से तीन मुकदमे दर्ज थे। तीनों मुकदमे प्रयागराज के धूमनगंज थाने के ही थे। इसके बावजूद पांच-पांच इंस्पेक्टरों के लिए वह अबूझ पहेली बना रहा और आखिरकार उसे खोज नहीं पाने का तर्क देकर मुकदमा समाप्त कर दिया गया।
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माफिया अशरफ का साला सद्दाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
माफिया खालिद अजीम उर्फ अशरफ के साले सद्दाम के मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट देने के संबंध में एक और खुलासा हुआ है। पता चला है कि प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्द कहे जाने से संबंधित वीडियो वायरल करने के आरोप में दर्ज इस मुकदमे से पहले भी उस पर तीन मुकदमे दर्ज हो चुके थे। तीनों ही मुकदमे धूमनगंज थाने के ही थे।
इसके बावजूद पांच-पांच इंस्पेक्टरों के लिए वह अबूझ पहेली बना रहा और आखिरकार उसे खोज नहीं पाने का तर्क देकर मुकदमा समाप्त कर दिया गया। सद्दाम पर आरोप था कि उसने प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्दों का प्रयोग करने से संबंधित एक वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया।
30 सितंबर 2020 को इस संबंध में तत्कालीन चौकी प्रभारी राजरूपपुर चंद्रभानु ने मुकदमा लिखाया। जिसमें करीब ढाई साल तक विवेचना चलने के बाद अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। इसमें विवेचक ने उसका पता न चलने व भविष्य में इसकी उम्मीद न होने की भी बात लिखी।
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खास बात यह है कि जिस धूमनगंज थाने में दर्ज मुकदमे में एफआर लगाई गई, उसी थाने में इससे पहले भी माफिया के साले सद्दाम पर केस दर्ज हो चुके थे। खास बात यह है कि एक नहीं बल्कि उस पर तीन-तीन केस पहले से दर्ज थे।
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इसके बावजूद पांच-पांच इंस्पेक्टरों के लिए वह अबूझ पहेली बना रहा और आखिरकार उसे खोज नहीं पाने का तर्क देकर मुकदमा समाप्त कर दिया गया। सद्दाम पर आरोप था कि उसने प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्दों का प्रयोग करने से संबंधित एक वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया।
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30 सितंबर 2020 को इस संबंध में तत्कालीन चौकी प्रभारी राजरूपपुर चंद्रभानु ने मुकदमा लिखाया। जिसमें करीब ढाई साल तक विवेचना चलने के बाद अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। इसमें विवेचक ने उसका पता न चलने व भविष्य में इसकी उम्मीद न होने की भी बात लिखी।
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खास बात यह है कि जिस धूमनगंज थाने में दर्ज मुकदमे में एफआर लगाई गई, उसी थाने में इससे पहले भी माफिया के साले सद्दाम पर केस दर्ज हो चुके थे। खास बात यह है कि एक नहीं बल्कि उस पर तीन-तीन केस पहले से दर्ज थे।
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सद्दाम पर धूमनगंज थाने में पहला केस दिसंबर 2015 में दर्ज हुआ। करीब 10 महीनों बाद फिर इसी थाने में अक्तूबर 2016 में एक केस लिखा गया। जून 2020 में उस पर अशरफ को फरारी में मदद व संरक्षण देने के आरोप में नामजद किया गया। इसमें पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार भी किया था।
इस मुकदमे में उसके खिलाफ चार्जशीट भी दायर की गई। इसके बाद सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्द कहे जाने से संबंधित वीडियो वायरल करने के आरोप में केस दर्ज किया गया। सवाल यह है कि जब उसी थाने में उसके खिलाफ तीन केस पहले से दर्ज थे, तो उसे कैसे पुलिस नहीं खोज पाई।
उमेशपाल हत्याकांड से 23 दिन पहले लगाई एफआर
सद्दाम के मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट उमेश पाल हत्याकांड से ठीक 23 दिन पहले लगाई गई। 24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी जबकि मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट एक फरवरी को लगाई गई। गौरतलब है कि 12 फरवरी को ही बरेली जेल में उमेशपाल हत्याकांड के शूटरों असद, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम समेत अन्य ने बरेली जेल में जाकर अशरफ से मुलाकात की थी। बरेली पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह मुलाकात सद्दाम ने ही कराई थी।
सद्दाम के मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट उमेश पाल हत्याकांड से ठीक 23 दिन पहले लगाई गई। 24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी जबकि मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट एक फरवरी को लगाई गई। गौरतलब है कि 12 फरवरी को ही बरेली जेल में उमेशपाल हत्याकांड के शूटरों असद, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम समेत अन्य ने बरेली जेल में जाकर अशरफ से मुलाकात की थी। बरेली पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह मुलाकात सद्दाम ने ही कराई थी।
नहीं शुरू हुई जांच, अफसर बोलने को तैयार नहीं
मामला सामने आने के तीन दिन बाद भी इस मामले में काेई कार्रवाई नहीं हुई है। जांच तक शुरू नहीं कराई गई है। उधर अफसर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि इस प्रकरण में विवेचकों की भूमिका तो सवालों में है ही, पर्यवेक्षण अधिकारियों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को भी इस मामले में अफसरों से बात करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
मामला सामने आने के तीन दिन बाद भी इस मामले में काेई कार्रवाई नहीं हुई है। जांच तक शुरू नहीं कराई गई है। उधर अफसर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि इस प्रकरण में विवेचकों की भूमिका तो सवालों में है ही, पर्यवेक्षण अधिकारियों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को भी इस मामले में अफसरों से बात करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।