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संगम पर हजारों ने लगाई डुबकी, शरद पूर्णिमा स्नान-दान आरंभ
Sat, 31 Oct 2020 12:50 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 31 Oct 2020 12:50 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
संगम तट पर डुबकी केसाथ शुक्रवार को शरद पूर्णिमा का दो दिवसीय स्नान, दान और ध्यान आरंभ हो गया। चंद्रकिरणों की अमृत वर्षा में निरोगी काया के लिए जहां औषधियां तैयार की गईं, वहीं धवल चांदनी में सोलह कलाओं से युक्त चंद्रमा के दर्शन के साथ ही दीपदान और विविध अनुष्ठान किए गए। स्नान, दान की पूर्णिमा शनिवार को भी मनाई जाएगी।
भीड़ रोकने के लिए पुलिस ने सुबह ही हर्षवर्धन चौराहे पर बैरिकेडिंग कर संगम जाने वाले मुख्य मार्ग को आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया, लेकिन दूसरे मार्गो से हजारों की तादाद में भक्त संगम पहुंचे। दिन भर डुबकी लगाने का सिलसिला चलता रहा। संगम से लेकर भगवान श्रीहरि के दरबारों तक अनुुष्ठान हुए। सीडीए पेंशन स्थित बिंदु माधव मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया।
वहां मुख्य पुजारी भैरव प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ हुआ। इसके बाद भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए दूरी बनाकर प्रसाद ग्रहण किया। वेणी माधव के अलावा जानसेनगंज में मनोहर माधव और छिवकी में गदा माधव के दरबारों में भी शरदोत्सव पर दीपदान के साथ भजनों की गूंज मचती रही। इसी के साथ घर-घर में रात को खीर बनाकर खुले आकाश में रखी गई। शनिवार को इस खीर का प्रसाद के रूप में वितरण किया जाएगा।
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भीड़ रोकने के लिए पुलिस ने सुबह ही हर्षवर्धन चौराहे पर बैरिकेडिंग कर संगम जाने वाले मुख्य मार्ग को आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया, लेकिन दूसरे मार्गो से हजारों की तादाद में भक्त संगम पहुंचे। दिन भर डुबकी लगाने का सिलसिला चलता रहा। संगम से लेकर भगवान श्रीहरि के दरबारों तक अनुुष्ठान हुए। सीडीए पेंशन स्थित बिंदु माधव मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया।
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वहां मुख्य पुजारी भैरव प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ हुआ। इसके बाद भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए दूरी बनाकर प्रसाद ग्रहण किया। वेणी माधव के अलावा जानसेनगंज में मनोहर माधव और छिवकी में गदा माधव के दरबारों में भी शरदोत्सव पर दीपदान के साथ भजनों की गूंज मचती रही। इसी के साथ घर-घर में रात को खीर बनाकर खुले आकाश में रखी गई। शनिवार को इस खीर का प्रसाद के रूप में वितरण किया जाएगा।
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