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इंसाफ की आस में बैठे हजारों वादकारियों का बढ़ गया इंतजार

Fri, 21 May 2021 01:34 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 May 2021 01:34 AM IST
सार

  • कोरोना के चलते बढ़ी लंबित मुकदमों की संख्या, 10 से 12 हजार पर पहुंची 

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Thousands of litigants sitting in the waiting of justice increased
court - फोटो : court

विस्तार

कोरोना के चलते अन्य काम तो प्रभावित हुए ही हैं, पुलिस पर मुकदमों का बोझ भी बढ़ गया है। हाल यह है कि लंबित विवेचनाओं की संख्या 10 हजार से 12 हजार पर पहुंच गई है। इनमें से करीब दो हजार मुकदमे तो सिर्फ धारा 144 के उल्लंघन व महामारी एक्ट से संबंधित हैं। अफसरों का कहना है कि कोरोना संकट के बाद अभियान चलाकर विवेचनाएं निस्तारित कराई जाएंगी। 
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जानकारों के मुताबिक, पिछले साल तक जिले में करीब 15 हजार विवेचनाएं लंबित थीं। अगस्त 2020 से अभियान चलाकर विवेचना के निस्तारण में तेजी लाई गई। जिसका असर भी हुआ और कुछ ही महीनों में यह संख्या 10 हजार के करीब आ गई। लेकिन इसके बाद कोरोना संक्रमण ने फिर पांव पसारने शुरू किए। नतीजा यह हुआ कि पुलिस कोरोना और फिर इसके बाद चुनाव ड्यूटी में मशगूल हो गई। जिसके चलते विवेचना निस्तारित करने का काम पिछड़ गया। हाल यह हुआ कि  लंबित मुकदमों की संख्या 10 हजार से 12 हजार पर पहुंच गई। 
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कोविड गाइडलाइन उल्लंघन के मामलों ने बढ़ाया बोझ
पुलिस विभाग के आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि पिछले करीब दो महीनों में सबसे ज्यादा मामले कोविड गाइडलाइन उल्लंघन के दर्ज हुए। अफसरों के मुताबिक, पूरे जिले में कम से कम दो हजार मामले धारा 144 के उल्लंघन और महामारी एक्ट की धाराओं में दर्ज किए गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों का ज्यादातर वक्त कोविड ड्यूटी में ही बीता जिससे विवेचना का काम पिछड़ गया। 
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इसलिए भी आई दिक्कत
उधर पुलिस अफसर कहते हैं कि कोविड के चलते विवेचना का काम पूरी तरह से ठप हो गया, ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। गंभीर अपराध के मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। न सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा बल्कि अन्य कार्रवाई की। अन्य मामलों में विवेचना निस्तारित करने में दिक्कतें आईं तो इसकी कई वजह रहीं। कोरोना के चलते आवागमन बंद होना, न्यायालय में कामकाज स्थगित होना भी इसमें शामिल हैं।  सव


कोरोना के चलते विवेचना निस्तारण की रफ्तार धीमी पड़ी है लेकिन यह पूरी तरह से ठप नहीं है। जल्द ही अभियान चलाकर लंबित मुकदमों का निस्तारण कराया जाएगा। - सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, डीआईजी
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