हाईकोर्ट : कानून निरस्त होने के आधार पर अग्रिम जमानत न पाने वालों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत
याचियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित आईपीसी के तहत धोखाधड़ी किए जाने का मामला पिछले वर्ष चंदौली जिले के चंदौली थाने में दर्ज हुआ था। याचियों को निचली अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिल पाई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत से कानून निरस्त होने के आधार अग्रिम जमानत न पाने वाले याचियों को अंतरिम राहत प्रदान की है। उनकी गिरफ्तारी पर 11 अगस्त तक रोक लगाते हुए पक्षकारों से तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा और एक हफ्ते में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा ने गुलाम मुस्तफा खान व अन्य की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित आईपीसी के तहत धोखाधड़ी किए जाने का मामला पिछले वर्ष चंदौली जिले के चंदौली थाने में दर्ज हुआ था। याचियों को निचली अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिल पाई। निचली अदालत ने पेट्रोलियम नियम 1976 के निरस्त होने का आधार बनाकर अग्रिम जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया था।
याचियों की ओर से कहा गया कि निचली अदालत ने पेट्रोलिय नियम 1976 के निरस्त होने के आधार पर उनकी अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज किया है। जबकि, उसकी जगह पर पेट्रोलियम नियम-2002, 13 मार्च 2002 से लागू हो गया। कहा गया कि राज्य द्वारा निरस्त कानून का हवाला देते हुए उन्हें अपनी अग्रिम जमानत पर पुनर्विचार करने का अधिकार है। याचियों ने कहा कि पेट्रोलियम की दोनों श्रेणियों (वर्ग ए और वर्ग बी) की थोक में परिवहन करने का लाइसेंस उनके पास है, जो 25 अप्रैल 2025 तक वैध है।
उनका वाहन 22 लीटर डीजल ले जाने के लिए अधिकृत था और कागजात पहले उनके पास उपलब्ध नहीं थे। डीजल परिवहन करना पूरी तरह से उनके अधिकार में है। राज्य केपास ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण नहीं है जो उनके खिलाफ है। सरकारी अधिवक्ता ने भी इस बात को माना कि पेट्रोलियम नियम 1976 के नियम निरस्त हो गए हैं और नए नियम लागू हो गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने याचियों की गिरफ्तारी पर 11 अगस्त तक रोक लगाते हुए यूपी सरकार से जवाब तलब किया है।