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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   There was a fierce battle between Naga and Bairagi saints for the royal bath in Haridwar Kumbh.

दिव्य कुंभ-भव्य अखाड़े : हरिद्वार कुंभ में राजसी स्नान के लिए नागा-बैरागी संतों के बीच हुआ था भीषण युद्ध

Sun, 22 Dec 2024 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 22 Dec 2024 06:09 AM IST
सार

1797 के हरिद्वार कुंभ में नागा संन्यासियों और वैरागी परंपरा के संतों में भीषण युद्ध हुआ था। इस कुंभ में 20 लाख संतों-भक्तों के डुबकी लगाने का उल्लेख मिलता है।

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There was a fierce battle between Naga and Bairagi saints for the royal bath in Haridwar Kumbh.
Mahakumbh - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुंभ में राजसी स्नान के लिए अलग-अलग परंपरा के संतों के बीच युद्ध भी होते रहे हैं। 1797 के हरिद्वार कुंभ में नागा संन्यासियों और वैरागी परंपरा के संतों में भीषण युद्ध हुआ था। इस कुंभ में 20 लाख संतों-भक्तों के डुबकी लगाने का उल्लेख मिलता है।

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महाकुंभ की संस्कृति, बसावट, स्नान पर्व और भीड़ को लेकर गजेटियर में भी वर्णन मिलता है। अंग्रेज सैन्य अफसर कैप्टन टाॅम हार्डविक ने अपने एक लेख में हरिद्वार के 1797 के कुंभ की घटना पर विस्तार से रोशनी डाली है। कैप्टन हार्डविक ने लिखा है कि उस कुंभ में हरिद्वार में हर की पैड़ी पर देश भर से साधु-संन्यासी पहुंचे। संतों के साथ ही डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ भी काफी बढ़ गई थी। हार्डविक ने तब के कुंभ में 20 लाख श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की बात लिखी है।
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वह लिखते हैं कि शक्ति में प्रथम स्थान रखने वाले नागाओं ने सबसे पहले राजसी स्नान का एलान किया। इतना ही नहीं स्नान के समय तलवार, भाला समेत अन्य शस्त्र लेकर कुंभ क्षेत्र में प्रवेश न करने का आज्ञा पत्र भी जारी किया। नागाओं ने पूरे मेला क्षेत्र पर अपना नियंत्रण कर लिया। बैरागी परंपरा के संत राजसी स्नान करना चाहते थे, लेकिन नागाओं ने उनको रोक दिया। नागा-संन्यासी तलवार-ढाल के साथ चल रहे थे और आम जनता के हाथों में सिर्फ लाठी रहती थी।
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पुलिस भी थी नागाओं के अधीन
मेले के समय तक पुलिस भी नागाओं के ही अधीन रहती थी। संन्यासी ही अपने धूने पर लोगों की शिकायतें सुनते और निपटारा करते थे। हार्डविक ने लिखा है कि 10 अप्रैल की सुबह मेला समाप्त हुआ। विदाई होने के साथ ही सुबह बैरागी संतों ने सिखों के साथ मिलकर सभी घाटों पर नागा साधुओं पर हमला कर दिया। उस हमले के समय ब्रिटिश फौज मूकदर्शक बनी रही।

महाकुंभ : यातायात के लिए 20 पांटून पुल उपलब्ध

मेला क्षेत्र में निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। खासतौर से पांटून पुल और चकर्ड प्लेट बिछाने का काम दोगुनी गति से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग ने दावा किया है कि 30 में से 20 पांटून पुल यातायात के लिए उपलब्ध हैं। चीफ इंजीनियर एके द्विवेदी का कहना है कि 25 दिसंबर तक सभी पुल तैयार हो जाएंगे। इनके अप्रोच मार्ग का कार्य 27 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा चकर्ड प्लेट बिछाने का काम भी 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

बता दें कि कुंभ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने शासन से पीडब्ल्यूडी की शिकायत की थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने पांटून पुल बनाने के लिए मेला प्राधिकरण से 25 दिसंबर तक का समय मांगा था। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार देर रात तक 20 पांटून पुल यातायात के लिए उपलब्ध करा दिए गए। तैयार हो चुके पुलों पर प्लेट की लेन और क्लैंपिंग के छोटे-छोटे काम किए जा रहे हैं।

इसके अलावा शनिवार देर रात तक एक और पांटून पुल तैयार हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने बताया कि काम में गति लाने के लिए मजदूरों की संख्या दोगुनी की गई है। तीन-तीन शिफ्ट में पांटून पुल बनाया जा रहा है। गाटा मार्गों को छोड़कर क्षेत्र में चकर्ड बिछाने का काम 31 दिसंबर तक पूरा करने की बात कही है।

कल शृंग्वेरपुर धाम के दर्शन कर सीएम करेंगे महाकुंभ के कार्यों का निरीक्षण
महाकुंभ की तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए सोमवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज आएंगे। इस बार वह सबसे पहले शृंग्वेरपुर धाम के दर्शन पूजन करेंगे। इसके बाद अरैल और नैनी में मेला क्षेत्र का भ्रमण करेंगे। करीब चार घंटे तक प्रयागराज में रहकर वे महाकुंभ की तैयारियाें को परखेंगे। साथ ही समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे।

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