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आदेश पर अमल कराने के लिए नहीं हो सकती धारा 482 में याचिका: हाईकोर्ट
Mon, 22 Feb 2021 07:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 22 Feb 2021 07:50 PM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने के आदेश पर अमल करने का समादेश धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दाखिल याचिका पर जारी नहीं किया जा सकता। ऐसी याचिका पोषणीय नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने गुड्डू दिवाकर उर्फ सुशील कुमार की याचिका पर दिया है।
फर्रुखाबाद के नवदिया गांव के दो प्लाटों 417 व 420 से अवैध निर्माण हटाने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष याची मां शारदा ने अर्जी दी थी। जिसे स्वीकार करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद ने 12 अक्तूबर 12 को अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। किंतु उस पर अमल नहीं किया गया तो यह याचिका दाखिल की गई।
विपक्षियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता दया शंकर मिश्र ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की। जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि धारा 482 के तहत अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग किसी आदेश पर अमल कराने के लिए समादेश जारी नहीं किया जा सकता।
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फर्रुखाबाद के नवदिया गांव के दो प्लाटों 417 व 420 से अवैध निर्माण हटाने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष याची मां शारदा ने अर्जी दी थी। जिसे स्वीकार करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद ने 12 अक्तूबर 12 को अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। किंतु उस पर अमल नहीं किया गया तो यह याचिका दाखिल की गई।
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विपक्षियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता दया शंकर मिश्र ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की। जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि धारा 482 के तहत अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग किसी आदेश पर अमल कराने के लिए समादेश जारी नहीं किया जा सकता।
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