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फिर बिगड़ा मौसम का मिजाज, बूंदाबंादी की संभावना
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 29 Mar 2015 11:26 PM IST
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गर्मी के मौसम में जम्मू कश्मीर में बर्फबारी ने एक बार फिर गंगा के मैदानी इलाकाें में मौसम का मिजाज बदलकर रख दिया गया है। बर्फबारी के चलते हिमालयी इलाकाें से आ रही ठंडी पछुवा और पहले ही ठंडी होकर आ रही पुरवइया के गठजोड़ ने मौसम का पूरा तानाबाना ही बदलकर रख दिया है। दिनोंदिन अपनी तपन बढ़ा रहे सूरज की वजह से जहां दिन का तापमान 37.6 डिग्री को छू गया वही रात का तामपान 19.5 डिग्री पर आकर टिक गया है। दिन की गर्मी के चलते न्यूनतम आर्द्रता 21 फीसदी तक पहुुंच गया है।
जबकि अधिकतम आर्द्रता 88 फीसदी है। तापमान व आर्र्दता केइसी उतार चढ़ाव की वजह से आसमान में बादल है। मौसम विज्ञानियों को उम्मीद है कि मौसम का मिजाज को देखने को मिल रहा है यह चौंकाने वाला है। उम्मीद है कि हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि पिछले जून से लेकर मौसम नए नए रंग दिखा रहा है। ठंड के दौरान गंभीर ठंड और बारिश हुई तो फरवरी माह में जबरदस्त बारिश ने मौसम विज्ञानियों को चौंका दिया था।
दूसरी ओर आसमान में बादलों को देखकर किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आयी है। बारिश व तेज हवाओं ने किसानों की 70 फीसदी गेंहू, चना, सरसों, मसूर की फसल पहले ही तबाह कर दी है। ऐसे में अब यदि एक बार फिर बूंदाबांदी होती है तो इससे सरसों, चना व गेंहू को भारी नुकसान हो सकता है।
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जबकि अधिकतम आर्द्रता 88 फीसदी है। तापमान व आर्र्दता केइसी उतार चढ़ाव की वजह से आसमान में बादल है। मौसम विज्ञानियों को उम्मीद है कि मौसम का मिजाज को देखने को मिल रहा है यह चौंकाने वाला है। उम्मीद है कि हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि पिछले जून से लेकर मौसम नए नए रंग दिखा रहा है। ठंड के दौरान गंभीर ठंड और बारिश हुई तो फरवरी माह में जबरदस्त बारिश ने मौसम विज्ञानियों को चौंका दिया था।
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दूसरी ओर आसमान में बादलों को देखकर किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आयी है। बारिश व तेज हवाओं ने किसानों की 70 फीसदी गेंहू, चना, सरसों, मसूर की फसल पहले ही तबाह कर दी है। ऐसे में अब यदि एक बार फिर बूंदाबांदी होती है तो इससे सरसों, चना व गेंहू को भारी नुकसान हो सकता है।
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