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संस्कृत हमारी संस्कृति का मेरुदंड: रामनाईक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:56 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति का मेरुदंड है। यह सभी भारतीय भाषाओं की जननी है। संस्कृत से लगाव के कारण मैंने बचपन में ही गीता पढ़ ली थी। संस्कृत में अनूदित अपनी आत्मकथा ‘चरैवेति-चरैवेति’ पर चर्चा के क्रम में उन्होंने बताया कि नेशनल बुक ट्रस्ट के साठ वर्षों के इतिहास में संस्कृत में प्रकाशित होने वाली यह पहली पुस्तक भी है। खास यह कि इसका पहला संस्करण माह भर के भीतर ही बिक गया।
शनिवार को सांस्कृतिक केंद्र में ‘चरैवेति चरैवेति’ पर आयोजित विद्वत गोष्ठी में उन्होंने अंत में बोलने की परिपाटी से इतर बतौर लेखक पहले वक्ता के रूप में कृति के अनुवाद से जुड़ी जानकारी दी। कहा, इसका जर्मन, बांग्ला, अरबी-फारसी, सिंधी में भी अनुवाद किया जा रहा है। पुस्तक से पहले इसकी सामग्री 27 लेखों के रूप में एक अखबार में छपी। अंत में उन्होंने सुझाव भी दिया कि किताब मुफ्त में नहीं बल्कि खरीदकर पढ़नी चाहिए। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एमपी दुबे ने पूर्व पीठिका प्रस्तुत करते हुए आत्मकथा को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओम प्रकाश पांडेय ने कहा, यह संस्कृत की पहली नहीं लेकिन साफगोई से लिखी विशिष्ट आत्मकथा जरूर है। इसी क्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ल, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भगवत शरण शुक्ल, प्रोफेसर रामहित त्रिपाठी, प्रोफेसर शैल कुमारी मिश्र ने भी पुस्तक की उपयोगिता बताई।
श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और सांस्कृतिक केंद्र की ओर से सांस्कृतिक केंद्र में हुई विद्वत गोष्ठी के आरंभ में रानी रेवती देवी इंटर कॉलेज की छात्राओं ने मनोज गुप्ता के निर्देशन में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया। वेद भवन के विद्यार्थियों ने वेद पाठ किया। राज्यपाल को श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉ.रामजी मिश्र ने अभिनंदन ग्रंथ और सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने उनकी ही पोट्रेट भेंट की। संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ.वाचस्पति मिश्र ने स्वागत, डॉ.रामजी मिश्र ने संचालन और इंद्रजीत ग्रोवर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में अनेक संस्कृत मनीषी, शिक्षक, विद्यार्थी मौजूद थे।
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समारोह के दौरान स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, राज्यपाल ने सरकार को जो भी सुझाव दिए, सरकार ने उसे पूरा किया। अब अनुरोध है कि वह इलाहाबाद का नामकरण प्रयागराज करने के लिए भी पहल करें। इसी क्रम में पर्यटन मंत्री डॉ.रीता बहुगुणा जोशी और उड्डयन मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने भी राज्यपाल की पुस्तक की सराहना की।
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शनिवार को सांस्कृतिक केंद्र में ‘चरैवेति चरैवेति’ पर आयोजित विद्वत गोष्ठी में उन्होंने अंत में बोलने की परिपाटी से इतर बतौर लेखक पहले वक्ता के रूप में कृति के अनुवाद से जुड़ी जानकारी दी। कहा, इसका जर्मन, बांग्ला, अरबी-फारसी, सिंधी में भी अनुवाद किया जा रहा है। पुस्तक से पहले इसकी सामग्री 27 लेखों के रूप में एक अखबार में छपी। अंत में उन्होंने सुझाव भी दिया कि किताब मुफ्त में नहीं बल्कि खरीदकर पढ़नी चाहिए। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एमपी दुबे ने पूर्व पीठिका प्रस्तुत करते हुए आत्मकथा को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओम प्रकाश पांडेय ने कहा, यह संस्कृत की पहली नहीं लेकिन साफगोई से लिखी विशिष्ट आत्मकथा जरूर है। इसी क्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ल, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भगवत शरण शुक्ल, प्रोफेसर रामहित त्रिपाठी, प्रोफेसर शैल कुमारी मिश्र ने भी पुस्तक की उपयोगिता बताई।
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श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और सांस्कृतिक केंद्र की ओर से सांस्कृतिक केंद्र में हुई विद्वत गोष्ठी के आरंभ में रानी रेवती देवी इंटर कॉलेज की छात्राओं ने मनोज गुप्ता के निर्देशन में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया। वेद भवन के विद्यार्थियों ने वेद पाठ किया। राज्यपाल को श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉ.रामजी मिश्र ने अभिनंदन ग्रंथ और सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने उनकी ही पोट्रेट भेंट की। संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ.वाचस्पति मिश्र ने स्वागत, डॉ.रामजी मिश्र ने संचालन और इंद्रजीत ग्रोवर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में अनेक संस्कृत मनीषी, शिक्षक, विद्यार्थी मौजूद थे।
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समारोह के दौरान स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, राज्यपाल ने सरकार को जो भी सुझाव दिए, सरकार ने उसे पूरा किया। अब अनुरोध है कि वह इलाहाबाद का नामकरण प्रयागराज करने के लिए भी पहल करें। इसी क्रम में पर्यटन मंत्री डॉ.रीता बहुगुणा जोशी और उड्डयन मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने भी राज्यपाल की पुस्तक की सराहना की।