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कोरोना काल में योग की उपयोगिता, लोकप्रियता हुई सिद्ध
Mon, 21 Jun 2021 01:42 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 21 Jun 2021 01:42 AM IST
सार
- सातवें अंतर्राष्टीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर विश्व आयुर्वेद मिशन की ओर से राष्ट्रीय तरंग संगोष्ठि
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2021
- फोटो : iStock
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विस्तार
प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ, सुखी रहे, इसी संकल्प को दोहराते हुए विश्व आयुर्वेद मिशन की ओर से राष्ट्रीय तरंग संगोष्टि में रविवार को आयुर्वेंद विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय के अधिकारियों ने योग की महत्ता बताई। सबने एक स्वर में कहा कि निरोगी काया के लिए योग जरूरी है। कोरोना काल में योग की उपयोगिता और लोकप्रियता सिद्ध हो चुकी है। संक्रमितों के साथ संक्रमणमुक्त हो चुके लोगों के लिए प्रणायाम संजीवनी साबित हुआ है।
शुभारंभ करते हुए आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव आयुष मंत्रालय के सलाहकार डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने स्वास्थ्य का महत्व बताया। कहा कि जो व्यक्ति स्वास्थ्य के प्रति जागरूक है, वह समाज के लिए बेहतर कार्य कर सकता है। मुख्य अतिथि छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठ ने कहा कि हमारे शरीर की हीलिंग पावर सकारात्मक सोच से बढ़ती है। इसके लिए नाणी शोधन, प्रणायाम, अनुलोम विलोम का नियमित अभ्यास जरूरी है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ.जीएस तोमर ने कहा कि आज योग आध्यात्मिकता से हटकर वैज्ञानिकता की ओर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वसमाज के लिए स्थापित हो चुका है। असाध्य रोगों की चिकित्सा के साथ योग शरीर सौष्ठव परिवर्धन के लिए अधिक हो रहा है। कोरोना काल खंड में योग प्रणायाम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इमें इसे विश्व स्तर पर पीड़ित मानवता की सेवा और शांति के लिए स्थापित करने के प्रयास जारी रखने होंगे। उन्होंने कहाकि यम, नियम, आसन, प्रणायाम, ध्यान, आदि के नियमित अभ्यास हम स्वस्थ रह सकते हैं।
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के योग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीरू नथानी ने अष्टांग योग पर विचार रखते हुए कहा कि स्वास्थ्य मानव का मूल अधिकार है। अंत में मिशन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. धर्मप्रकाश आर्य ने वर्तमान परिदृश्य में योग के महत्व को रेखांकित किया। संचालन आरोग्य भारती काशी प्रांत के सह सचिव डॉ. अवनीश पांडेय ने किया। संगोष्ठि में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली के डॉ. रमाकांत यादव ने कहाकि औषधि रोग निदान का विकल्प नहीं है, योग हानिरहित निरोगी काया रखने का सर्वोत्तम उपाय है। इस संगोष्ठि में देश के नामचीन आयुर्वंद विशेषज्ञ और योगाचार्य शामिल हुए।
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शुभारंभ करते हुए आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव आयुष मंत्रालय के सलाहकार डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने स्वास्थ्य का महत्व बताया। कहा कि जो व्यक्ति स्वास्थ्य के प्रति जागरूक है, वह समाज के लिए बेहतर कार्य कर सकता है। मुख्य अतिथि छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठ ने कहा कि हमारे शरीर की हीलिंग पावर सकारात्मक सोच से बढ़ती है। इसके लिए नाणी शोधन, प्रणायाम, अनुलोम विलोम का नियमित अभ्यास जरूरी है।
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कार्यक्रम संयोजक डॉ.जीएस तोमर ने कहा कि आज योग आध्यात्मिकता से हटकर वैज्ञानिकता की ओर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वसमाज के लिए स्थापित हो चुका है। असाध्य रोगों की चिकित्सा के साथ योग शरीर सौष्ठव परिवर्धन के लिए अधिक हो रहा है। कोरोना काल खंड में योग प्रणायाम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इमें इसे विश्व स्तर पर पीड़ित मानवता की सेवा और शांति के लिए स्थापित करने के प्रयास जारी रखने होंगे। उन्होंने कहाकि यम, नियम, आसन, प्रणायाम, ध्यान, आदि के नियमित अभ्यास हम स्वस्थ रह सकते हैं।
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के योग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीरू नथानी ने अष्टांग योग पर विचार रखते हुए कहा कि स्वास्थ्य मानव का मूल अधिकार है। अंत में मिशन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. धर्मप्रकाश आर्य ने वर्तमान परिदृश्य में योग के महत्व को रेखांकित किया। संचालन आरोग्य भारती काशी प्रांत के सह सचिव डॉ. अवनीश पांडेय ने किया। संगोष्ठि में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली के डॉ. रमाकांत यादव ने कहाकि औषधि रोग निदान का विकल्प नहीं है, योग हानिरहित निरोगी काया रखने का सर्वोत्तम उपाय है। इस संगोष्ठि में देश के नामचीन आयुर्वंद विशेषज्ञ और योगाचार्य शामिल हुए।