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बिना पैन मोटा लेनदेन करने वाले हो जाएं सतर्क
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:40 AM IST
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PAN
- फोटो : PAN
अगर आप बिना स्थायी खाता संख्या (पैन) के मोटी रकम का लेनदेन कर रहे हैं तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि आयकर विभाग आप के ऊपर बारीकी से नजर रखे है। इस तरह का लेनदेन करने वाले व्यक्तियों से पैन उपलब्ध कराने के लिए विभाग पत्र जारी करने जा रहा है। आयकर विभाग ने कार्रवाई से बचने के लिए आम लोगों से इसमें सहयोग की अपील की है।
वार्षिक रिटर्न में विभाग को विभिन्न प्रकार के उच्च मूल्य के लेनदेन की सूचनाएं दी जा रही हैं। इसमें बचत खाते में 10 लाख रुपये से अधिक नकद जमा, 30 लाख अथवा उससे अधिक मूल्य की अचल सम्पत्ति का क्रय/विक्रय आदि शामिल है। काफी रिटर्न में इस तरह के लेनदेन में पैन उपलब्ध नहीं है। विभाग के पास वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2016-17 की अवधि के ऐसे 90 लाख लेनदेन के विवरण हैं। आयकर विभाग ने इन हाउस कंप्यूटर तकनीक से ऐसे बिना पैन वाले लेनदेन के समूह बनाए हैं और तकरीबन 14 लाख पैन लेनदेन में से सात लाख उच्च जोखिम वाले समूहों को चिह्नित किया है। विभाग इनकी बारीकी से छानबीन कर रहा है।
अपर आयकर आयुक्त टीपी शुक्ल का कहना है कि ऐसे लेनदेन वाले व्यक्तियों को उनके पैन उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है। ऐसे लोगों को ई-फाइलिंग पोर्टल (www.Incometaxindiaefiling.gov.in) की सुविधा की गई है, जिसमें वह लेनदेन स्वीकार करते हुए उत्तर दे सकते हैं। संबंधित व्यक्ति ई-फाइलिंग वेबसाइट पर लॉग-इन कर पत्र में प्रदत्त विशिष्ट लेनदेन अनुक्रम संख्या का उल्लेख करते हुए लेनदेन को पैन से जोड़ सकते हैं। लेनदेन होने अथवा अस्वीकार करने का विकल्प अपनाते हुए इलेक्ट्रानिक रूप से पत्र का उत्तर भी दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्राप्त उत्तरों की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वार्षिक रिटर्न में विभाग को विभिन्न प्रकार के उच्च मूल्य के लेनदेन की सूचनाएं दी जा रही हैं। इसमें बचत खाते में 10 लाख रुपये से अधिक नकद जमा, 30 लाख अथवा उससे अधिक मूल्य की अचल सम्पत्ति का क्रय/विक्रय आदि शामिल है। काफी रिटर्न में इस तरह के लेनदेन में पैन उपलब्ध नहीं है। विभाग के पास वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2016-17 की अवधि के ऐसे 90 लाख लेनदेन के विवरण हैं। आयकर विभाग ने इन हाउस कंप्यूटर तकनीक से ऐसे बिना पैन वाले लेनदेन के समूह बनाए हैं और तकरीबन 14 लाख पैन लेनदेन में से सात लाख उच्च जोखिम वाले समूहों को चिह्नित किया है। विभाग इनकी बारीकी से छानबीन कर रहा है।
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अपर आयकर आयुक्त टीपी शुक्ल का कहना है कि ऐसे लेनदेन वाले व्यक्तियों को उनके पैन उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है। ऐसे लोगों को ई-फाइलिंग पोर्टल (www.Incometaxindiaefiling.gov.in) की सुविधा की गई है, जिसमें वह लेनदेन स्वीकार करते हुए उत्तर दे सकते हैं। संबंधित व्यक्ति ई-फाइलिंग वेबसाइट पर लॉग-इन कर पत्र में प्रदत्त विशिष्ट लेनदेन अनुक्रम संख्या का उल्लेख करते हुए लेनदेन को पैन से जोड़ सकते हैं। लेनदेन होने अथवा अस्वीकार करने का विकल्प अपनाते हुए इलेक्ट्रानिक रूप से पत्र का उत्तर भी दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्राप्त उत्तरों की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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