{"_id":"579bbba64f1c1b8b3b21e30d","slug":"the-trains-full-for-coming-raksha-bandhan-and-near-dates","type":"story","status":"publish","title_hn":" रक्षा बंधन के आसपास की तिथियों में इलाहाबाद आने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें फुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रक्षा बंधन के आसपास की तिथियों में इलाहाबाद आने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें फुल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Jul 2016 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रक्षा बंधन के मौके पर इस बार कई भाई बहन एक दूसरे से शायद न मिल पाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि रक्षा बंधन के आसपास की तिथियों में इलाहाबाद आने वाली अधिकांश ट्रेनें यात्रियों से ठसाठस हैं। रूट चाहे दिल्ली का हो या फिर मुंबई का। अहमदाबाद हो या फिर चेन्नई, सभी रूटों से इलाहाबाद आने वाली ट्रेनें फुल हैं। यात्री भी परेशान हैं कि वे क्या करें।
रक्षा बंधन का पर्व इस बार बृहस्पतिवार 18 अगस्त को है। त्योहार के पूर्व राजधानी दिल्ली से आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ कुछ ज्यादा ही है। शायद इसी वजह से पर्व के पूर्व 16 एवं 17 अगस्त को दिल्ली से इलाहाबाद आने वाली ट्रेनों में सर्वाधिक भीड़ है। वीआईपी ट्रेन 12418 प्रयागराज की बात करें तो इसकी स्लीपर श्रेणी में 17 अगस्त को प्रतीक्षा सूची अभी से ही 150 के आंकड़े को पार कर गई है। इसके थर्ड एसी श्रेणी में भी 17 अगस्त को प्रतीक्षा सूची 50 को पार कर गई है। एक दिन पहले 16 अगस्त को भी प्रयागराज की सभी श्रेणियों में प्रतीक्षा सूची है। नई दिल्ली से पुरी जाने वाली 12802 पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में 17 अगस्त को 120 एवं थर्ड एसी में प्रतीक्षा सूची 75 हो गई है।
दिल्ली से आने वाली महाबोधि एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस, रीवां एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी आदि ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची काफी लंबी हो गई। कमोवेश यही स्थिति मुंबई से आने वाली ट्रेनों की भी है। मुंबई से इलाहाबाद आने वाली गाड़ी संख्या 12322 मुंबई मेल, 15017 काशी एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में यात्रियों की लंबी प्रतीक्षा सूची है। पर्व के पहले चेन्नई से इलाहाबाद आने वाली गंगा कावेरी, रामेश्वरम एक्सप्रेस, बंगलूरू से इलाहाबाद आने वाली संघमित्रा एक्सप्रेस, अहमदाबाद-इलाहाबाद एक्सप्रेस, अहमदाबाद-पटना, पुणे-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का भी यही हाल है। इतना ही नहीं रक्षा बंधन मनाने के लिए लोग अगर किसी तरह से इलाहाबाद आ भी गए तो उनके लिए वापसी की राह मुश्किल हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पर्व के बाद की तिथियों में विभिन्न रूटों की किसी भी ट्रेन में जगह नहीं बची है।
विज्ञापन
पर्व के आसपास की तिथियों में ट्रेनों में भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में यात्री रेलवे की तत्काल सेवा का लाभ उठा सकते हैं। - अमित मालवीय, पीआरओ, एनसीआर।
विज्ञापन
रक्षा बंधन का पर्व इस बार बृहस्पतिवार 18 अगस्त को है। त्योहार के पूर्व राजधानी दिल्ली से आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ कुछ ज्यादा ही है। शायद इसी वजह से पर्व के पूर्व 16 एवं 17 अगस्त को दिल्ली से इलाहाबाद आने वाली ट्रेनों में सर्वाधिक भीड़ है। वीआईपी ट्रेन 12418 प्रयागराज की बात करें तो इसकी स्लीपर श्रेणी में 17 अगस्त को प्रतीक्षा सूची अभी से ही 150 के आंकड़े को पार कर गई है। इसके थर्ड एसी श्रेणी में भी 17 अगस्त को प्रतीक्षा सूची 50 को पार कर गई है। एक दिन पहले 16 अगस्त को भी प्रयागराज की सभी श्रेणियों में प्रतीक्षा सूची है। नई दिल्ली से पुरी जाने वाली 12802 पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में 17 अगस्त को 120 एवं थर्ड एसी में प्रतीक्षा सूची 75 हो गई है।
विज्ञापन
दिल्ली से आने वाली महाबोधि एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस, रीवां एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी आदि ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची काफी लंबी हो गई। कमोवेश यही स्थिति मुंबई से आने वाली ट्रेनों की भी है। मुंबई से इलाहाबाद आने वाली गाड़ी संख्या 12322 मुंबई मेल, 15017 काशी एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में यात्रियों की लंबी प्रतीक्षा सूची है। पर्व के पहले चेन्नई से इलाहाबाद आने वाली गंगा कावेरी, रामेश्वरम एक्सप्रेस, बंगलूरू से इलाहाबाद आने वाली संघमित्रा एक्सप्रेस, अहमदाबाद-इलाहाबाद एक्सप्रेस, अहमदाबाद-पटना, पुणे-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस का भी यही हाल है। इतना ही नहीं रक्षा बंधन मनाने के लिए लोग अगर किसी तरह से इलाहाबाद आ भी गए तो उनके लिए वापसी की राह मुश्किल हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पर्व के बाद की तिथियों में विभिन्न रूटों की किसी भी ट्रेन में जगह नहीं बची है।
विज्ञापन
पर्व के आसपास की तिथियों में ट्रेनों में भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में यात्री रेलवे की तत्काल सेवा का लाभ उठा सकते हैं। - अमित मालवीय, पीआरओ, एनसीआर।