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इलाहाबाद विश्वविद्यालय का तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स अमान्य
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:39 AM IST
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एक समय में पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय की विधि स्नातक की तीन वर्षीय डिग्री अमान्य है, क्योंकि विश्वविद्यालय को वर्ष 2010-11 से कोर्स के संचालन हेतु बार कौंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता नहीं मिली है। इससे उन हजारों लोगों की डिग्रियां खतरे में पड़ गई हैं जिन्होंने 2010 या उसके बाद एलएलबी किया है। जो लोग इस डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे हैं उनको भी मुश्किल हो सकती है। यह चौंकाने वाली जानकारी हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई। फिलहाल हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को बार कौंसिल के समक्ष मान्यता के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और यदि इसका तत्काल निराकरण नहीं किया जाता है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। कोर्ट ने कुलपति को निर्देश दिया है कि जब तक बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता नहीं मिल जाती है, विश्वविद्यालय एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम की पढ़ाई बंद कर दे। कोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया से भी कहा है कि विश्वविद्यालय को मान्यता देने पर आठ सप्ताह में नियमानुसार निर्णय ले।
मामले के अनुसार इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वर्ष 2015 में एलएलबी की डिग्री लेने वाले देवनाथ कुमार ने बिहार बार कौंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। बार कौंसिल ने उसका आवेदन यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वर्ष 2010-11 के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्री को मान्यता नहीं है, इस स्थिति में डिग्री अमान्य है इसलिए उसका पंजीकरण नहीं किया जा सकता है। देवनाथ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उसके वकील जीएस मिश्र का कहना था कि याची ने इलाहाबाद डिग्री कालेज से एलएलबी किया है, जो विश्वविद्यालय का संगठक कॉलेज है। कोर्ट का कहना था कि जब कोर्स को मान्यता ही नहीं है तो यह भयावह स्थिति है। इससे हजारों लोगों का भविष्य दांव पर लग सकता है। विश्वविद्यालय को इस गलती को सुधारने का निर्देश दिया है।
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मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और यदि इसका तत्काल निराकरण नहीं किया जाता है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। कोर्ट ने कुलपति को निर्देश दिया है कि जब तक बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता नहीं मिल जाती है, विश्वविद्यालय एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम की पढ़ाई बंद कर दे। कोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया से भी कहा है कि विश्वविद्यालय को मान्यता देने पर आठ सप्ताह में नियमानुसार निर्णय ले।
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मामले के अनुसार इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वर्ष 2015 में एलएलबी की डिग्री लेने वाले देवनाथ कुमार ने बिहार बार कौंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। बार कौंसिल ने उसका आवेदन यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वर्ष 2010-11 के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्री को मान्यता नहीं है, इस स्थिति में डिग्री अमान्य है इसलिए उसका पंजीकरण नहीं किया जा सकता है। देवनाथ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उसके वकील जीएस मिश्र का कहना था कि याची ने इलाहाबाद डिग्री कालेज से एलएलबी किया है, जो विश्वविद्यालय का संगठक कॉलेज है। कोर्ट का कहना था कि जब कोर्स को मान्यता ही नहीं है तो यह भयावह स्थिति है। इससे हजारों लोगों का भविष्य दांव पर लग सकता है। विश्वविद्यालय को इस गलती को सुधारने का निर्देश दिया है।
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