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विभागीय जांच के अभाव में पारित निलंबन आदेश वैध नहीं : हाइकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच के अभाव में कर्मचारी के खिलाफ पारित निलंबन आदेश वैध नहीं हो सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम सहारनपुर में तैनात अधिशाषी अभियंता धर्मेंद्र कुमार व अन्य की ओर से निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया है।
अधिवक्ता प्रणेश मिश्रा ने बताया कि याची धर्मेंद्र के साथ उसी कार्यालय के भंडारण गृह में तैनात कार्यकारी सहायक कौशल गोस्वामी और लेखाधिकारी आदित्य चौधरी को भंडारण गृह की बीमा का नवीनीकरण समय से न कराने पर 18 जनवरी को निलंबित कर दिया गया था। जिस वक्त पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मेरठ के प्रबंध निदेशक की ओर से निलंबन आदेश तो पारित किया गया, उस वक्त इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की गई थी।
लिहाजा याचियों ने विभागीय जांच के अभाव में पारित निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद याचिका लंबित रहने के दौरान विभाग में तीनों याचियों के खिलाफ आरोप पत्र निर्गत कर जांच की कार्यवाही शुरू कर दी।
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कोर्ट ने सरकारी सेवकों के लिए अनुशासनिक कार्यवाही के नियम 4(1), हाईकोर्ट द्वारा मीरा तिवारी और मुंशी लाल के मामलो में निर्धारित विधि व्यवस्था के आलोक में याचियों के खिलाफ पारित निलंबन आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने विभाग को याचियों के खिलाफ नियमानुसार नए सिरे से विभागीय जांच पूरी करने की इजाजत दी है।
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अधिवक्ता प्रणेश मिश्रा ने बताया कि याची धर्मेंद्र के साथ उसी कार्यालय के भंडारण गृह में तैनात कार्यकारी सहायक कौशल गोस्वामी और लेखाधिकारी आदित्य चौधरी को भंडारण गृह की बीमा का नवीनीकरण समय से न कराने पर 18 जनवरी को निलंबित कर दिया गया था। जिस वक्त पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम मेरठ के प्रबंध निदेशक की ओर से निलंबन आदेश तो पारित किया गया, उस वक्त इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की गई थी।
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लिहाजा याचियों ने विभागीय जांच के अभाव में पारित निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद याचिका लंबित रहने के दौरान विभाग में तीनों याचियों के खिलाफ आरोप पत्र निर्गत कर जांच की कार्यवाही शुरू कर दी।
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कोर्ट ने सरकारी सेवकों के लिए अनुशासनिक कार्यवाही के नियम 4(1), हाईकोर्ट द्वारा मीरा तिवारी और मुंशी लाल के मामलो में निर्धारित विधि व्यवस्था के आलोक में याचियों के खिलाफ पारित निलंबन आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने विभाग को याचियों के खिलाफ नियमानुसार नए सिरे से विभागीय जांच पूरी करने की इजाजत दी है।