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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The staging of 'Tare Tare Na Lekh' Nautanki thrilled the audience, the vocal waves of Purvi-Chhaprahiya-Birha

NCZCC : टारे टरे न लेख नौटंकी मंचन ने दर्शकों को किया रोमांचित, पूर्वी-छपरहिया-बिरहा की स्वर लहरियों ने रिझाया

Sat, 10 Aug 2024 12:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 10 Aug 2024 12:59 PM IST
सार

गेय प्रधान इस नौटंकी को देखने के लिए बारिश के बावजूद समय से पहले ही प्रेक्षागृह की कुर्सियां दर्शकों से खचाखच भर गईं। शुरुआत हुई सुग्गी-सुग्गा और मेढकी के संगम स्नान की कामना से। लोक संगीत, लोक गीत एवं लोक नाट्य के इस समागम में कई पुटों का समावेश था। बिरहा से लेकर रामलीला तक की गायकी ने इस नौटंकी को खास बना दिया।

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The staging of 'Tare Tare Na Lekh' Nautanki thrilled the audience, the vocal waves of Purvi-Chhaprahiya-Birha
एनसीजेडसीसी में टारे न टरे लेख का नाट्य मंचन किया गया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्वी, छपरहिया, बेलवरिया जैसी लोक गायन शैलियों के लालित्य से शुक्रवार की शाम टारे टरे न लेख नौटंकी यादगार बन गई। लोक कला के साथ संगीत का अनूठा समन्वय देखते बना। रंग भाषा और वस्त्र विन्यास ने लोक स्वरों को हमेशा के लिए जेहनोदिल में यादगार बना दिया। नौटंकी महोत्सव के तहत टारे न टरे लेख का मंचन एनसीजेडसीसी के प्रेक्षागृह में स्वर्ग रंग मंडल की ओर से शाम छह बजे आरंभ हुआ।

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गेय प्रधान इस नौटंकी को देखने के लिए बारिश के बावजूद समय से पहले ही प्रेक्षागृह की कुर्सियां दर्शकों से खचाखच भर गईं। शुरुआत हुई सुग्गी-सुग्गा और मेढकी के संगम स्नान की कामना से। लोक संगीत, लोक गीत एवं लोक नाट्य के इस समागम में कई पुटों का समावेश था। बिरहा से लेकर रामलीला तक की गायकी ने इस नौटंकी को खास बना दिया।

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The staging of 'Tare Tare Na Lekh' Nautanki thrilled the audience, the vocal waves of Purvi-Chhaprahiya-Birha
एनसीजेडसीसी में टारे न टरे लेख का नाट्य मंच किया गया। - फोटो : अमर उजाला।

टारे-टरे न लेख के जरिए संदेश दिया गया कि समय बदले या जन्म-जन्मान्तर, लेकिन विधि का विधान नहीं बदला जा सकता। सुग्गा -सुग्गी के संगम स्नान से शुरू हुई कहानी श्रवण कुमार की लोकगाथा में परिवर्तित होकर राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने तक दर्शकों को रोमांचित करती रही। इस प्रस्तुति में सूत्रधारों की भूमिका में कंचन लाल यादव, अभयराज यादव एवं मनोज कुमार ने कहानी को बड़े ही सलीके से पेश किया।

साथ ही सुग्गा देशराज पटारिया, सुग्गी अशोक कुमार रसिया, उद्यान ऋषि रामसूरत पायल, मेढक के रूप में ज्ञानेंद्र गौतम का अभिनय सराहा गया। चंद्रकला के रूप में कुमारी सोनी, श्रवण कुमार के रूप में नीरज अग्रवाल ने बेजोड़ अभिनय किया। गीत रामसिंह यादव के थे और नाट्य लेखन राजकुमार श्रीवास्तव ने किया था। लोक नाट्यविद अतुल यदुवंशी के इस नाट्य निर्देशन को खूब सराहना मिली।

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