गंगा में कटान का दायरा बढ़ा, माघ मेले की तैयारियों पर असर
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माघ मेले की देर से शुरू हुई तैयारियों के बीच गंगा में कटान का दायरा बढ़ने लगा है। प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं में से एक खाक चौक की कई बीघे भूमि कटान में बह गई है। संगम के अलावा महावीर मार्ग, रामघाट और काली घाट पर कटान से दलदल बढ़ने लगा है। इससे पांटून पुलों के निर्माण में दिक्कत आने की आशंका है। ऐसा हुआ तो कम समय में माघ मेला बसाने में मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
गंगा में प्रवाह बढ़ने से माघ मेला बसने के पहले ही कटान शुरू हो गई है। 538 हेक्टेयर में बसने वाले इस मेले को बसाने के लिए अभी तक बुनियादी सुविधाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है। दो महीने से अधिक पिछड़ चुकी मेले की तैयारियों के लिए यह शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि पिछले हफ्ते भर से गंगा में प्रवाह बढ़ने की वजह से यह नौबत आई है।
इससे रामघाट से संगम के बीच अब तक 20 मीटर से अधिक कटान बड़ चुकी है। महावीर मार्ग पर जहां पांटून पुल को दो दिन बाद निर्माण आरंभ होगा, वहां सबसे अधिक कटान हो रही है। इस बीच सिंचाई बाढ़ खंड के अभियंताओं ने कटान रोकने के लिए बालू की बोरियां रखवाने के साथ ही कच्चे घाटों को पैक करवाने में जुट गए हैं। लेकिन स्थिति जस की तस है। सोमवार को तेज प्रवाह की वजह से गंगा के दोनों किनारों पर कटान होती रही। इससे सबसे अधिक दिक्कत पीडब्ल्यूडी के सामने आने वाली है। इसलिए कि दो दिन बाद ही गंगा पर पांच पांचून पुलों के निर्माण का काम शुरू होगा।