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Prayagraj : मंत्री नंदी के घर के बगल का विद्यालय, इंटर में एक और हाईस्कूल में तीन बच्चे पढ़ते मिले

Sat, 27 Jul 2024 06:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 27 Jul 2024 06:11 PM IST
सार

मंत्री नंदी ने भी यहीं पर पढ़ाई की थी, लेकिन माैके पर साै बच्चे भी नहीं मिले। वैसे नामांकन 307 बच्चों का बताया गया। अभी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। पांच अगस्त तक प्रवेश लिया जा सकेगा। आजादी से पहले 1934 में हिंदी और संस्कृत की पढ़ाई के लिए बहादुरगंज में सरयू पारीय इंटर काॅलेज की शुरुआत हुई थी।

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The school next to Minister Nandi's house, one child was found studying in intermediate and three in high scho
एक छात्र को अर्थशास्त्र पढ़ाते शिक्षक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश के औद्योगिक विकास, निर्यात, एनआरआई और निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंदगाेपाल मंत्री के घर के बगल में 90 वर्ष पुराना सर्वार्य इंटर काॅलेज है। इस विद्यालय में शुक्रवार को इंटरमीडिएट की कक्षा में एक बच्चा, हाईस्कूल में तीन बच्चे, सातवीं में तीन, आठवीं में चार और प्राइमरी की पांच कक्षाओं के नाै बच्चे एक ही कमरे में पढ़ते मिले। शहर की घनी आबादी और सेठों के मोहल्ले वाले इस विद्यालय में कभी डेढ़ हजार बच्चे पढ़ते थे।

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मंत्री नंदी ने भी यहीं पर पढ़ाई की थी, लेकिन माैके पर साै बच्चे भी नहीं मिले। वैसे नामांकन 307 बच्चों का बताया गया। अभी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। पांच अगस्त तक प्रवेश लिया जा सकेगा। आजादी से पहले 1934 में हिंदी और संस्कृत की पढ़ाई के लिए बहादुरगंज में सरयू पारीय इंटर काॅलेज की शुरुआत हुई थी। सत्तर के दशक में जाति और धर्म के नाम से चल रहे विद्यालयों के नाम बदले गए। तब यह सर्वार्य डिग्री काॅलेज हो गया। बाद में संस्कृत महाविद्यालय को इस परिसर से अलग कर दिया गया तो अब सर्वार्य इंटर काॅलेज रह गया।
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गलियों से होकर विद्यालय में पहुंचे तो बच्चों की चहल पहल कम थी। शिक्षक कक्ष में कई शिक्षक आपस की चर्चा में मशगूल थे। दो मंजिला भवन के कुछ कमरे बंद थे। जो खुले थे, उसमें बच्चे बहुत कम। इंटरमीडिएट की कक्षा में एक बच्चे को शिक्षक अर्थशास्त्र पढ़ा रहे थे। अन्य कक्षाओं में तीन-चार बच्चे थे। इतने कम बच्चे हैं और अगर शिक्षक इनको ट्यूशन की तरह पढ़ाए तो वह टाॅपर हो जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वर्षाें से यहां का कोई बच्चा यूपी बोर्ड की टाॅपर सूची में स्थान नहीं बना पाया।

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अपनी जगह लगाए हैं दूसरे शिक्षक

हाईस्कूल के तीन बच्चों को आशीष यादव पढ़ा रहे थे, वह स्थायी शिक्षक नहीं हैं। वह अंग्रेजी के शिक्षक डाॅ. रुद्र प्रताप वशिष्ट की जगह पढ़ा रहे हैं। बताया गया कि डाॅ. रुद्र प्रताप कंपार्टमेंट परीक्षा की काॅपियां जांचने गए हैं। ऐसे ही कक्षा सात में प्रिंसी समाजशास्त्र के शिक्षक आलोक मणि पांडेय की जगह तीन बच्चों को पढ़ा रहीं थीं। कला के शिक्षक लक्ष्मी नारायण ने कविता को अपनी स्थान पर पढ़ाने के लिए रखा है। प्राइमरी के बच्चों को खेल शिक्षक अंकित जायसवाल पढ़ा रहे थे। प्रधानाचार्य मुरार जी त्रिपाठी ने बताया कि प्राइमरी में शिक्षक नहीं हैं। इसलिए इन शिक्षकों को रखा गया है। इनको अभिभावक शिक्षक संघ से वेतन दिया जा रहा है।

सरप्लस हैं शिक्षक

यहां पर सहायक अध्यापक के स्वीकृत पद 14 थे और 10 तैनात हैं। बच्चों की संख्या कम हुई तो स्वीकृत पद अब आठ कर दिए गए। दो शिक्षक सरप्लस हो गए। प्रवक्ता के आठ स्वीकृत पदों के सापेक्ष सात तैनात हैं। एक पद खाली है लेकिन उस विषय के बच्चे वर्षों से नहीं हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि शिक्षकों की लापरवाही से स्कूल की यह गति हुई है। गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई न होने के कारण आसपास के लोग अपने बच्चों का प्रवेश नहीं करवाते हैं।

खराब हो गया लाखों का वाटर कूलर

विद्यालय में पानी के संकट को देखते हुए अनुदान से मिली धनराशि से वाटर कूलर लगवाया गया। लेकिन वह कुछ दिन बाद ही खराब हो गया। प्रदेश सरकार की योजना से विद्यालय में कंप्यूटर लैब बनाई गई। दर्जनभर से अधिक कंप्यूटर लगाए गए लेकिन यह लैब कम ही खुलती है। ऐसे ही पुस्तकालय व्यवस्थित है लेकिन बच्चों का संकट है।

पूर्व छात्र रहे मंत्री नंदी और केशरी नाथ त्रिपाठी

कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने इसी विद्यालय से पढ़ाई की है। कई राज्यों के राज्यपाल रहे केशरी नाथ त्रिपाठी भी यहां के पूर्व छात्र थे। ज्ञानपुर राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य चंद्र विनय चतुर्वेदी समेत यहां के कई पुरा छात्र प्रतिष्ठित पदों पर रहे।

आरएसएस के प्रांत प्रचारक हैं प्रिंसिपल

विद्यालय के प्रधानाचार्य मुरार जी त्रिपाठी आरएसएस के प्रांत प्रचारक हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों की संख्या कम है। इसलिए दो सहायक अध्यापक सरप्लस की श्रेणी में आ गए हैं। फिलहाल बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए डोर- टू- डोर सर्वे किया जा रहा है। अब तक 307 बच्चों का पंजीकरण हो चुका है और कुछ दिनों में चार साै तक संख्या पहुंच जाएगी। बताया कि बारिश के कारण आज बच्चे कम आए हैं।

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