प्रयागराज : कुंभ में जिन सफाई कर्मियों के पीएम ने पखारे थे पांव, उनकी जिंदगी अब भी बदहाल, पर नहीं छोड़ी है मोदी से आस
तीन साल पहले इसी संगम तट पर कुछ देर के लिए ही सही, पीएम के करीब आकर इन सफाई कर्मियों की जिंदगी में उजाले का दीया जलने की आस जग गई थी, लेकिन बदलाव की राह देखते उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ 2019 में जिन पांच सफाई कर्मियों के पांव पखारे थे, उनकी जिंदगी तीन साल में रत्ती भर नहीं बदल सकी है। चाहे बच्चों की पढ़ाई की चिंता हो या नौकरी की, अफसरों की चौखट पर उन्हें हर जगह निराशा ही हाथ लगी है, लेकिन बावजूद इसके उन स्वच्छता के प्रहरियों को मोदी से ही आस भी बंधी है। उन्हें अब भी उम्मीद है कि पीएम मोदी ही उनके दुख हरेंगे, बस एक बार उनके कानों तक उनकी पीड़ा पहुंच भर जाए।
तीन साल पहले इसी संगम तट पर कुछ देर के लिए ही सही, पीएम के करीब आकर इन सफाई कर्मियों की जिंदगी में उजाले का दीया जलने की आस जग गई थी, लेकिन बदलाव की राह देखते उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हालत यह है कि बच्चों की पढ़ाई और बेहतर ढंग से परवरिश तो दूर, सड़कों पर झाड़ू लगाने के एवज में उनको महीने की पगार भी समय से नहीं मिल पा रही है।
कई सफाईकर्मी अब भी रह रहे टेंट में
कुंभ के दौरान संगम पर पांच सफाई कर्मियों के पांव पखारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पटल पर मानवता का संदेश दिया था। 21 दिसंबर को पीएम एकबार फिर उसी संगम तट स्थित परेड मैदान में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करने आ रहे हैं। पीएम के आने की आहट उन सफाईकर्मियों की अस्थाई झोपड़ियों तक तब पहुंची, जब सीएम योगी शनिवार को तैयारियों का जायजा लेने संगम पहुंचे।
पीएम ने जिन पांच सफाई कमियों के पांव पखारे थे, उनमें से तीन कर्मी प्यारे लाल, नरेश कुमार चमके और ज्योति देवी उसी संगम के पास टेंट लगाकर जिंदगी बसर कर रहे हैं। जबकि,होरी लाल और चौबी देवी बांदा जिले के बबेरू स्थित अपने गांव चले गए हैं। पीएम के आगमन की जानकारी मिलने के बाद से सफाईकर्मी प्यारे लाल की आंखों में उम्मीद की किरण एक बार फिर जग गई है।
तीन हजार तक भी नहीं मिलती पगार
उसका कहना है कि एक बार कोई मंच तक ले जाकर उसे पीएम से मिलवा भर दे, ताकि वह अपनी पीड़ा उन तक पहुंचा सके। प्यारे लाल का कहना है कि संगम क्षेत्र में झाड़ू लगाने के एवज में कभी तीन हजार तो कभी पांच हजार रुपये दिहाड़ी के रूप में दिए जा रहे हैं। तीन-तीन महीने तक पगार नहीं मिल रही है। इससे परिवार की जीविका चलाना मुश्किल हो गया है। इसी तरह नरेश कुमार चमके भी पीएम के आगे अपनी बात कहना चाहता है।
चमके ने अमर उजाला को बताया कि कुंभ-2019 के दौरान 10 हजार रुपये महीने पारिश्रमिक मिलता था। अब आठ हजार रुपये मिलने लगा है। बच्चों की पढ़ाई के लिए वादे किए गए थे। हमने डीएम, एसडीएम से लेकर मेलाधिकारी तक दौड़ लगाई, लेकिन किसी ने फरियाद नहीं सुनी।