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नैनी जेल में फांसी लगाने वाले कैदी ने लिखा- जितेंद्र मौर्य के कारण जान दे रहा हूं, उसने हमें ठगा है
Thu, 12 Nov 2020 10:35 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 12 Nov 2020 10:35 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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जीतेंद्र मौर्या निवासी सरायगोपाल, भदरी, सोरांव, प्रयागराज के चक्कर में हमारा यह हाल हो गया। उसने धोखाधड़ी की है, ठगा है। जिससे बहुत परेशान हो गया हूं और अपनी जान देने जा रहा हू। इसमें जेल प्रशासन का कोई अधिकारी जिम्मेदार नहीं है। यह बातें बुधवार की रात नैनी सेंट्रल जेल के अंदर फांसी लगाने वाले विचाराधीन कैदी नीरज मौर्या (26) निवासी लखनपुर, नवाबगंज के सुसाइड नोट में लिखा होने का दावा जेल प्रशासन की ओर से किया जा रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि जिस सुसाइड नोट के मिलने की बात जेल प्रशासन कर रहा है, उसका जिक्र न तो एफआईआर में किया गया है और न ही पंचनामा में ही उसे नत्थी किया गया है। जेल के अधिकारियों की तरफ से वह सुसाइड नोट मृत कैदी के घरवालों को दे दिया गया है। जिससे सुसाइड नोट की सत्यता पर सवाल उठने लगे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि 23 अप्रैल 2017 की रात नवाबगंज के जूड़ापुर गांव में मक्खन लाल गुप्ता (50) व उसकी पत्नी मीरा गुप्ता (45) के अलावा दो बेटियों की नृशंस हत्या हो गई थी। जिसमें नीरज मौर्या, मोहित पाल, प्रदीप पटेल और सत्येंद्र पटेल को मुख्य आरोपी बनाया गया था। जानकारी के अनुसार नीरज मौर्या के मुकदमे की पैरवी उसका रिश्तेदार जितेंद्र मौर्या निवासी सराय गोपाल भदरी, सोरांव कर रहा था। चूंकि जीतेंद्र मौर्या भी आपराधिक प्रवृत्ति का है और नैनी सेंट्रल जेल में रह चुका है।
इसलिए नीरज मौर्या और उसके घरवाले जितेंद्र मौर्या पर भरोसा कर रहे थे। जेल प्रशासन की माने तो जितेंद्र मौर्या दिलीप और उसके परिवार के साथ धोखा कर रहा था। पैसे लेकर अपना काम कर रहा था, जिसकी वजह से उसकी बेल नहीं हो पा रही थी। इसी को लेकर वह बहुत परेशान था। उसी परेशानी में उसने बुधवार की रात में बैरक चार में स्थित फिनायल गोदाम के पीछे पेड़ों की डाल पर गमछे के सहारे झूल गया था।
उसे एसआरएन अस्पताल ले जाया गया था। जहां इलाज के दौरान देररात उसकी मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया था। बृहस्पतिवार को उसके घरवाले चीरघर पहुंचे तो वहां परिजनों ने सवाल उठाया कि आखिर जब नीरज मौर्या कैदी था, तो उसे कागज पेन कहां से मिला। परिजनों का यह सवाल अभी निरुत्तर है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने जीतेंद्र मौर्या के खिलाफ आरोप लगाया है।
इसलिए नीरज मौर्या और उसके घरवाले जितेंद्र मौर्या पर भरोसा कर रहे थे। जेल प्रशासन की माने तो जितेंद्र मौर्या दिलीप और उसके परिवार के साथ धोखा कर रहा था। पैसे लेकर अपना काम कर रहा था, जिसकी वजह से उसकी बेल नहीं हो पा रही थी। इसी को लेकर वह बहुत परेशान था। उसी परेशानी में उसने बुधवार की रात में बैरक चार में स्थित फिनायल गोदाम के पीछे पेड़ों की डाल पर गमछे के सहारे झूल गया था।
उसे एसआरएन अस्पताल ले जाया गया था। जहां इलाज के दौरान देररात उसकी मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया था। बृहस्पतिवार को उसके घरवाले चीरघर पहुंचे तो वहां परिजनों ने सवाल उठाया कि आखिर जब नीरज मौर्या कैदी था, तो उसे कागज पेन कहां से मिला। परिजनों का यह सवाल अभी निरुत्तर है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने जीतेंद्र मौर्या के खिलाफ आरोप लगाया है।