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उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के नए अध्यक्ष ने संभाला कार्यभार
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Feb 2018 11:48 PM IST
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उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेव आयोग के नए अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने बुधवार को कार्यभार संभाल लिया। उनके साथ ही आयोग की सदस्य डॉ. रजनी त्रिपाठी ने भी नई जिम्मेदारी संभाली। अध्यक्ष एवं सभी चारों सदस्यों के ज्वाइन किए जाने के बाद आयोग में कोरम अब पूरा हो गया है। आयोग के दो अन्य सदस्य पिछली सरकार के कार्यकाल से ही तैनात हैं। कोरम पूरा होने के बाद आयोग की अगले सप्ताह बैठक होने जा रही है, जिसमें महीनों से लंबित पड़ी भर्ती परीक्षाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
आयोग के तीन सदस्यों डॉ. हरबंश सिंह, डॉ. कृष्ण कुमार और प्रो. शेर बहादुर सिंह ने पांच फरवरी को ही कार्यभार ग्रहण कर लिया था। चौथी सदस्य डॉ. रजनी त्रिपाठी ने प्रयाग महिला विद्यापीठ के प्राचार्य पद से अवकाश के लिए आवेदन कर रखा था। बुधवार को उन्होंने भी ज्वाइन कर लिया और साथ ही अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भी कार्यभार संभाल लिया। मूलत: महराजगंज के रहने वाले प्रो. विश्वकर्मा ने बारहवीं तक की आरंभिक शिक्षक वहीं से ग्रहण की।
इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से 1976 में बीए और 1978 में एमए किया। फिर 1982 में बीएचयू से पीएचडी पूरी की और पोस्ट डॉक्टोरल फैलोशिप की। बरकत उल्ला विश्वविद्यालय भोपाल से संबद्ध प्राच्य निकेतन में भी तैनात रहे। 1998 में गोरखपुर विश्वविद्यालय में बतौर रीडर ज्वाइन किया और 2006 में प्रमोशन पाकर प्राचार्य बने। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संस्था आईसीएचआर में 2015 से सदस्य हैं। उन्होंने ही पहली बार संस्था की शोध पत्रिका का हिंदी में प्रकाशन कराया।
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‘इतिहास’ नाम की इस शोध पत्रिका के वह कार्यकारी संपादक हैं और अब तक इसके चार अंक प्रकाशित किए जा चुके हैं। इसके अलावा वह संस्कृति मंत्रालय के तहत राजा राममोहन राय पुस्तकालय, कोलकाता में अनुदान समिति के भी सदस्य हैं। उन्हें वर्ष 2020 तक के लिए सदस्य नामित किया गया है। इसके अलावा वह इतिहासकारों की अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के महासचिव भी हैं। साथ ही प्रदेश सरकार के संस्कृत संस्थान के कार्यकारणी सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि उच्चत शिक्षा सेवा आयोग की भर्तियों में पारदर्शिता ही उनकी प्राथमिकता है।
प्रतियोगियों ने भी किया स्वागत
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के नए अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा के कार्यभार संभालने के बाद प्रतियोगियों एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग में जाकर उन्हें गुलदस्ता भेंट करते हुए स्वागत किया। प्रतियोगियों ने अध्यक्ष से मांग की कि विज्ञापन संख्या 46 के तहत अशासकीय कॉलेज में लंबित पड़ी भर्ती को तत्काल पूरा किया जाए। इसके अलावा विज्ञापन संख्या 47 के तहत शिक्षक भर्ती परीक्षा और विज्ञापन संख्या 48 के तहत प्राचार्य पदों पर चयन की प्रक्रिया भी समय से पूरी की जाए। अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि जल्द ही इन पर निर्णय लिया जाएगा।
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आयोग के तीन सदस्यों डॉ. हरबंश सिंह, डॉ. कृष्ण कुमार और प्रो. शेर बहादुर सिंह ने पांच फरवरी को ही कार्यभार ग्रहण कर लिया था। चौथी सदस्य डॉ. रजनी त्रिपाठी ने प्रयाग महिला विद्यापीठ के प्राचार्य पद से अवकाश के लिए आवेदन कर रखा था। बुधवार को उन्होंने भी ज्वाइन कर लिया और साथ ही अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भी कार्यभार संभाल लिया। मूलत: महराजगंज के रहने वाले प्रो. विश्वकर्मा ने बारहवीं तक की आरंभिक शिक्षक वहीं से ग्रहण की।
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इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से 1976 में बीए और 1978 में एमए किया। फिर 1982 में बीएचयू से पीएचडी पूरी की और पोस्ट डॉक्टोरल फैलोशिप की। बरकत उल्ला विश्वविद्यालय भोपाल से संबद्ध प्राच्य निकेतन में भी तैनात रहे। 1998 में गोरखपुर विश्वविद्यालय में बतौर रीडर ज्वाइन किया और 2006 में प्रमोशन पाकर प्राचार्य बने। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संस्था आईसीएचआर में 2015 से सदस्य हैं। उन्होंने ही पहली बार संस्था की शोध पत्रिका का हिंदी में प्रकाशन कराया।
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‘इतिहास’ नाम की इस शोध पत्रिका के वह कार्यकारी संपादक हैं और अब तक इसके चार अंक प्रकाशित किए जा चुके हैं। इसके अलावा वह संस्कृति मंत्रालय के तहत राजा राममोहन राय पुस्तकालय, कोलकाता में अनुदान समिति के भी सदस्य हैं। उन्हें वर्ष 2020 तक के लिए सदस्य नामित किया गया है। इसके अलावा वह इतिहासकारों की अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के महासचिव भी हैं। साथ ही प्रदेश सरकार के संस्कृत संस्थान के कार्यकारणी सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि उच्चत शिक्षा सेवा आयोग की भर्तियों में पारदर्शिता ही उनकी प्राथमिकता है।
प्रतियोगियों ने भी किया स्वागत
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के नए अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा के कार्यभार संभालने के बाद प्रतियोगियों एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग में जाकर उन्हें गुलदस्ता भेंट करते हुए स्वागत किया। प्रतियोगियों ने अध्यक्ष से मांग की कि विज्ञापन संख्या 46 के तहत अशासकीय कॉलेज में लंबित पड़ी भर्ती को तत्काल पूरा किया जाए। इसके अलावा विज्ञापन संख्या 47 के तहत शिक्षक भर्ती परीक्षा और विज्ञापन संख्या 48 के तहत प्राचार्य पदों पर चयन की प्रक्रिया भी समय से पूरी की जाए। अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि जल्द ही इन पर निर्णय लिया जाएगा।