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Prayagraj News: जज ने खारिज की अपील, फिर बुलाकर दोबारा सुनी बहस और कर दिया बरी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नजरुल इस्लाम जाफरी ने अपनी 36 वर्षों की वकालत के अनुभव साझा किए। बताया कि एक बार उनकी अपील कोर्ट ने खारिज कर दी थी लेकिन बाद में जज ने फाइल दोबारा पढ़ी और उन्हें वापस बुलाया।
जज ने नई तारीख तय की और दोबारा बहस सुनी। विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपील मंजूर कर ली और आरोपियों को बरी कर दिया। जाफरी ने कहा कि मैंने देखा कि जज न्याय के प्रति कितना समर्पित हैं। उन्हें किसी फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस होती थी तो वे स्वयं दोबारा सुनवाई करते हैं।
उन्होंने एक और अनुभव साझा किया। बताया कि हत्या के मामले में कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी थी लेकिन तकनीकी त्रुटि के कारण अपलोड हुए आदेश में जमानत मंजूर दिखाई गई। जब उन्हें इस गलती की जानकारी मिली तो अगले ही दिन न्यायमूर्ति को अवगत कराया।
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कोर्ट ने हमारी ईमानदारी की सराहना की, गलत आदेश वापस लिया और जमानत निरस्त कर दी। जाफरी ने कहा कि ईमानदारी और सिद्धांतों पर कायम रहना ही एक अधिवक्ता की सबसे बड़ी पहचान है। वहीं, उन्होंने पिता एवं पूर्व न्यायमूर्ति शमसुल इस्लाम जाफरी की सीख को भी याद किया। बताया कि एक दिन वह सुबह 11 बजे ही घर लौट आए थे।
यह देखकर पिता नाराज हो गए और पूछा अभी क्यों लौट आए। हमने कहा, कोर्ट में काम नहीं था। पिताजी ने मुझे तुरंत कोर्ट लौटाया और कहा कि काम रहे या न रहे तुम्हें सुबह 10 से शाम चार बजे तक कोर्ट में ही रहना है। लाइब्रेरी में किताबें पढ़ो या वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बहस सुनो।
उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि वकालत में सफलता के लिए निरंतर अध्ययन, कड़ी मेहनत, वरिष्ठों से सीखने की इच्छा और ईमानदारी सबसे जरूरी है। इन मूल्यों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
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जज ने नई तारीख तय की और दोबारा बहस सुनी। विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपील मंजूर कर ली और आरोपियों को बरी कर दिया। जाफरी ने कहा कि मैंने देखा कि जज न्याय के प्रति कितना समर्पित हैं। उन्हें किसी फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस होती थी तो वे स्वयं दोबारा सुनवाई करते हैं।
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उन्होंने एक और अनुभव साझा किया। बताया कि हत्या के मामले में कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी थी लेकिन तकनीकी त्रुटि के कारण अपलोड हुए आदेश में जमानत मंजूर दिखाई गई। जब उन्हें इस गलती की जानकारी मिली तो अगले ही दिन न्यायमूर्ति को अवगत कराया।
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कोर्ट ने हमारी ईमानदारी की सराहना की, गलत आदेश वापस लिया और जमानत निरस्त कर दी। जाफरी ने कहा कि ईमानदारी और सिद्धांतों पर कायम रहना ही एक अधिवक्ता की सबसे बड़ी पहचान है। वहीं, उन्होंने पिता एवं पूर्व न्यायमूर्ति शमसुल इस्लाम जाफरी की सीख को भी याद किया। बताया कि एक दिन वह सुबह 11 बजे ही घर लौट आए थे।
यह देखकर पिता नाराज हो गए और पूछा अभी क्यों लौट आए। हमने कहा, कोर्ट में काम नहीं था। पिताजी ने मुझे तुरंत कोर्ट लौटाया और कहा कि काम रहे या न रहे तुम्हें सुबह 10 से शाम चार बजे तक कोर्ट में ही रहना है। लाइब्रेरी में किताबें पढ़ो या वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बहस सुनो।
उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि वकालत में सफलता के लिए निरंतर अध्ययन, कड़ी मेहनत, वरिष्ठों से सीखने की इच्छा और ईमानदारी सबसे जरूरी है। इन मूल्यों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।