हाईकोर्ट ने कहा : वारंट, कुर्की नोटिस व कुर्की आदेश एक साथ जारी नहीं कर सकते
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वारंट, कुर्की नोटिस व कुर्की आदेश एक साथ जारी नहीं किए जा सकते। वारंट जारी होने के बाद आरोपी के फरार रहने और कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर कुर्की नोटिस जारी की जाती है। इसके 30 दिन बाद कुर्की का आदेश पारित किया जाता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वारंट, कुर्की नोटिस व कुर्की आदेश एक साथ जारी नहीं किए जा सकते। वारंट जारी होने के बाद आरोपी के फरार रहने और कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर कुर्की नोटिस जारी की जाती है। इसके 30 दिन बाद कुर्की का आदेश पारित किया जाता है। हालांकि जब यह साबूत हो कि आरोपी अदालत के अधिकार क्षेत्र से संपत्ति को हटाने वाला है, तब अदालत एक साथ कुर्की नोटिस व कुर्की आदेश पारित कर सकता है। यह टिप्पीण करते कोर्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर के घर की कुर्की आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की पीठ ने देवेंद्र सिंह की अर्जी पर दिया।
कानपुर के कल्याणपुर थाने में शिकायतकर्ता महिला ने 2014 में कोर्ट के आदेश से इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह पर दबंगों के साथ घर घुसकर लूटपाट, मारपीठ व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। याची ने इसे रद्द करने के जिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में लंबित मुकदमे की पूरी प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया था। इस दौरान याची के पैरवी न करने पर हाईकोर्ट ने मुकदमे को रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी। इस पर याची ने रिकॉल अर्जी दाखिल की, जो लंबित है। इस दौरान एसीजेएम सप्तम की कोर्ट ने 20 फरवरी 2025 को गैर जमानती वारंट, कुर्की नोटिस व कुर्की के आदेश एक साथ जारी कर दिए। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के अधिवक्ता डीसी द्विवेदी व एसडी द्विवेदी ने दलील दी कि वारंट, कुर्की नोटिस व कुर्की आदेश एक साथ जारी नहीं किए जा सकते। इस आदेश में प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। ऐसे में इसे रद्द किया जाना चाहिए। वहीं अपर शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद विवादित आदेश को रद्द कर दिया।