फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The High Court said- Amazing! There are 78 radiologists in Lucknow, and not even one in many districts

हाईकोर्ट का तंज: हाईकोर्ट ने कहा-गजब! लखनऊ में 78 रेडियाेलॉजिस्ट, कई जिलों में एक भी नहीं

Wed, 23 Apr 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 23 Apr 2025 01:41 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की चिकित्सा जांच में देरी और उत्तर प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती में असमानता पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि गजब हाल है।

विज्ञापन
The High Court said- Amazing! There are 78 radiologists in Lucknow, and not even one in many districts
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की चिकित्सा जांच में देरी और उत्तर प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती में असमानता पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि गजब हाल है, लखनऊ में 78 रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं और बलिया समेत कई जिलों में एक भी नहीं। यह चिकित्सा संसाधनों में भयंकर असंतुलन को दर्शाता है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने प्रकाश कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दाैरान किया है।

विज्ञापन


बलिया के प्रकाश कुमार गुप्ता पर नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज था। ऑसिफिकेशन टेस्ट में पाया गया कि पीड़िता की आयु 19 वर्ष है। इस पर आरोपी को जमानत दे दी गई। इस दौरान न्यायालय ने पाया कि बलिया में कोई भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण पीड़िता को उम्र निर्धारण की जांच के लिए वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल ले जाया गया।
विज्ञापन


यहां रेडियालॉजिस्ट ने जांच करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पीड़िता को आजमगढ़ के अतरौलिया ले जाया गया, जहां जांच हुई। इस दौरान पीड़िता को एक आश्रयगृह में रात बितानी पड़ी। मामले में कोर्ट ने रेडियोलॉजिस्ट, सीएमएस कबीर चौरा को तलब किया था। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से प्रदेश भर में तैनात रेडियोलॉजिस्ट की जानकारी मांगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट के निर्देश पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की, उसमें खुलासा हुआ कि लखनऊ में 78, प्रयागराज में 13 और कानपुर नगर में 14 रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं, जबकि बलिया सहित कई जिलों में एक भी नहीं। कोर्ट ने कहा कि बड़े शहरों को विशेषज्ञों से भर देना और छोटे जिलों को नजरअंदाज कर देना, न केवल नीति विफलता है, बल्कि शहरी झुकाव और तंत्र की कमजोरी का भी प्रमाण है। ऐसी व्यवस्था निचले स्तर पर जनता को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित करती है।


हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि हर मरीज का इलाज करें, चाहे वह किसी भी क्षेत्र का हो। पीड़िता को जगह-जगह भटकाने और परीक्षण से इन्कार की घटनाओं को कोर्ट ने मानवाधिकारों का उल्लंघन माना। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह हर जिले में कम से कम एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति सुनिश्चित करे और विशेषज्ञ डॉक्टरों को केवल चिकित्सकीय कार्यों में लगाए, न कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों में। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार अनुपालन इस आदेश की एक प्रति प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश को भेजेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed