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हाईकोर्ट ने कहा : कंपनी दिवालिया हो गई तो निदेशकों से की जाएगी बकाये बिल की वूसली

Sat, 14 Jan 2023 11:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 14 Jan 2023 11:13 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर की दिवालिया हो चुकी कंपनी मेसर्स त्रिमूर्ति कॉनकास्ट के बकाये विद्युत बिल की वसूली के मामले में निदेशक को राहत देने से इन्कार कर दिया।

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The High Court If the company becomes insolvent, the outstanding bills will be recovered from the direct
हाईकोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर की दिवालिया हो चुकी कंपनी मेसर्स त्रिमूर्ति कॉनकास्ट के बकाये विद्युत बिल की वसूली के मामले में निदेशक को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने निदेशकों को इसका जिम्मेदार मानते हुए कहा है कि अगर बिल बकाया है तो उनसे वूसली की जा सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने नरेंद्र सिंह पनवार की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

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याची की ओर से कहा गया कि कंपनी मेसर्स त्रिमूर्ति कॉनकास्ट दिवालिया हो चुकी है। कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल इलाहाबाद की ओर से इसके लिए बकायदा 22 मार्च 2022 को आदेश भी जारी कर दिया गया था। दिवालिया घोषित होने से पहले ट्रिब्यूनल ने बकाया विद्युत बिल के मामले में समाधान योजना को मंजूरी दे दी थी। 
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इसके बावजूद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से बकाया वसूली के लिए कंपनी के निदेशकाें को नोटिस जारी किया गया, जबकि कंपनी पहले ही दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया में आ चुकी थी। वितरण निगम ने कनेक्शन भी काट दिया है। साथ ही जिला मजिस्ट्रेट को पत्र भेजकर निदेशकों से नौ करोड़ रुपये बकाया बिल की वूसली के लिए कहा गया है। याची ने कहा, कंपनी दिवालिया हो चुकी है। लिहाजा, वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। 
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वहीं पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से पेश अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने कहा, विद्युत वितरण निगम को उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहित-2005 के तहत निदेशक से वसूली का अधिकार है। इस तर्क को देखते हुए कोर्ट ने निदेशक की याचिका को खारिज कर दिया। कहा, विद्युुत वितरण निगम को बकाया वसूली का अधिकार है।

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