शासन ने नगर पंचायत झूंसी का अस्तित्व समाप्त कर दिया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है। नगर पंचायत के निर्वाचित अध्यक्ष और सभासदों का अस्तित्व भी अधिसूचना के साथ ही स्वतः समाप्त हो गया। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सहित यहां के 55 कर्मचारी अब नगर आयुक्त नगर निगम प्रयागराज के अधीन आ गए हैं।
शासन ने समाप्त किया नगर पंचायत झूंसी का अस्तित्व, अधिसूचना जारी
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अध्यक्ष और 17 सभासद हुए अधिकार विहीन
झूंसी नगर पंचायत का चुनाव करीब ढाई वर्ष पहले हुआ था। सीमा विस्तार संबंधी गजट प्रकाशन के बाद इस बारे में विरोध के स्वर मुखर हुए पर साशन स्तर पर सुनवाई नहीं हुई। वैसे भी झूंसी शहर का हिस्सा माना जाता रहा है। वहां पीडीए पहले से ही भवन निर्माण और अवैध निर्माण रोकने की कार्रवाई करा रहा है। झूंसी नगर पंचायत में अध्यक्ष शिल्पी अग्रवाल और 17 सभासद हैं। पहले यहां 12 सभासद होते थे, लेकिन चुनाव से पहले हुए परिसीमन के दौरान हुए सीमा विस्तार में पांच सभासदों की सीटें बढ़ गई थीं।
गृहकर के दायरे में आएंगे हजारों मकान
झंसी नगर पंचायत के विघटित होने के साथ तय हो गया है कि इलाके के हजारों मकान गृहकर के दायरे में आएंगे। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके मिश्रा के मुताबिक आवासीय और व्यावसायिक भवनों का सर्वे कराकर नियमानुसार कर निर्धारण किया जाएगा। गृहकर वसूली के संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा। इससे नगर निगम की आय बढ़ता भी तय है, क्योंकि गृहकर के मद में पिछले वर्ष तक नगर निगम करीब 60 करोड़ रुपये वसूली कर चुका है। जिसमें वृद्धि होगी।
कुंभ के दौरान कराए गए थे काम
झूंसी पंचायत क्षेत्र जो अब नगर निगम का हिस्सा हो गया है, वहां कुंभ के दौरान कई करोड़ रुपये खर्च कर विकास के कार्य कराए गए थे। सर्वाधिक कार्य पीडीए और पीडब्ल्यूडी ने कराए। यहां सड़क चौड़ीकरण के साथ डिवाइडर, चौराहे और बिजली के काम कराकर क्षेत्र को सजाया गया था। कुंभ के दौरान झूंसी मेला क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा रहता है।झूंसी क्षेत्र को योजना बनाकर विकसित किया जाएगा। वहां बिजली, पानी, सड़क, नाली, खड़ंजा के साथ सफाई और स्ट्रीट लाइट की बेहतर
व्यवस्था की जाएगी। पंचायत भवन के बेहतर उपयोग के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। - रवि रंजन, नगर आयुक्त
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