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मेडिकल रिपोर्ट में सामान्यतय: दखल नहीं दे सकती अदालतेंः इलाहाबाद हाईकोर्ट

Fri, 20 Mar 2020 09:45 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Mar 2020 09:45 PM IST
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The courts cannot ordinarily interfere in the medical report: Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी  वैधानिक नियमों के तहत काम कर रहे मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में हस्तक्षेप करने की न्यायालयों की अधिकारिता सीमित सीमित है।
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अदालतों को ऐसे मामलों में पूरी सावधानी और परिस्थितियों पर विचार के बाद ही हस्तक्षेप करना चाहिए। अन्यथा, पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में व्यवधान पड़ सकता है। मोहम्मद अरशद खान की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है।
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 याची 2015 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती में शामिल हुआ था। भर्ती बोर्ड की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड ने उसे फ्लैट फीट के आधार पर अनफिट घोषित कर दिया। इसे उसने हाईकोर्ट हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याची की अलग मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच करवाई। दोबारा गठित बोर्ड ने भी भी याची में वही कमी पाई और उसे अनफिट करार दिया।
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मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को भी अदालत में चुनौती दी गई, जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई। अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ का कहना था कि हालांकि अनुच्छेद- 226 में अदालतों को असीमित अधिकारिता है, मगर मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों में  इसका उपयोग करते समय  परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी पूर्वक ही अधिकारों का उपयोग करना चाहिए।  


भर्ती बोर्ड  की ओर से मेडिकल परीक्षण निर्धारित वैधानिक नियमों के तहत प्रक्रिया को अपनाते हुए कराया जाता है। ऐसे में इसमें हस्तक्षेप करने से पूरी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी। याची की ओर से दाखिल अपील में दोबारा गठित कराए गए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कोई खामी नहीं बताई गई। एकल पीठ के आदेश में भी किसी प्रकार की अवैधानिकता नहीं है। इस स्थिति में अपील को पोषणीय न पाते हुए अदालत ने खारिज कर दिया।
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