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देश का लक्ष्य पूरा, यहां 20 प्रतिशत गेहूं की भी खरीद नहीं

Fri, 29 May 2020 12:15 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2020 12:15 AM IST
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the countrys target is met there is no purchase of 20 percent wheat here
the countrys target is met there is no purchase of 20 percent wheat here
किसानों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। इस बार गेहूं की खरीद की प्रगति काफी धीमी है। मुश्किल यह कि देश में लक्ष्य से भी अधिक गेहूं की खरीद हो गई है। ऐसे में अब यहां राहत की उम्मीदों को झटका लगा है। इसलिए किसान व्यापारियों को गेहूं बेचने के लिए मजबूर हैं।
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बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से काफी फसल बर्बाद हो गई है। जो पैदावार हुई वह भी कमजोर और पतली। इसकी वजह से किसानों के लिए ही फसल पर्याप्त नहीं रही और जो किसान गेहूं बेचने के लिए आगे आए उनके सामने मानक आड़े आ गए। इसकी वजह से जिले में 20 प्रतिशत से भी कम खरीद हो पाई है।
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मानक में छूट के लिए जिला प्रशासन की ओर शासन को पत्र लिखा गया था। यह समस्या प्रदेश के कई हिस्से में हैं। इसलिए शासन की ओर से भी केंद्र को पत्र लिखा गया लेकिन अभी तक मानक में छूट की कोई घोषणा नहीं की गई। इसकी वजह से पूरे प्रदेश में ही गेहूं की प्रगति काफी धीमी है। प्रदेश में 50 लाख मिट्रिक टन लक्ष्य की तुलना में 21 लाख मिट्रिक टन से भी कम गेहूं की खरीद हुई है। वहीं अन्य राज्यों में रिकार्ड खरीद हुई है। इसका नतीजा है कि देश में 341 लाख मिट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार मिट्रिक टन अधिक है। अफसरों का कहना है कि ऐसे में अब केंद्र से मानक को लेकर बहुत राहत की उम्मीद नहीं है। इसके अलावा व्यापारी घर-घर जाकर किसानों से गेहूं खरीद रहे हैं। इसका असर गेहूं खरीद पर पड़ा है।
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मिर्जापुर से लौटा टिड्डी दल लेकिन खतरा बरकरार
टिड्डियों के दल का खतरा अब भी बना हुआ है। झांसी से चला एक दल मिर्जापुर तक पहुंचने के बाद वापस हो गया। इससे राहत जरूर महसूस की जा रही है लेकिन खतरा अब भी खत्म नहीं हुआ है।
जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि टिड्डियों के दो दल पहले से मध्य प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं। झांसी में रुके एक दल के दो टुकड़े करने में सफलता मिली है। उनमें से एक दल मिर्जापुर तक आ गया था लेकिन हवा का रुख बदलने के बाद मध्य प्रदेश की तरफ मुड़ गया है। इससे फिलहाल राहत है लेकिन हवा की दिशा इधर हुई तो उनके आने का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए पूरी तैयारी की गई है।
धान के बीज पर सब्सिडी खत्म करने का विरोध
हाइब्रिड धान के बीज पर प्रदेश की सब्सिडी खत्म करने को लेकर किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि खराब मौसम तथा लाकडाउन की वजह से किसान पहले से परेशान हैं। ऐसे में सब्सिडी खत्म कर देने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। उन्होंने सब्सिडी बहाल न करने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है।
भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) की बृहस्पतिवार को हुई ऑनलाइन पंचायत में हाइब्रिड धान पर सब्सिडी में कटौती का विरोध किया गया। प्रदेश सरंक्षक फूलचंद्र दुबे, प्रदेश महासचिव डॉ.बीके सिंह, राजीव चंदेल आदि का कहना था कि प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया है। इसके विपरीत किसान विरोधी फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने सब्सिडी बहाल करने की मांग की। मांग नहीं माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी। पंचायत में केके मिश्रा, आरएलडी दुबे, श्याम सूरत पांडेय, राजेंद्र तिवारी, हस्मत उल्ला, अविनाश श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।

सपा नेताओं ने भी सब्सिडी खत्म करने का विरोध किया है। निवर्तमान महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। पूर्व प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह ने भाजपा को किसान विरोधी बताया। प्रवक्ता दान बहादुर मधुर ने कहा कि सरकार ने संवेदनहीनता का परिचय दिया है। उन्होंने बिजली बिल माफ करने की भी मांग की। संतलाल वर्मा, सै.मो.अस्करी, आरएन यादव, संदीप यादव, अब्बास नकवी, युवराजसिंह आदि ने भी सब्सिडी खत्म करने की निंदा की।
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