{"_id":"58bdbc284f1c1b5d73dc4666","slug":"the-commission-opened-a-front-against-the-student-victim-of-injustice","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाइंसाफी की शिकार छात्रा ने आयोग के खिलाफ खोला मोर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाइंसाफी की शिकार छात्रा ने आयोग के खिलाफ खोला मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 07 Mar 2017 01:21 AM IST
विज्ञापन
यूपीपीसीएस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाइंसाफी की शिकार पीसीएस-2015 की अभ्यर्थी सुहाषिनी बाजपेयी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के खिलाफ मुखर हो गई हैं। आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को प्रत्यावेदन सौंपने की बात कही। प्रधानमंत्री ने समय दिया तो वह उनसे मिलकर पूरे प्रकरण तथा आयोग की पूर्व की भर्तियों में हुई अनियमितता से अवगत कराएंगी।
पीसीएस-2015 मुख्य परीक्षा में समाजकार्य में सुहाषिनी को पहले फेल कर दिया गया। उन्हें समाजकार्य के एक पेपर में मात्र 47 अंक मिले थे। आरटीई के तहत जब उन्होंने कॉपी देखी तो पता चला कि उनके 88 अंक हैं। खास यह कि पहले उन्हें किसी दूसरे की कॉपी दिखाई गई थी। हालांकि नंबर बढ़ने के बाद उन्हें मुख्य परीक्षा में सफल किया गया और अंतिम परिणाम घोषित होने के तकरीबन एक साल बाद साक्षात्कार लिया गया। हालांकि वह अंतिम रूप से असफल ही रहीं। सोमवार के अंक में अमर उजाला में खबर छपने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और वाराणसी की चुनावी रैली में इस पर चर्चा की।
इस तरह से प्रधानमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद सुहाषिनी ने भी आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि 88 नंबर मिलने की बात भी गलत है। उनका कहना है कि अन्य पेपर में उनके काफी अधिक अंक हैं। पहले भी उन्हें इतने कम अंक नहीं मिले। छह महीने की लगातार दौड़ लगाने के बाद आयोग ने टालने की प्रवृत्ति अपनाई और इस तरह से अलग से साक्षात्कार करा लिया। उनका कहना है कि आयोग की मंशा साफ नहीं है और इंटरव्यू में मिले अंक भी उन्हें नहीं दिखाए जा रहे हैं। वह आरटीआई के तहत इंटरव्यू में मिले अंक की जानकारी मांगेंगी। इसके अलावा उनकी मांग के बावजूद उनसे संबंधित प्रकरण वेबसाइट पर नहीं डाले गए।
विज्ञापन
जबकि रिजल्ट में किसी तरह का संशोधन या नोटिफिकेशन आयोग की वेबसाइट अपलोड होना चाहिए। सुभाषिनी का कहना है कि आयोग की भर्तियों में अनियमितता के लगातार मामले सामने आते रहे हैं। इस पर कहीं न कहीं रोक लगनी चाहिए। जब प्रधानमंत्री ने खुद इस प्रकरण को संज्ञान में लिया है तो वह उनसे मिलने की कोशिश करेंगी और प्रत्यावेदन सौंपेंगी। लगातार आरोपों के मद्देनजर उन्होंने आयोग के औचित्य पर भी सवाल उठाया।
विज्ञापन
पीसीएस-2015 मुख्य परीक्षा में समाजकार्य में सुहाषिनी को पहले फेल कर दिया गया। उन्हें समाजकार्य के एक पेपर में मात्र 47 अंक मिले थे। आरटीई के तहत जब उन्होंने कॉपी देखी तो पता चला कि उनके 88 अंक हैं। खास यह कि पहले उन्हें किसी दूसरे की कॉपी दिखाई गई थी। हालांकि नंबर बढ़ने के बाद उन्हें मुख्य परीक्षा में सफल किया गया और अंतिम परिणाम घोषित होने के तकरीबन एक साल बाद साक्षात्कार लिया गया। हालांकि वह अंतिम रूप से असफल ही रहीं। सोमवार के अंक में अमर उजाला में खबर छपने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और वाराणसी की चुनावी रैली में इस पर चर्चा की।
विज्ञापन
इस तरह से प्रधानमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद सुहाषिनी ने भी आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि 88 नंबर मिलने की बात भी गलत है। उनका कहना है कि अन्य पेपर में उनके काफी अधिक अंक हैं। पहले भी उन्हें इतने कम अंक नहीं मिले। छह महीने की लगातार दौड़ लगाने के बाद आयोग ने टालने की प्रवृत्ति अपनाई और इस तरह से अलग से साक्षात्कार करा लिया। उनका कहना है कि आयोग की मंशा साफ नहीं है और इंटरव्यू में मिले अंक भी उन्हें नहीं दिखाए जा रहे हैं। वह आरटीआई के तहत इंटरव्यू में मिले अंक की जानकारी मांगेंगी। इसके अलावा उनकी मांग के बावजूद उनसे संबंधित प्रकरण वेबसाइट पर नहीं डाले गए।
विज्ञापन
जबकि रिजल्ट में किसी तरह का संशोधन या नोटिफिकेशन आयोग की वेबसाइट अपलोड होना चाहिए। सुभाषिनी का कहना है कि आयोग की भर्तियों में अनियमितता के लगातार मामले सामने आते रहे हैं। इस पर कहीं न कहीं रोक लगनी चाहिए। जब प्रधानमंत्री ने खुद इस प्रकरण को संज्ञान में लिया है तो वह उनसे मिलने की कोशिश करेंगी और प्रत्यावेदन सौंपेंगी। लगातार आरोपों के मद्देनजर उन्होंने आयोग के औचित्य पर भी सवाल उठाया।