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गिरफ्तारी नहीं तो प्रदेश में बंद होंगे ईसाई संस्थान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 16 Dec 2016 01:41 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शियाट्स (सैम हिगिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज) डीम्ड विश्वविद्यालय में कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर हमले, डकैती और धमकी के आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद की गिरफ्तारी नहीं की गई तो इलाहाबाद समेत प्रदेश भर में ईसाई संस्थान बंद कर दिए जाएंगे। यहां शियाट्स प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि गुंडागर्दी का केस लिखाने के बाद पुलिस-प्रशासन तथा शासन को ज्ञापन देकर भय के माहौल में बारे में बताते हुए गिरफ्तारी तथा सुरक्षा की मांग की गई है। अगर प्रशासन ने बाहुबली पूर्व सांसद और उनके आदमियों की गिरफ्तारी में टालमटोल जारी रखी तो दो दिन बाद संस्थानों की बंदी का फैसला होगा।
बृहस्पतिवार दोपहर एसएसपी और एडीएम सिटी को ज्ञापन देने के बाद शियाट्स प्रशासन की ओर से जनसंपर्क अधिकारी डॉ.रमाकांत दुबे ने अमर उजाला से कहा कि अफसरों ने गिरफ्तारी के सवाल पर जांच की बात कहकर टाल दिया है। ऐसे में लगता है कि पुलिस अधिकारी हमले और बवाल के आरोपी पूर्व सांसद या उनके किसी भी आदमी को गिरफ्तार करने से कतरा रहे हैं। इसीलिए डकैती जैसी धारा होने के बावजूद जांच की बात कही जा रही है जबकि सीसीटीवी फुटेज में भी अतीक और उनके लोग कर्मचारियों को पीटते दिख रहे हैं।
अभी किसी आम आदमी पर यही केस लिखा गया होता तो पुलिस रातों-रात उठाकर हवालात में डाल देती और फिर जेल भी भेज दिया जाता। और यहां शैक्षिक संस्थान में गुंडागर्दी में भी पुलिस अफसर चुप्पी साधे हैं। डॉ.दुबे ने कहा कि दो दिन में गिरफ्तारी नहीं होती है तो प्रदेश के सभी मिशनरी संस्थानों की बंदी का निर्णय लिया जाएगा। इस बाबत आईजी और डीआईजी से भी बात की गई हैं और सबने आश्वासन ही दिया है।
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शियाट्स में बलवा, मारपीट, डकैती के आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद की गिरफ्तारी के लिए जब शियाट्स प्रशासन पुलिस अधिकारियों पर दबाव बना रहा था तभी इससे बेफिक्र अतीक चकिया स्थित अपने कार्यालय में दरबार लगा लगाए थे। उन्होंने मीडिया को बयान दिए और अपने करीबियों तथा चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोगों के साथ बैठक की। यही नहीं, खुल्दाबाद थाने की पुलिस भी सरकारी जीप में उनके कार्यालय के बाहर मौजूद रही। पुलिसवालों में भी कानपुर कैंट से सपा के प्रत्याशी घोषित बाहुबली अतीक की इस ठसक की चर्चा होती रही। लोगों ने कहा कि डकैती और बलवा में नामजद होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तारी की चिंता और आशंका नहीं है इसलिए ही वह दरबार लगाए हुए हैं। पूर्व सांसद अतीक शाम तक अपने कैंप कार्यालय में मौजूद रहे।
अतीक ने बृहस्पतिवार को भी इस घटना पर खुलकर प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया को बयान दिए। पूर्व सांसद ने दो टूक कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। वह एक शादी समारोह में शामिल होने नैनी के डांडी गए तो छात्रों सैफ और शाकिब के निष्कासन पर बात करने के लिए शियाट्स पहुंच गए थे। वह पहले भी शियाट्स के वीसी प्रो.आरबी लाल से फोन पर सिफारिश कर चुके थे, लेकिन तब भी निलंबित छात्रों को निष्कासित कर दिया गया। अतीक ने फिर कहा कि शियाट्स में उन्होंने या उनके आदमियों ने किसी पर हाथ नहीं उठाया। मारपीट गुस्साए छात्रों ने की थी। शियाट्स के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के बारे में बताने पर भी अतीक ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है। मैं तो बात करने गया मगर वीसी मौजूद नहीं थे।
शियाट्स में बलवा की घटना में अतीक अहमद के खिलाफ नैनी थाने में एफआईआर दर्ज कराने वाले जनसंपर्क और मीडिया प्रभारी डॉ. रमाकांत दुबे का आरोप है कि पूर्व सांसद ने उन्हें फोन पर धमकाया कि मुकदमा वापस ले लो वरना जान से मार दिया जाएगा। असलहाधारी लोगों को घर भी भेजकर धमकी दी गई। डॉ.रमाकांत का कहना है कि बाहुबली पूर्व सांसद की धमकी और उनके हथियारबंद आदमियों की घर के आसपास मौजूदगी से उनके परिवार के लोग दहशत में हैं। उन्होंने एसएसपी को अतीक के फोन कॉल की ऑडियो रिकार्डिंग सौंपी है। शासन को भी ज्ञापन के साथ शियाट्स में हमले के दौरान सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तथा अतीक द्वारा फोन पर धमकी की रिकार्डिग भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है। डॉ.दुबे ने आशंका जाहिर की है कि वह इस मुकदमे के वादी हैं, इसलिए उन्हें पुलिस की सुरक्षा नहीं मिली तो अतीक के लोग हमला कर सकते हैं।
पूर्व सांसद अतीक अहमद की मौजूदगी में कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर हमले और लूटपाट के बाद शियाट्स बुधवार रात से पुलिस-पीएसी के पहरे में है। इसके बावजूद कर्मचारियों में इस बात का खौफ है कि अतीक और उनके आदमी फिर आकर उनकी पिटाई कर सकते हैं और ये पुलिस-पीएसी वाले तमाशा देखते रह जाएंगे। कर्मचारियों ने बुधवार की घटना का हवाला दिया, जब अतीक और उनके आदमी पिटाई कर रहे थे तब संस्थान में तैनात असलहाधारी सुरक्षाकर्मी बचाव की बजाय दूर भाग गए थे। अतीक नाम का खौफ ऐसा है कि कोई उनके सामने आने की साहस नहीं जुटा सका। बृहस्पतिवार को दिन भर शियाट्स परिसर और बाहर भी अतीक एंड कंपनी द्वारा कार्यालय में घुसकर हमले की चर्चा रही। दिन में कई बार नैनी थाना प्रभारी के अलावा सीओ और एसपी यमुनापार भी शियाट्स परिसर पहुंचे और सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस व्यवस्था का जायजा लिया।
-बुधवार शाम चार बजे शियाट्स में करीब आधे घंटे तक कर्मचारियों की पिटाई, अपहरण की कोशिश, धमकी, गालीगलौज और टैब लूटने की घटना में डॉ.रमाकांत दुबे की तहरीर पर लिखी गई एफआईआर में आठ धाराओं 147, 148, 149, 395, 323, 504, 506, सात क्रिमिलन लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत पांच लोगों पूर्व सांसद अतीक अहमद, निष्कासित छात्र मोहम्मद सैफ, दिव्यांशु कुंदल, सिराज, नाजिर को नामजद किया गया है। हमले में 50-60 अज्ञात लोगों को शािमल बताया गया है।
पूर्व सांसद व सपा नेता अतीक अहमद और अन्य पर लगी धाराएं
147- बलवा करना। दो साल की कैद और जुर्माना -संज्ञेय अपराध- जमानतीय
148- हथियार के साथ बलवा करना: दो साल की कैद- संज्ञेय अपराध- जमानतीय
149- विधि विरुद्ध जमाव: सामूहिक रूप से किया गया अपराध।
395- डकैती: आजीवन या 10 साल की कठिन कैद और जुर्माना- संज्ञेय- अजमानतीय
323- मारपीट कर चोट पहुंचाना: एक साल की सजा और जुर्माना- संज्ञेय-जमानतीय
504- अपमान: दो साल कैद और जुर्माना- असंज्ञेय- जमानती
506- जान से मारने की धमकी: दो साल कैद और जुर्माना- असंज्ञेय- जमानती
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बृहस्पतिवार दोपहर एसएसपी और एडीएम सिटी को ज्ञापन देने के बाद शियाट्स प्रशासन की ओर से जनसंपर्क अधिकारी डॉ.रमाकांत दुबे ने अमर उजाला से कहा कि अफसरों ने गिरफ्तारी के सवाल पर जांच की बात कहकर टाल दिया है। ऐसे में लगता है कि पुलिस अधिकारी हमले और बवाल के आरोपी पूर्व सांसद या उनके किसी भी आदमी को गिरफ्तार करने से कतरा रहे हैं। इसीलिए डकैती जैसी धारा होने के बावजूद जांच की बात कही जा रही है जबकि सीसीटीवी फुटेज में भी अतीक और उनके लोग कर्मचारियों को पीटते दिख रहे हैं।
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अभी किसी आम आदमी पर यही केस लिखा गया होता तो पुलिस रातों-रात उठाकर हवालात में डाल देती और फिर जेल भी भेज दिया जाता। और यहां शैक्षिक संस्थान में गुंडागर्दी में भी पुलिस अफसर चुप्पी साधे हैं। डॉ.दुबे ने कहा कि दो दिन में गिरफ्तारी नहीं होती है तो प्रदेश के सभी मिशनरी संस्थानों की बंदी का निर्णय लिया जाएगा। इस बाबत आईजी और डीआईजी से भी बात की गई हैं और सबने आश्वासन ही दिया है।
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शियाट्स में बलवा, मारपीट, डकैती के आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद की गिरफ्तारी के लिए जब शियाट्स प्रशासन पुलिस अधिकारियों पर दबाव बना रहा था तभी इससे बेफिक्र अतीक चकिया स्थित अपने कार्यालय में दरबार लगा लगाए थे। उन्होंने मीडिया को बयान दिए और अपने करीबियों तथा चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोगों के साथ बैठक की। यही नहीं, खुल्दाबाद थाने की पुलिस भी सरकारी जीप में उनके कार्यालय के बाहर मौजूद रही। पुलिसवालों में भी कानपुर कैंट से सपा के प्रत्याशी घोषित बाहुबली अतीक की इस ठसक की चर्चा होती रही। लोगों ने कहा कि डकैती और बलवा में नामजद होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तारी की चिंता और आशंका नहीं है इसलिए ही वह दरबार लगाए हुए हैं। पूर्व सांसद अतीक शाम तक अपने कैंप कार्यालय में मौजूद रहे।
अतीक ने बृहस्पतिवार को भी इस घटना पर खुलकर प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया को बयान दिए। पूर्व सांसद ने दो टूक कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। वह एक शादी समारोह में शामिल होने नैनी के डांडी गए तो छात्रों सैफ और शाकिब के निष्कासन पर बात करने के लिए शियाट्स पहुंच गए थे। वह पहले भी शियाट्स के वीसी प्रो.आरबी लाल से फोन पर सिफारिश कर चुके थे, लेकिन तब भी निलंबित छात्रों को निष्कासित कर दिया गया। अतीक ने फिर कहा कि शियाट्स में उन्होंने या उनके आदमियों ने किसी पर हाथ नहीं उठाया। मारपीट गुस्साए छात्रों ने की थी। शियाट्स के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के बारे में बताने पर भी अतीक ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है। मैं तो बात करने गया मगर वीसी मौजूद नहीं थे।
शियाट्स में बलवा की घटना में अतीक अहमद के खिलाफ नैनी थाने में एफआईआर दर्ज कराने वाले जनसंपर्क और मीडिया प्रभारी डॉ. रमाकांत दुबे का आरोप है कि पूर्व सांसद ने उन्हें फोन पर धमकाया कि मुकदमा वापस ले लो वरना जान से मार दिया जाएगा। असलहाधारी लोगों को घर भी भेजकर धमकी दी गई। डॉ.रमाकांत का कहना है कि बाहुबली पूर्व सांसद की धमकी और उनके हथियारबंद आदमियों की घर के आसपास मौजूदगी से उनके परिवार के लोग दहशत में हैं। उन्होंने एसएसपी को अतीक के फोन कॉल की ऑडियो रिकार्डिंग सौंपी है। शासन को भी ज्ञापन के साथ शियाट्स में हमले के दौरान सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तथा अतीक द्वारा फोन पर धमकी की रिकार्डिग भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है। डॉ.दुबे ने आशंका जाहिर की है कि वह इस मुकदमे के वादी हैं, इसलिए उन्हें पुलिस की सुरक्षा नहीं मिली तो अतीक के लोग हमला कर सकते हैं।
पूर्व सांसद अतीक अहमद की मौजूदगी में कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर हमले और लूटपाट के बाद शियाट्स बुधवार रात से पुलिस-पीएसी के पहरे में है। इसके बावजूद कर्मचारियों में इस बात का खौफ है कि अतीक और उनके आदमी फिर आकर उनकी पिटाई कर सकते हैं और ये पुलिस-पीएसी वाले तमाशा देखते रह जाएंगे। कर्मचारियों ने बुधवार की घटना का हवाला दिया, जब अतीक और उनके आदमी पिटाई कर रहे थे तब संस्थान में तैनात असलहाधारी सुरक्षाकर्मी बचाव की बजाय दूर भाग गए थे। अतीक नाम का खौफ ऐसा है कि कोई उनके सामने आने की साहस नहीं जुटा सका। बृहस्पतिवार को दिन भर शियाट्स परिसर और बाहर भी अतीक एंड कंपनी द्वारा कार्यालय में घुसकर हमले की चर्चा रही। दिन में कई बार नैनी थाना प्रभारी के अलावा सीओ और एसपी यमुनापार भी शियाट्स परिसर पहुंचे और सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस व्यवस्था का जायजा लिया।
-बुधवार शाम चार बजे शियाट्स में करीब आधे घंटे तक कर्मचारियों की पिटाई, अपहरण की कोशिश, धमकी, गालीगलौज और टैब लूटने की घटना में डॉ.रमाकांत दुबे की तहरीर पर लिखी गई एफआईआर में आठ धाराओं 147, 148, 149, 395, 323, 504, 506, सात क्रिमिलन लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत पांच लोगों पूर्व सांसद अतीक अहमद, निष्कासित छात्र मोहम्मद सैफ, दिव्यांशु कुंदल, सिराज, नाजिर को नामजद किया गया है। हमले में 50-60 अज्ञात लोगों को शािमल बताया गया है।
पूर्व सांसद व सपा नेता अतीक अहमद और अन्य पर लगी धाराएं
147- बलवा करना। दो साल की कैद और जुर्माना -संज्ञेय अपराध- जमानतीय
148- हथियार के साथ बलवा करना: दो साल की कैद- संज्ञेय अपराध- जमानतीय
149- विधि विरुद्ध जमाव: सामूहिक रूप से किया गया अपराध।
395- डकैती: आजीवन या 10 साल की कठिन कैद और जुर्माना- संज्ञेय- अजमानतीय
323- मारपीट कर चोट पहुंचाना: एक साल की सजा और जुर्माना- संज्ञेय-जमानतीय
504- अपमान: दो साल कैद और जुर्माना- असंज्ञेय- जमानती
506- जान से मारने की धमकी: दो साल कैद और जुर्माना- असंज्ञेय- जमानती