केशव गुट में होने का मिला फायदा, लाइन में थे दिग्गज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Sun, 07 Apr 2019 02:09 AM IST
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keshari devi - फोटो : प्रयागराज
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केशरी देवी पटेल को टिकट मिलेगा या नहीं, यह सब सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर ही निर्भर था। दरअसल, फूलपुर संसदीय सीट से केशरी देवी पटेल के साथ पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं का नाम टिकट के उम्मीदवारों के तौर पर चल रहा था। इस सीट से डिप्टी सीएम केशव के पुत्र योगेश मौर्य को सशक्त उम्मीदवार माना जा रहा था। सोशल मीडिया आदि में योगेश का नाम भी उछला। चर्चा है कि वंशवाद के आरोप से बचने के लिए केशव ने अपने पुत्र की बजाय केशरी देवी को ही उम्मीदवार बनाने की वकालत कर दी। 
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पार्टी के भीतर खाने में पिछले दिनों चर्चा इस बात की रही कि केंद्रीय नेतृत्व केशव प्रसाद मौर्य को इस सीट से उम्मीदवार बनाने के लिए मंथन कर रहा है। हालांकि, केशव समर्थक डिप्टी सीएम के पुत्र योगेश को फूलपुर से उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि डिप्टी सीएम ने खुद को चुनाव लड़ने से दूर कर लिया। केंद्रीय नेतृत्व ने केशव से  ही पूछ लिया कि किसे उम्मीदवार बनाया जाए। इस बीच सूबे के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का नाम भी संभावित दावेदार के रूप में उछला।
विधायक प्रवीण पटेल, विक्रम पटेल आदि का भी नाम सामने आया। तीन नाम फाइनल भी हुए। इसमें एक अगड़ी एवं दो पिछड़ी जाति के नेताओं के रहे। क्योंकि पार्टी ने इलाहाबाद संसदीय सीट से सवर्ण प्रत्याशी के रूप में रीता बहुगुणा जोशी को उतार दिया, इसलिए फूलपुर से प्रवीण और केशरी से किसी एक को ही चुनने का विकल्प रह गया। अंत में डिप्टी सीएम से बातचीत करने के बाद पार्टी ने केशरी देवी को प्रत्याशी घोषित कर दिया। दरअसल, पांच बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी केशरी देवी की जिले की सभी विधानसभा सीटों पर अच्छी पकड़ है। 
प्रयागराज की दोनों संसदीय सीट इलाहाबाद और फूलपुर में यह पहला मौका है कि जब किसी राष्ट्रीय दल ने दोनों ही सीटों पर महिला प्रत्याशी को टिकट दिया। भाजपा ने 26 मार्च को इलाहाबाद संसदीय सीट से सूबे की पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के नाम की घोषणा की थी। अब शनिवार को फूलपुर सीट से पार्टी ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केशरी देवी पटेल को मैदान में उतार गया। राजनीतिक दृष्टि से इन दोनों ही महिला नेताओं का कद बड़ा है।

इन दोनों ही सीटों के पुराने इतिहास पर गौर करें तो अब तक इलाहाबाद और फूलपुर से एक-एक बार महिला प्रत्याशी चुनाव जीत चुकी हैं। पहली बार फूलपुर संसदीय क्षेत्र से वर्ष 1977 में कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की मां कमला बहुगुणा भारतीय लोकदल के टिकट पर चुनाव जीती थीं। इसके  बाद 1991 में इलाहाबाद संसदीय  सीट से जनता दल के टिकट पर सरोज दुबे ने चुनाव जीता था। वहीं केशरी देवी पटेल की बात करें तो भले ही दो बार बसपा के टिकट पर 2004 एवं 2014 में लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन उनका राजनीतिक सफर भाजपा में ही शुरू हुआ।

1995 में ही वह भाजपा में शामिल हुई। पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा की वजह से ही वह बनीं। फूलपुर लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए ही वह बसपा के टिकट पर वर्ष 2004 का चुनाव अतीक अहमद के खिलाफ लड़ीं। अब तक पांच बार जिला पंचायत अध्यक्ष बन चुकी केशरी देवी पटेल का कहना है कि उन्हें हर बार समाजवादी पार्टी की वजह से ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी गंवानी पड़ी।

फूलपुर से भाजपा की प्रत्याशी केशरी देवी पटेल के पति का नाम गुलाब सिंह है, जो सेवानिवृत्त  प्रधानाचार्य हैं। केशरी देवी के तीन पुत्र दिनेश पटेल, दीपक पटेल एवं अरविंद पटेल हैं। दो बेटे प्रयागराज में तो एक बेटा शंकरगढ़ में ही कारोबार कर रहा है। केशरी देवी के मुताबिक उनके ससुर स्व. श्रीराम प्रताप सिंह पुराने संघी थे। उनका पुश्तैनी घर शंकरगढ़ के डेरा बारी गांव में है। बसपा सरकार के दौरान केशरी महिला कल्याण निगम की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। बसपा में वे 2004 से वर्ष 2017 तक रही। सूबे में योगी सरकार गठन हो जाने के बाद उन्होंने वर्ष 2017 में ही भाजपा ज्वाइन की।
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