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चमकते चेहरे की दुहाई पर सौ करोड़ की कमाई

Mon, 11 Jul 2016 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 11 Jul 2016 01:04 AM IST
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Thanks for shining on the face of a billion revenue
दंगल बनाम सुल्तान
पहले ही दिन सौ करोड़ का बिजनेस करने के लिए देशभर में तकरीबन दस हजार स्क्रीन खुलने की ख्वाहिश रखने वाले सिनेस्टार सलमान खान की सोच के पीछे का फंडा सिर्फ और सिर्फ अपनी इमेज को भुनाना और पैसा कमाना है। फिल्म कैसी हैं, कहानी दमदार है कि नहीं, इससे कोई खास लेना देना नहीं बल्कि इस सोच के पीछे का मकसद ज्यादा स्क्रीन्स के माध्यम से दर्शकों को सिनेमाघरों के टिकट काउंटर तक पहुंचाना है। अमूमन होता यह है कि अगर फिल्म की स्टोरी लीक न हो तो पहले दिन के बाद ही पता चलता है कि फिल्म देखने लायक है कि नहीं। ऐेसे में एक ही दिन में सौ करोड़ के बिजनेस की बात कहकर अपने फैंस को सब्जबाग दिखाकर फिल्म को सौ करोड़ या इससे अधिक के क्लब में शामिल करना है।
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तकरीबन  दो बरस पहले ही रिलीज हुई शाहरुख खान की फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ की ही बात करें तो फिल्म में कुछ खास न होने के बावजूद फिल्म ने पहले ही दिन चालीस करोड़ और कुल 385 करोड़ का बिजनेस किया। फिल्मकारों की मानें तो इसके पीछे का पूरा खेल मार्केटिंग और फैंस को दावों की दुनिया तक सीमित रखना है। फिल्में के कलेक्शन में ज्यादा असर मल्टीप्लेक्स और पीवीआर सिनेमाज के टिकट दरों का होता है क्योंकि सिंगल स्क्रीन के टिकट के दाम इनकी तुलना में कम होते हैं।

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फिल्म समीक्षक आनंद कक्कड़ कहते हैं, दस हजार सिनेमाघरों को खोलना और एक दिन में सौ करोड़ की कमाई का कोई मतलब ही नहीं है। कोई भी फिल्म पहले दिन में अपना सौ प्रतिशत नहीं दे सकती। फिल्मों को सौ करोड़ के क्लब में शामिल करने के पीछे जबरदस्त मार्केटिंग के जरिए दर्शकों का ब्रेनवाश करना है।  वैसे भी जितने सुपर स्टार्स की फिल्में रिलीज होती है, रिलीज से पहले उस फिल्म और उससे जुडे़ हर हिस्से के कापीराइट्स बिक चुके होते हैं। फिर बातें चैनल कॉपीराइट की हों या एडोर्समेंट कॉपीराइट ।

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अवतार सिनेमाघर के मैनेजर मोहन सिंह कहते हैं, दस हजार सिनेमाघरों की बात करना ही काफी नहीं, यह देखना भी जरूरी है कि साल भर इन सिनेमाघरों का खर्च कैसे निकलेगा। साल भर में दो-चार से ज्यादा ऐसी कोई फिल्म रिलीज नहीं होती है जो सुपरहिट हो। सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, अजय देवगन और अक्षय कुमार जैसे स्टार्स की फिल्में वर्ष में एक ही बार रिलीज होती हैं। इससे इतर जो फिल्में रिलीज होती हैं, वह औसत या फिर फ्लाप ही होती हैं। सबसे ज्यादा समस्याएं तो सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के साथ हैं।


फिल्म विश्लेषक धनंजय चोपड़ा कहते हैं, पहले फिल्म अपनी कहानी, गीत और कलाकारों के सशक्त अभिनय से हिट होती थी। फिल्म के गोल्डन और सिल्वर जुबली शो से पता चलता था कि फिल्म कितनी अच्छी है लेकिन अब पूरी तरह से स्थिति बदल गई है। आज बात सिर्फ मुनाफाखोरी की होती है। टीवी, रेडियो, विज्ञापनों आदि के माध्यम से दर्शकों को फिल्म के प्रति इतना उत्सुक कर दिया जाता है कि दर्शक सिनेमाघरों का रुख करते हैं, फिल्म अच्छी है या बुरी, यह तो बात में पता चलता है। तब तक तो फिल्म अपनी लागत से कई गुना मुनाफा निकाल लेती है।


फिल्म को सौ करोड़ के क्लब में शामिल करने में नया खेल सामने आ रहा है। सुपरस्टार्स की फिल्म सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों को इस शर्त के साथ दी जाती है कि वह टिकट दर बढ़ा दें। सलमान खान की ‘सुल्तान’ फिल्म के साथ भी यही हुआ है। सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में 25-30 प्रतिशत टिकट दर बढ़ाने के एग्रीमेंट पर ही उन्हें फिल्म दी गई। ऐसे में हर बार की तरह दर्शक ठगा हुआ ही रह गया।

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