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Prayagraj News: सहायक अध्यापकों का चयन शून्य घोषित कर सेवा समाप्ति आदेश रद्द

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jan 2024 04:50 AM IST
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Termination order of assistant teachers declared void and service termination order canceled
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूल के सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्ति आदेश को रद कर दिया है । साथ ही उन्हें सेवा निरंतरता के साथ बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि काम नहीं तो दाम नहीं, के सिद्धांत पर याचीगण जितनी अवधि तक सेवा से बाहर रहे, वेतन पाने के हकदार नहीं होंगे।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अजय कुमार व अन्य तथा पंकज कुमार व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि याचीगण ने अधूरी और गलत जानकारी के साथ 2015 की 15 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में आवेदन दिया। आवेदन देते समय उनका बीटीसी का परिणाम घोषित नहीं किया गया था, किंतु अंक प्राप्त हो गए थे। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लंबी चली चयन प्रक्रिया में फार्म की गलती सुधारने का मौका दिया गया। जिसका फायदा याचीगण ने भी उठाया। सरकार ने ही 15 जनवरी 16 तक छूट दी।
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कोर्ट ने कहा फार्म में गलत सूचना दी गई। ऐसे में वह चयन के बाद सेवा में बने रहने लायक नहीं थे। किंतु गलती सुधारने की छूट दी गई। मौका मिलते ही गलती सुधार ली। आवेदन के समय याचीगण अर्ह नहीं थे। किंतु दो तीन दिन में ही उनका बीटीसी परिणाम घोषित कर दिया गया और उन्होंने फार्म दुरूस्त कर लिया और चयनित होने के बाद सहायक अध्यापक नियुक्त हुए।
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कोर्ट ने कहा सुधार का मौका देने के बाद चयन शून्य करार देकर सेवा समाप्ति उचित नहीं है। याचीगण सहानुभूति पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने याचियों की बर्खास्तगी आदेश पांच सितंबर 23 व 23 अगस्त 23 को रद कर दिया है। साथ ही तीन हफ्ते में याचियों को कार्यभार सौंपने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद को यह भी निर्देश दिया है कि भविष्य की भर्ती में एक कालम दिया जाए, जिसमें बीटीसी परिणाम स्टेटस स्पष्ट तौर पर उल्लिखित किया जाए। इस मामले में याचियों को बीटीसी अंक मिल गया था, परिणाम कुछ दिन बाद घोषित हुआ। सभी पास हुए किंतु फार्म अधूरा भरा जा चुका था।

मालूम हो कि याचीगण ने विज्ञापन के समय सहायक अध्यापक भर्ती फार्म नहीं भरा था, लेकिन छूट मिलने के बाद बीटीसी अंक की जानकारी होने के बाद फार्म भरा और जब आवेदन की गलती सुधारने का मौका मिला तो फायदा उठाया और चयनित होकर नियुक्ति पाई। इनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। विभागीय जांच में पाया गया कि विज्ञापन की तिथि पर याची बीटीसी योग्यता नहीं रखते थे। कहा गया था कि गलत जानकारी देकर पंजीकरण कराने के लिए वह कपट के दोषी हैं। इस आधार पर उनके चयन को शून्य घोषित कर दिया गया था, जिसे चुनौती दी गई थी।
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