फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Tenth is the undeclared Promotion

दसवीं तक हो गया है अघोषित प्रमोशन

Thu, 02 Jun 2016 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 02 Jun 2016 01:15 AM IST
विज्ञापन
Tenth is the undeclared Promotion
CBSE
सीबीएसई स्कूलों में सीसीई लागू होने के बाद छठीं कक्षा से लेकर दसवीं तक छात्र-छात्राओं का अघोषित प्रमोशन कर दिया जाता है। सीसीई के  तहत छात्र-छात्राएं समेटिव एवं फारमेटिव असेसमेंट के दौरान इतने अंक पा जाते हैं कि वह फेल नहीं हो सकते। सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में जो विद्यार्थी फेल होते हैं, वह कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर पास हो जाते हैं। फेल होने वाले एकदम नहीं होते हैं। यह परीक्षा पैटर्न छात्रों को ग्यारहवीं कक्षा तक हर हाल में पहुंचा देता है। सीबीएसई स्कूलों में आरटीई के तहत आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल करने पर रोक है। नौवीं-दसवीं में सीसीई पैटर्न के तहत छात्रों को मनमाने तरीके से अंक बांटे जाने के कारण कोई विद्यार्थी फेल नहीं होता।
विज्ञापन


सीसीई पैटर्न में छात्रों को 100 नंबर साल भर में होने वाले चार फारमेटिव असेसमेंट और दो समेटिव में बंट जाते हैं। बोर्ड का निर्देश है कि फारमेटिव असेसमेंट में बच्चे को उस एक्टिविटीज का अंक जोड़ा जाए, जिसमें नंबर अधिक मिले हों। बच्चों को इतना नंबर मिल जाता है कि वह बिना समेटिव असेसमेंट दिए बच्चे पास हो जाते हैं। बिना मेहनत के पास होने वाले बच्चों पर ग्यारहवीं कक्षा में जैसे ही पढ़ाई का बोझ बढ़ता है, वह दबाव में आ जाते हैं। अच्छे विद्यार्थी तो पास हो जाते हैं परंतु औसत विद्यार्थियों का नंबर कम हो जाने से उनकी मेरिट बिगड़ जाती है। इससे नीचे वाले बच्चे फेल होकर ग्यारहवीं में ही दबाव में आ जाते हैं।
विज्ञापन


विशेषज्ञ डॉ. जीके द्विवेदी का कहना है कि यदि नौवीं कक्षा में सीसीई पैटर्न हटा दिया जाए तो जो बच्चे नौवीं-दसवीं पार करके ग्यारहवीं में फेल होते हैं, वह नौवीं से अपनी पढ़ाई में सुधार का प्रयास करेंगे। डॉ. द्विवेदी कहना है कि बोर्ड को चाहिए कि वह नौवीं-दसवीं को सेमेस्टर में बांटकर एक सेमेस्टर को सीसीई पैटर्न रखें, शेष दूसरे सेमेस्टर में छात्रों ग्यारहवीं के पैटर्नपर परीक्षा करवाएं, इससे बच्चों पर दबाव कम होगा। उनमें कोर्स पढ़ने की आदत का विकास होगा। बोर्ड को बैलेंस बनाना होगा, ताकि बच्चे की ओवरआल ग्रोथ हो पाए। इसके लिए उन्होंने दसवीं में स्कूल बेस्ड परीक्षा खत्म करके पूरी तरह से बोर्ड परीक्षा कराने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से सीसीई में बदलाव के संकेत देने के बाद भी अभी तक कोई पहल नहीं की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed