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Prayagraj News: अस्थायी पूर्व सेवा भी पेंशन के लिए मान्य, सेवानिवृत्त संग्रह अमीन को राहत
Wed, 23 Sep 2026 02:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:37 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त संग्रह अमीन चंद्रपाल भाटी को राहत देते हुए उनकी सीजनल संग्रह अमीन के रूप में की गई पूर्व सेवा को पेंशन की अर्हकारी सेवा में जोड़ने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने राज्य सरकार को नियमानुसार पेंशन समेत सभी सेवानिवृत्ति लाभों की गणना कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
याची बुलंदशहर के तहसील स्याना में संग्रह अमीन के पद पर कार्यरत थे। उन्हें दो जून 1978 को सीजनल संग्रह अमीन नियुक्त किया गया था। पांच जून 2009 को उनकी नियुक्ति नियमित संग्रह अमीन के पद पर हुई। 31 मई 2014 को वे सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, 22 जुलाई 2015 के आदेश से उनकी पेंशन यह कहते हुए रोक दी गई कि उनकी अर्हकारी सेवा पूरी नहीं है।
याची के अधिवक्ता दलील दी कि पेंशन की अर्हकारी सेवा की गणना में पूर्व की सीजनल सेवा को भी शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अलख प्रकाश मिश्रा बनाम अपर जिलाधिकारी, झांसी मामले में तय सिद्धांत के आधार पर कहा कि तदर्थ, वर्क-चार्ज या सीजनल सेवा को पेंशन की अर्हकारी सेवा में गिना जा सकता है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भाटी की सीजनल सेवा जोड़ने पर वे पेंशन के पात्र हैं लेकिन पेंशन की राशि पांच जून 2009 से 31 मई 2014 की नियमित सेवा के आधार पर निर्धारित होगी। राज्य सरकार को आठ सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी गई।
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याची बुलंदशहर के तहसील स्याना में संग्रह अमीन के पद पर कार्यरत थे। उन्हें दो जून 1978 को सीजनल संग्रह अमीन नियुक्त किया गया था। पांच जून 2009 को उनकी नियुक्ति नियमित संग्रह अमीन के पद पर हुई। 31 मई 2014 को वे सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, 22 जुलाई 2015 के आदेश से उनकी पेंशन यह कहते हुए रोक दी गई कि उनकी अर्हकारी सेवा पूरी नहीं है।
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याची के अधिवक्ता दलील दी कि पेंशन की अर्हकारी सेवा की गणना में पूर्व की सीजनल सेवा को भी शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अलख प्रकाश मिश्रा बनाम अपर जिलाधिकारी, झांसी मामले में तय सिद्धांत के आधार पर कहा कि तदर्थ, वर्क-चार्ज या सीजनल सेवा को पेंशन की अर्हकारी सेवा में गिना जा सकता है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भाटी की सीजनल सेवा जोड़ने पर वे पेंशन के पात्र हैं लेकिन पेंशन की राशि पांच जून 2009 से 31 मई 2014 की नियमित सेवा के आधार पर निर्धारित होगी। राज्य सरकार को आठ सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी गई।